
Tuesday, December 17, 2013
धर्मनिरपेक्षता का निरिक्षण नहीं करोगे क्या ?
हमरे पश्चिम बंगाल में एक जिला है दक्षिण चौबीस परगना , उसमें मग्राहत नाम का ब्लाक है उसमें बीस साल में हिन्दुओं का आबादी 87 परसेंट से घाट के 47 होगया और और मुसलमानों का आबादी 11 परसेंट से बड कर 81 होगया ।
महिना भर पहले मुसलमानों का एक सम्मलेन हुआ वहां हिन्दू धर्म को गली गलोच , हमरे देवी देवताओं को गली गलोच और उन्होंने जलूस निकले ,, उस जलूस में ९ ० ० महिला का प्रदर्शन किया और घोषण किया के हमने एक साल में यह नौ सौ लड़कियों को हिन्दू से मुसलमान बनाया और लव जिहाद के चक्कर में आके जो मुस्लमान बन गयी उनका जलसों निकले फिर भी हिन्दू मौन है
क्या इसके बाद भी धर्मनिरपेक्षता का निरिक्षण नहीं करोगे क्या ?
चीन के प्रांत में दंगा

दुनिया भर में कहीं भी दंगा हो नरसंहार हो मार-काट हो लेकिन वजह सिर्फ एक होती है... वो वजह जो बच्चा-बच्चा जनता है... पूरी दुनिया इससे जूझ रही है लेकिन जानवरों को कोई फर्क नहीं पड़ता । सम्पूर्ण विश्व को अपनी तरह नपुंसक बनाने की इस मुहीम का नाम है 'इस्लाम' ।
वास्तव में इस्लाम और मुसलमान में ऐसी कोई बात नहीं जो इंसानों के भीतर पाई जाती हो या साफ़ शब्दों में कहूँ तो मुसलमान और इंसान में कोई समानता नहीं... जो इंसान है वो मुसलमान नहीं होगा और जो मुसलमान है वो इंसान नहीं होगा ।
शायद यही वजह है कि अंगोला, जापान और रूस जैसे देशों ने इस बीमारी की पहचान करके इस पर पाबंदी जैसे कठोर क़दम तक उठा लिए...
Monday, December 16, 2013
"गंगा-जमुनी", "अमन की आशा", "सभी धर्म एक समान हैं"

रामेश्वरम मंदिर के लिए प्रसिद्ध तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के कई मुस्लिम बहुल गाँवों में स्थानीय पंचायतों ने फतवा जारी करके "बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश निषेध" का बोर्ड लगा दिया है.
अथियुत्हू, पुतुवालासी, पनईकुलम, सिथरकोटी जैसे कई मुस्लिम बहुल गाँवों में मुस्लिम जमात ताजुल इस्लाम संघ द्वारा नोटिस लगाया गया है कि, "इस गाँव में किसी भी प्रकार का पोस्टर-बैनर अथवा गाड़ियों के होर्न बगैर पंचायत की इजाज़त के नहीं लगाए जा सकेंगे, कोई भी गैर-इस्लामिक गतिविधि स्वीकार नहीं है". स्थानीय निवासी बताते हैं कि इस इलाके से पंचायत स्तर पर भी आज तक कभी कोई हिन्दू उम्मीदवार नहीं जीता. रामनाथपुरम के सांसद हैं मुस्लिम मुनेत्र कषगम (MMK) के एमएच जवाहिरुल्लाह.
पामबन गाँव के रहवासी कुप्पुरामू बताते हैं कि यहाँ कई गाँवों में लगभग ५०-६०% दुकानदार मुसलमान हैं, और हिन्दू को किसी व्यवसाय आरम्भ करने के लिए इनकी अनुमति लेनी होती है.... जिला कलेक्टर अथवा राज्य सरकार (चाहे DMK सरकार हो या AIDMK) को शिकायत करने पर मुस्लिम वोटों के लालच में आँखें मूँद ली जाती हैं.
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क्या कहा?? ये सब मैं आपको क्यों बता रहा हूँ?? अरे भाई, कहा था ना कि मैं एक "डाकिया" हूँ, मेरा काम है सूचना देना... बाकी आप लोग "गंगा-जमुनी", "अमन की आशा", "सभी धर्म एक समान हैं" जैसे सेक्यूलर तराने गाते रहिए न भाई,,, कौन रोक रहा है...
सैकुलर हिंदु

जेहादी मुसलमान कितने भी गंदे कयों ना हों .कितने भी नरपिशाच कयों न हों ........
लेकिन सैकुलर हिंदु की तरह दोगले बिलकुल भी नही .कि दिल मे कुछ और जुबां पर कुछ...
जो कहते हैं डंके की चोट पर कहते हैं
यकिन नही आता ..तो खुद ही देख लें
लेकिन सैकुलर हिंदु की तरह दोगले बिलकुल भी नही .कि दिल मे कुछ और जुबां पर कुछ...
जो कहते हैं डंके की चोट पर कहते हैं
यकिन नही आता ..तो खुद ही देख लें
Friday, December 13, 2013
1971 के युद्ध में हिंदुओं को चुन-चुनकर मार रही थी पाकिस्तानी फौज
1971 के युद्ध में हिंदुओं को चुन-चुनकर मार रही थी पाकिस्तानी फौज

1971 के युद्ध में पाकिस्तानी फौज पूर्वी पाकिस्तांन में हिंदुओं को चुन-चुनकर कर मार रही थी. पाकिस्तानी फौज ने जान-बूझकर ऐसा किया. भारत की सरकार यह सब जानती थी, लेकिन इसे गलत तरीके से लोगों तक पहुंचाया गया. तब कहा गया कि पाकिस्तानी सेना ने बंगालियों का कत्लेआम किया है. यह सब एक किताब में लिखा है, जो हाल ही में रिलीज हुई है.
अब तक ऐसा माना जाता रहा था कि 1971 के भारत-पाकिस्ताजन युद्ध में पाकिस्ता.नी फौज के निशाने पर बंगाली थे. पर अब एक किताब से नई जानकारी सामने आई है. किताब में बांग्लापदेश की आजादी (तब के पूर्वी पाकिस्ताान) की लड़ाई के बारे में कुछ अहम बातों का खुलासा किया गया है. भारत सरकार इस तथ्या से पूरी तरह वाकिफ थी कि युद्ध में हिंदू निशाना बन रहे हैं, इसके बावजूद इसे ज्यायदा प्रचारित नहीं किया गया. अगर तब इस बात का खुलासा किया जाता, तो जनसंघ के नेताओं के भड़कने का खतरा था.
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी जनसंघ से ही निकली है. लेखक गरी जे. बास ने अपनी किताब, 'The Blood Telegram: Nixon, Kissinger and a Forgotten Genocide में इस युद्ध के बारे में विस्ता र से लिखा है.
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में राजनीति और अंतरराष्ट्रीdय संबंध के प्रोफेसर जे. बास के मुताबिक वह युद्ध मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तािन में रह रहे हिंदुओं के खिलाफ था, इसके बावजूद भारत ने इसे बंगालियों के खिलाफ संहार करार दिया.
जे. बास ने लिखा है कि भारतीय विदेश मंत्रालय का तर्क है कि पाकिस्ताोन के जनरल चुनाव हार बैठे, क्योंखकि उनके देश में बंगालियों की तादाद ज्यासदा थी.
पाकिस्तान की सेना लगातार हिंदू समुदाय को निशाना बनाती रही. किताब के मुताबिक, भारतीय अधिकारी यह नहीं चाहते थे कि जनसंघ पार्टी के हिंदू राष्ट्र वादियों को उग्र होने का मौका मिले.
जे. बास ने अपनी किताब में लिखा है कि तब रूस में भारत के राजदूत रहे डीपी धर के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने पहले से हिंदुओं को ही जनसंहार के लिए निशाना बना रखा था. लेकिन इस बात से हिंदू राष्ट्रवादियों का गुस्सा भड़कने का खतरा था.

1971 के युद्ध में पाकिस्तानी फौज पूर्वी पाकिस्तांन में हिंदुओं को चुन-चुनकर कर मार रही थी. पाकिस्तानी फौज ने जान-बूझकर ऐसा किया. भारत की सरकार यह सब जानती थी, लेकिन इसे गलत तरीके से लोगों तक पहुंचाया गया. तब कहा गया कि पाकिस्तानी सेना ने बंगालियों का कत्लेआम किया है. यह सब एक किताब में लिखा है, जो हाल ही में रिलीज हुई है.
अब तक ऐसा माना जाता रहा था कि 1971 के भारत-पाकिस्ताजन युद्ध में पाकिस्ता.नी फौज के निशाने पर बंगाली थे. पर अब एक किताब से नई जानकारी सामने आई है. किताब में बांग्लापदेश की आजादी (तब के पूर्वी पाकिस्ताान) की लड़ाई के बारे में कुछ अहम बातों का खुलासा किया गया है. भारत सरकार इस तथ्या से पूरी तरह वाकिफ थी कि युद्ध में हिंदू निशाना बन रहे हैं, इसके बावजूद इसे ज्यायदा प्रचारित नहीं किया गया. अगर तब इस बात का खुलासा किया जाता, तो जनसंघ के नेताओं के भड़कने का खतरा था.
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी जनसंघ से ही निकली है. लेखक गरी जे. बास ने अपनी किताब, 'The Blood Telegram: Nixon, Kissinger and a Forgotten Genocide में इस युद्ध के बारे में विस्ता र से लिखा है.
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में राजनीति और अंतरराष्ट्रीdय संबंध के प्रोफेसर जे. बास के मुताबिक वह युद्ध मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तािन में रह रहे हिंदुओं के खिलाफ था, इसके बावजूद भारत ने इसे बंगालियों के खिलाफ संहार करार दिया.
जे. बास ने लिखा है कि भारतीय विदेश मंत्रालय का तर्क है कि पाकिस्ताोन के जनरल चुनाव हार बैठे, क्योंखकि उनके देश में बंगालियों की तादाद ज्यासदा थी.
पाकिस्तान की सेना लगातार हिंदू समुदाय को निशाना बनाती रही. किताब के मुताबिक, भारतीय अधिकारी यह नहीं चाहते थे कि जनसंघ पार्टी के हिंदू राष्ट्र वादियों को उग्र होने का मौका मिले.
जे. बास ने अपनी किताब में लिखा है कि तब रूस में भारत के राजदूत रहे डीपी धर के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने पहले से हिंदुओं को ही जनसंहार के लिए निशाना बना रखा था. लेकिन इस बात से हिंदू राष्ट्रवादियों का गुस्सा भड़कने का खतरा था.
Wednesday, December 11, 2013
ब्रेडफ़ोर्ड को लेकर "सेकुलर" मित्रों से दो सवाल
ब्रेडफ़ोर्ड को लेकर "सेकुलर" मित्रों से दो सवाल
इंग्लैण्ड में पूर्वी लन्दन, ब्रेडफ़ोर्ड एवं बर्मिंघम शहरों के मुस्लिम बहुल इलाकों में कुछ दिनों पहले अचानक रात को पोस्टर जगह-जगह खम्भों पर लगे मिले… साथ में कुछ पर्चे भी मिले हैं जिसमें मुस्लिम बहुल इलाकों को "शरीयत कण्ट्रोल्ड झोन" बताते हुए वहाँ से गुज़रने वालों को चेताया गया है, कि यहाँ से गुज़रने अथवा इस इलाके में आने वाले लोग संगीत न बजाएं, जोर-जोर से गाना न गाएं, सिगरेट-शराब न पिएं, महिलाएं अपना सिर ढँककर निकलें… आदि-आदि। कुछ गोरी महिलाओं पर हल्के-फ़ुल्के हमले भी किए गये हैं… हालांकि पुलिस ने इन पोस्टरों को तुरन्त निकलवा दिया है, फ़िर भी आसपास के अंग्रेज रहवासियों ने सुरक्षा सम्बन्धी चितांए व्यक्त की हैं एवं ऐसे क्षेत्रों के आसपास स्थित चर्च के पादरियों ने सावधान रहने की चेतावनी जारी कर दी है…।
स्थानीय निवासियों ने दबी ज़बान में आरोप लगाए हैं कि पिछले दो दिनों से लन्दन में जारी दंगों में "नीग्रो एवं काले" उग्र युवकों की आड़ में नकाब पहनकर मुस्लिम युवक भी इन दंगों, आगज़नी और लूटपाट में सक्रिय हैं…। सच्चाई का खुलासा लन्दन पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किये गये 300 से दंगाईयों से पूछताछ के बाद ही हो सकेगा, परन्तु "शरीया जोन" के पोस्टर देखकर ईसाईयों में भी असंतोष और आक्रोश फ़ैल चुका है।
भारत में ऐसे "मिनी पाकिस्तान" और "शरीयत नियंत्रित इलाके" हर शहर, हर महानगर में बहुतायत में पाए जाते हैं, जहाँ पर पुलिस और प्रशासन का कोई जोर नहीं चलता। कल ही मुरादाबाद में, कांवड़ यात्रियों के गुजरने को लेकर भीषण दंगा हुआ है। "सेकुलर सरकारी भाषा" में कहा जाए तो एक "समुदाय" द्वारा, "क्षेत्र विशेष" से कांवड़ यात्रियों को "एक धार्मिक स्थल" के सामने से निकलने से मना करने पर विवाद की स्थिति बनी और दंगा शुरु हुआ। देखना है कि क्षेत्र के माननीय(?) सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन क्या कदम उठाते हैं, तथा "गुजरात-फ़ोबिया" से ग्रस्त मानसिक विकलांग मीडिया इसे कितना कवरेज देता है (कुछ माह पहले बरेली में हुए भीषण दंगों को तो मीडिया ने "बखूबी"(?) दफ़न कर दिया था)
हमारे "तथाकथित सेकुलर" मित्र, क्या इन दो प्रश्नों का जवाब देंगे कि -
1) जब तक मुस्लिम किसी आबादी के 30% से कम होते हैं तब तक वे उस देश-राज्य के कानून को मानते हैं, पालन करते हैं… परन्तु जैसे-जैसे इलाके की मुस्लिम आबादी 50% से ऊपर होने लगती है, उन्हें "शरीयत कानून का नियंत्रण", "दारुल-इस्लाम" इत्यादि क्यों याद आने लगते हैं?
2) जब-जब जिस-जिस इलाके, क्षेत्र, मोहल्ले-तहसील-जिले-संभाग-राज्य-देश में मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाते हैं, वहाँ पर अल्पसंख्यक (चाहे ईसाई हों या हिन्दू) असुरक्षित क्यों हो जाते हैं?
इन मामूली और आसान सवालों के जवाब "सेकुलरों" को पता तो हैं, लेकिन बोलने में ज़बान लड़खड़ाती है, लिखने में हाथ काँपते हैं, और सारा का सारा "सेकुलरिज़्म", न जाने कहाँ-कहाँ से बहने लगता है…

इंग्लैण्ड में पूर्वी लन्दन, ब्रेडफ़ोर्ड एवं बर्मिंघम शहरों के मुस्लिम बहुल इलाकों में कुछ दिनों पहले अचानक रात को पोस्टर जगह-जगह खम्भों पर लगे मिले… साथ में कुछ पर्चे भी मिले हैं जिसमें मुस्लिम बहुल इलाकों को "शरीयत कण्ट्रोल्ड झोन" बताते हुए वहाँ से गुज़रने वालों को चेताया गया है, कि यहाँ से गुज़रने अथवा इस इलाके में आने वाले लोग संगीत न बजाएं, जोर-जोर से गाना न गाएं, सिगरेट-शराब न पिएं, महिलाएं अपना सिर ढँककर निकलें… आदि-आदि। कुछ गोरी महिलाओं पर हल्के-फ़ुल्के हमले भी किए गये हैं… हालांकि पुलिस ने इन पोस्टरों को तुरन्त निकलवा दिया है, फ़िर भी आसपास के अंग्रेज रहवासियों ने सुरक्षा सम्बन्धी चितांए व्यक्त की हैं एवं ऐसे क्षेत्रों के आसपास स्थित चर्च के पादरियों ने सावधान रहने की चेतावनी जारी कर दी है…।
स्थानीय निवासियों ने दबी ज़बान में आरोप लगाए हैं कि पिछले दो दिनों से लन्दन में जारी दंगों में "नीग्रो एवं काले" उग्र युवकों की आड़ में नकाब पहनकर मुस्लिम युवक भी इन दंगों, आगज़नी और लूटपाट में सक्रिय हैं…। सच्चाई का खुलासा लन्दन पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किये गये 300 से दंगाईयों से पूछताछ के बाद ही हो सकेगा, परन्तु "शरीया जोन" के पोस्टर देखकर ईसाईयों में भी असंतोष और आक्रोश फ़ैल चुका है।
भारत में ऐसे "मिनी पाकिस्तान" और "शरीयत नियंत्रित इलाके" हर शहर, हर महानगर में बहुतायत में पाए जाते हैं, जहाँ पर पुलिस और प्रशासन का कोई जोर नहीं चलता। कल ही मुरादाबाद में, कांवड़ यात्रियों के गुजरने को लेकर भीषण दंगा हुआ है। "सेकुलर सरकारी भाषा" में कहा जाए तो एक "समुदाय" द्वारा, "क्षेत्र विशेष" से कांवड़ यात्रियों को "एक धार्मिक स्थल" के सामने से निकलने से मना करने पर विवाद की स्थिति बनी और दंगा शुरु हुआ। देखना है कि क्षेत्र के माननीय(?) सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन क्या कदम उठाते हैं, तथा "गुजरात-फ़ोबिया" से ग्रस्त मानसिक विकलांग मीडिया इसे कितना कवरेज देता है (कुछ माह पहले बरेली में हुए भीषण दंगों को तो मीडिया ने "बखूबी"(?) दफ़न कर दिया था)
हमारे "तथाकथित सेकुलर" मित्र, क्या इन दो प्रश्नों का जवाब देंगे कि -
1) जब तक मुस्लिम किसी आबादी के 30% से कम होते हैं तब तक वे उस देश-राज्य के कानून को मानते हैं, पालन करते हैं… परन्तु जैसे-जैसे इलाके की मुस्लिम आबादी 50% से ऊपर होने लगती है, उन्हें "शरीयत कानून का नियंत्रण", "दारुल-इस्लाम" इत्यादि क्यों याद आने लगते हैं?
2) जब-जब जिस-जिस इलाके, क्षेत्र, मोहल्ले-तहसील-जिले-संभाग-राज्य-देश में मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाते हैं, वहाँ पर अल्पसंख्यक (चाहे ईसाई हों या हिन्दू) असुरक्षित क्यों हो जाते हैं?
इन मामूली और आसान सवालों के जवाब "सेकुलरों" को पता तो हैं, लेकिन बोलने में ज़बान लड़खड़ाती है, लिखने में हाथ काँपते हैं, और सारा का सारा "सेकुलरिज़्म", न जाने कहाँ-कहाँ से बहने लगता है…

अल्लाह को मदद चाहिए ?
आर्य - अल्लाह को मदद चाहिए ?
मुस्लिम-नही।
आर्य - किसी भी प्रकार की नहीं?
मुस्लिम- हाँ किसी भी प्रकार की नहीँ?
आर्य - सोच लो।
मुस्लिम- हाँ सोच लिया।
आर्य - तो फिर ये क्या है" या अय्युहल्जीन आमनू इन् तन्सुरूल्लाह यन्सुर्कम् व युसब्बित अक्दामकुम्( सूरा मुहम्मद, आयत 7)
तर्जुमा- हे वे लोग जो ईमान लाये हो यदि तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वह तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारे कदमोँ को जमा देखा।
मुस्लिम- इसका अर्थ ये नहीँ होगा।
आर्य - अर्थ तो तुम्हारी प्रमाणिक कुरआन का दिया है।
मुस्लिम- और अर्थ नहीँ मैँ भावार्थ की बात कर रहा था।
आर्य - तो जरा भावार्थ बता दीजिए?
मुस्लिम- इसका भावार्थ कि अल्लाह की जो बाते हैँ उन पर अमल करो और अल्लाह के मार्ग पर चलो तो तुम्हारा भी भला होगा।
आर्य - तब्दीली कर नहीँ पायेँ मियाँ, और न खुदा को बचा पाये, आप आयत मेँ आये 'नसर'(मदद) लफ़्ज को हटा नहीँ पाये।
खुदा को मदद चाहिए भले ही उसकी मदद करने का तरीका दूसरा हो।
मुस्लिम - हाँ ये बात तो है।
आर्य - तो फिर आपने ये क्योँ कहाँ कि अल्लाह को किसी भी प्रकार की मदद की आवश्यकता नहीँ,
मैने तो पहले ही पूछ लिया था इस बात को।
मुस्लिम- ??????
मुस्लिम-नही।
आर्य - किसी भी प्रकार की नहीं?
मुस्लिम- हाँ किसी भी प्रकार की नहीँ?
आर्य - सोच लो।
मुस्लिम- हाँ सोच लिया।
आर्य - तो फिर ये क्या है" या अय्युहल्जीन आमनू इन् तन्सुरूल्लाह यन्सुर्कम् व युसब्बित अक्दामकुम्( सूरा मुहम्मद, आयत 7)
तर्जुमा- हे वे लोग जो ईमान लाये हो यदि तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वह तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारे कदमोँ को जमा देखा।
मुस्लिम- इसका अर्थ ये नहीँ होगा।
आर्य - अर्थ तो तुम्हारी प्रमाणिक कुरआन का दिया है।
मुस्लिम- और अर्थ नहीँ मैँ भावार्थ की बात कर रहा था।
आर्य - तो जरा भावार्थ बता दीजिए?
मुस्लिम- इसका भावार्थ कि अल्लाह की जो बाते हैँ उन पर अमल करो और अल्लाह के मार्ग पर चलो तो तुम्हारा भी भला होगा।
आर्य - तब्दीली कर नहीँ पायेँ मियाँ, और न खुदा को बचा पाये, आप आयत मेँ आये 'नसर'(मदद) लफ़्ज को हटा नहीँ पाये।
खुदा को मदद चाहिए भले ही उसकी मदद करने का तरीका दूसरा हो।
मुस्लिम - हाँ ये बात तो है।
आर्य - तो फिर आपने ये क्योँ कहाँ कि अल्लाह को किसी भी प्रकार की मदद की आवश्यकता नहीँ,
मैने तो पहले ही पूछ लिया था इस बात को।
मुस्लिम- ??????
नॉन मुस्लिम के मरने के बाद उसको RIP
लो जी सेक्युलरिस्टों और खुजलिकर्ताओ के लिए खुशखबरी इस्लाम के हिसाब से किसी काफिर यानि जिसने मोहम्मद को अल्लाह का दूत और अल्लाह को ही भगवन नहीं माना है तो उसकी आत्मा को कभी शांति नहीं मिल सकती इसलिए किए नॉन मुस्लिम के मरने के बाद उसको RIP(rest in peace) मतलब उसकी आत्मा को भगवन शांति दे भी नहीं कह सकते क्योंकि ये इस्लाम के खिलाफ है और ऐसा कहने वाले को जहन्नम ही मिलेगी।


Tuesday, December 10, 2013
सिर्फ हिंदुओं के कृपा कलापों पर ही लागू होगा जादू टोना विधेयक
सिर्फ हिंदुओं के कृपा कलापों पर ही लागू होगा जादू टोना विधेयक


Sunday, December 8, 2013
Friday, December 6, 2013
इस्लामिक मुल्क के अमन पसंद नागरिकों का आपस में लड़ कर मरने का आंकड़ा
चलो अब जरा आपको सुन्नी समुदाय द्वारा दुनिया भर में 2012 का आंकड़ा बता दूँ, कि इस समुदाय ने कहाँ- कहाँ पर शांति और भाईचारे का सन्देश दिया..
बीते वर्ष में अमन पसंद इस्लामिक मुल्क के अमन पसंद नागरिकों का आपस में लड़ कर मरने का आंकड़ा :-
पाकिस्तान :- 19711.
अफगानिस्तान :- 36799.
सीरिया :- 2 लाख से अधिक.
मिस्त्र :- 4566.
लीबिया :- 19000 से अधिक.
ईरान :- 1987.
ईराक :- 4567.
इंडोनेशिया :- 1734 (2069 गैर मुस्लिम भी)
उज्ज्बेकिस्तान :- 1103.
फलिस्तीन :- 13000 से अधिक.
मलेशिया :- 2200 से अधिक.
1000 से कम मौत वाले मुल्कों का नाम बदनामी के डर से गोपनीय रखा गया है, आप समझ सकते हैं क्यों ?
और सबसे खास बात कि इन देशों में हिन्दू, RSS या बीजेपी का नाम तक मौजूद नहीं है, जिसको ये लोग भारत में अपने 'सत्कर्मों' को छुपाने के लिए हमेशा सारा दोष इन पर डाल देते हैं..
पर कोई बात नहीं सुन्नी मुस्लिम अभी भी बेशर्मी से कहेंगे कि हिन्दू, RSS या बीजेपी इन देशों में नहीं है तो क्या हुआ अमेरिका, इजरायल तो है ना, तो बस सारी बात यहीं खत्म हो गयी कि ये लोग(सुन्नी) तो बेहद ही सीधे और भोलेभाले हैं, इनको तो इन सभी देशों में अमेरिका, इजरायल एक चाल के तहत साफ़ कर रहा है..
नोट :- ये आंकड़े केवल बीते साल 2012 दिसम्बर तक के हैं, इस साल के आंकड़ों को इसमें शामिल नहीं किया गया है, पर यदि अभी तक अगस्त तक का मोटा- मोटा हिसाब लगाएँ तो सीरिया, लीबिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इजिप्ट आदि इस्लामिक देशों में मरने वालों की संख्या कई लाख तक पहुँचती है..
बीते वर्ष में अमन पसंद इस्लामिक मुल्क के अमन पसंद नागरिकों का आपस में लड़ कर मरने का आंकड़ा :-
पाकिस्तान :- 19711.
अफगानिस्तान :- 36799.
सीरिया :- 2 लाख से अधिक.
मिस्त्र :- 4566.
लीबिया :- 19000 से अधिक.
ईरान :- 1987.
ईराक :- 4567.
इंडोनेशिया :- 1734 (2069 गैर मुस्लिम भी)
उज्ज्बेकिस्तान :- 1103.
फलिस्तीन :- 13000 से अधिक.
मलेशिया :- 2200 से अधिक.
1000 से कम मौत वाले मुल्कों का नाम बदनामी के डर से गोपनीय रखा गया है, आप समझ सकते हैं क्यों ?
और सबसे खास बात कि इन देशों में हिन्दू, RSS या बीजेपी का नाम तक मौजूद नहीं है, जिसको ये लोग भारत में अपने 'सत्कर्मों' को छुपाने के लिए हमेशा सारा दोष इन पर डाल देते हैं..
पर कोई बात नहीं सुन्नी मुस्लिम अभी भी बेशर्मी से कहेंगे कि हिन्दू, RSS या बीजेपी इन देशों में नहीं है तो क्या हुआ अमेरिका, इजरायल तो है ना, तो बस सारी बात यहीं खत्म हो गयी कि ये लोग(सुन्नी) तो बेहद ही सीधे और भोलेभाले हैं, इनको तो इन सभी देशों में अमेरिका, इजरायल एक चाल के तहत साफ़ कर रहा है..
नोट :- ये आंकड़े केवल बीते साल 2012 दिसम्बर तक के हैं, इस साल के आंकड़ों को इसमें शामिल नहीं किया गया है, पर यदि अभी तक अगस्त तक का मोटा- मोटा हिसाब लगाएँ तो सीरिया, लीबिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इजिप्ट आदि इस्लामिक देशों में मरने वालों की संख्या कई लाख तक पहुँचती है..
सेक्युलर भारत में सेक्युलर शरणार्थी

सेक्युलर भारत में सेक्युलर शरणार्थी
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भारत से आतंकवाद समाप्त करने का मात्र एक ही उपाय है और वो है सऊदी अरब के पैसे से बनी सुन्नी वहाबी मस्जिदों और मदरसों का "तत्काल ध्वस्तिकरण" क्योकि इनके मदरसे आतंकवाद की पाठशाला हैं और जगह जगह नालों के किनारे बनी इनकी मस्जिदें आतंकवादियों की पनाहगाह हैं जिनको सऊदी अरब से पैसा मिल रहा है, मुज़फ्फरनगर में इन्ही मस्जिदों से निहथ्थे बेगुनाह हिन्दुओ पर AK-47 से गोलियां चलायी गयीं और ग्रेनेड फेके गए, याद रहे पकिस्तान जिंदाबाद के नारे भी इन्ही सुन्नी वहाबी मस्जिदों से सुनाई देते हैं.
कहीं ऐसा न हो कि सेकुलरिज्म के नाम पर हम भारत को भी सीरिया बना दें, सीरिया एक सेक्युलर देश है जिसने सेकुलरिज्म के नाम पर इन सुन्नी वहाबी आतंकवादियों को पूरी छूट दी जिसका भरपूर लाभ उठाते हुए वहाँ के सुन्नी वहाबी आतंकवादियों ने अपनी मस्जिदों और मदरसों में सऊदी अरब के पैसे से हथियार जमा किये और आज सीरिया की " सेक्युलर सरकार " का जो हाल है वो हमारे सामने है, आज सीरिया के सेक्युलर नागरिक शरणार्थी बन चुके हैं और वहाँ के सुन्नी वहाबी नागरिक विदेशी आतंकवादियों संग मिलकर सीरिया की "सेक्युलर सरकार" से जिहाद कर रहे हैं.
कहीं ऐसा न हो कि आने वाले समय में सेक्युलर हिन्दू और शिया भी अपने सेक्युलर भारत में सेक्युलर शरणार्थी बन के रह जाए.
बाकी आप ख़ुद समझदार हैं.
जयहिंद.
Japnees PM says
इन्हें पहले ही अलग देश दे दिया गया है जिन्हें इस देश सें दिक्कत हो वो इस देश को छोड़ कर जा सकते है ।


Monday, December 2, 2013
एक मोलवी द्वारा इस्लाम कबूल करने के फायदों का वर्णन
एक मोलवी द्वारा इस्लाम कबूल करने के फायदों का वर्णन
1 >>>>> हम मुल्ले देश का सबसे जादा पानी बचाते है क्युकी कई कई महीनो में नहाते है
2>>>>> हमारी एकता बनी रहती है और हिन्दू भी हमे एक नाम से ही बुलाते है "सूअर" इसका मतलब है की सभी मुसलमानों एक ही जेसे है जिससे एकता बनी रहती है
3>>>>>हमे हिन्दुओ की तरह गाव गाव में घूमना नहीं पड़ता चूत के लिए ..जरूरत पड़ने पर हम अपनी माँ और बहन को भी चोद देते है
4>>>>>और अक्षय कुमार ने भी हमारा नारा चुराया है की "घर में पड़ा है सोना फिर कहे को रोना " इसका असली वाला ये है "जब घर में पड़ी है चूत तो उसे चोदेंगे हम अपनी माँ बहनो को भी नहीं छोड़ेंगे " इसका मतलब है हम बहुँत फमुस है अक्षय कुमार जेसे बड़े लोग भी हमारा नारा चुराते है
5>>>>>हम अपने किसी भी रिश्तेदार की माँ बहन का रैप कर सकते है पकडे जाने पर मोहमद शाहब का नाम लेकर बच सकते है क्युकी मोहमद सहाब भी अपनी बेटी को खुद चोदता था और इस्लाम में इसकी इजाजत है
6>>>>>हम में मर्द नाम की कोई चीज़ नही होती इसलिए हम आधा लंड तो बचपन में काट डालते है इससे हिन्दू हमे ये नही बोल सकते मर्द है तो सामने आ ,ये कर वो कर
7>>>>>हम एक घंटे में 10-11 चूत मार सकते है जो और कोई नही मार सकता क्युकी हम आधा लंड के होते है है जो 2-4 मिनट ही चलता है और हिन्दुओ का लोडा नही लोहे का हतोड़ा रहता है वो तो एक घंटे तक चूत लगातार मार सकते है ..इसलिए हम कम समय में जादा बार चूत मार सकते है और झूटी हवाबाजी कर सकते है
8>>>>>और सबसे बड़ी बात अपनी माँ चोदो ,बहन चोदो,रिश्तेदारीमें सब लडकियों को चोद दो और नाम लगा दो मोहमद सहाब का और खुद बच जाओ \
नोट >>>>
कोई भी धर्म इतनी चूत मरने की छुट नही देता सो इस्लाम सबसे बेस्ट रिलिजन है इसे अपनाओ और सूअर बन जाओ
और हिन्दुओ से अपनी बहन और माँ को बचा के रकना क्युकी अगर हमारी माँ बहेन हिन्दुओ से चुद गयी तो फिर उनको हमारी लुल्ली से कुछ नही होगा क्युकी क्या करेगी वो लुल्ली का जब मिलेगा लुल्ला और हिन्दू मरे चूत खुल्लम खुल्ला ...तो इस बात का विशेष ध्यान
और इन बातो को सबको बताओ और इस्लाम के प्रचार में जुट जाओ
1 >>>>> हम मुल्ले देश का सबसे जादा पानी बचाते है क्युकी कई कई महीनो में नहाते है
2>>>>> हमारी एकता बनी रहती है और हिन्दू भी हमे एक नाम से ही बुलाते है "सूअर" इसका मतलब है की सभी मुसलमानों एक ही जेसे है जिससे एकता बनी रहती है
3>>>>>हमे हिन्दुओ की तरह गाव गाव में घूमना नहीं पड़ता चूत के लिए ..जरूरत पड़ने पर हम अपनी माँ और बहन को भी चोद देते है
4>>>>>और अक्षय कुमार ने भी हमारा नारा चुराया है की "घर में पड़ा है सोना फिर कहे को रोना " इसका असली वाला ये है "जब घर में पड़ी है चूत तो उसे चोदेंगे हम अपनी माँ बहनो को भी नहीं छोड़ेंगे " इसका मतलब है हम बहुँत फमुस है अक्षय कुमार जेसे बड़े लोग भी हमारा नारा चुराते है
5>>>>>हम अपने किसी भी रिश्तेदार की माँ बहन का रैप कर सकते है पकडे जाने पर मोहमद शाहब का नाम लेकर बच सकते है क्युकी मोहमद सहाब भी अपनी बेटी को खुद चोदता था और इस्लाम में इसकी इजाजत है
6>>>>>हम में मर्द नाम की कोई चीज़ नही होती इसलिए हम आधा लंड तो बचपन में काट डालते है इससे हिन्दू हमे ये नही बोल सकते मर्द है तो सामने आ ,ये कर वो कर
7>>>>>हम एक घंटे में 10-11 चूत मार सकते है जो और कोई नही मार सकता क्युकी हम आधा लंड के होते है है जो 2-4 मिनट ही चलता है और हिन्दुओ का लोडा नही लोहे का हतोड़ा रहता है वो तो एक घंटे तक चूत लगातार मार सकते है ..इसलिए हम कम समय में जादा बार चूत मार सकते है और झूटी हवाबाजी कर सकते है
8>>>>>और सबसे बड़ी बात अपनी माँ चोदो ,बहन चोदो,रिश्तेदारीमें सब लडकियों को चोद दो और नाम लगा दो मोहमद सहाब का और खुद बच जाओ \
नोट >>>>
कोई भी धर्म इतनी चूत मरने की छुट नही देता सो इस्लाम सबसे बेस्ट रिलिजन है इसे अपनाओ और सूअर बन जाओ
और हिन्दुओ से अपनी बहन और माँ को बचा के रकना क्युकी अगर हमारी माँ बहेन हिन्दुओ से चुद गयी तो फिर उनको हमारी लुल्ली से कुछ नही होगा क्युकी क्या करेगी वो लुल्ली का जब मिलेगा लुल्ला और हिन्दू मरे चूत खुल्लम खुल्ला ...तो इस बात का विशेष ध्यान
और इन बातो को सबको बताओ और इस्लाम के प्रचार में जुट जाओ
Monday, November 11, 2013
इस्लाम में भेदभाव
अब तक तो सुना करता था इस्लाम में भेदभाव नही होता है ... यूपी के बरेलवी जमात के मस्जिदों में ये नोटिस दिखना अब आम बात हो गयी है ,, गौरतलब है की इस बरेलवी जमात के धर्मगुरु मौलाना तौकीर रजा है जिनके कदमो में अरविन्द केजरीवाल कदमबोशी करते है


Thursday, November 7, 2013
सीरिया में शियाओं का माँस खाते मुस्लिम ब्रदरहुड के कार्यकर्ता
लो देखो इन नरपिशाचों को । सीरिया में शियाओं का माँस खाते मुस्लिम ब्रदरहुड के कार्यकर्ता :-

Sunday, November 3, 2013
सूफी सन्तोँ को महिमामण्डित
मित्रो,गत कुछ दशकोँ से छद्म सेकुलरवादियोँ द्वारा सूफी सन्तोँ को महिमामण्डित करने का जोरदार अभियान देश मेँ चल रहा है। इन कथित सूफी सन्तोँ के वार्षिक उर्सो पर राष्ट्रपति से प्रधानमत्रीँ तक भाग ले रहे है। इनकी दरगाहोँ के विस्तार एवं सौदर्यीकरण पर देश के शासकोँ ने अरबोँ रूपये खर्च किये। इन्हेँ धार्मिक भेदभाओँ से ऊपर उठकर सच्चा मानववादी बताया जाता है।खास बात यह है कि इनके मजारोँ पर हाजिरी देने वाले 80% लोग हिन्दू होते हैँ। मीडिया भी उन्हेँ राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप मेँ प्रस्तुत करता है।
परन्तु मित्रोँ, ऐतिहासिक तथ्योँ के अनुसार देश के अधिकांश तथाकथित सूफी सन्त इस्लाम के जोशीले प्रचारक थे।
हिन्दुओँ के धर्मान्तरण एवं उनके उपासना स्थलोँ को नष्ट करनेँ मेँ उन्होनेँ जोर शोर से भाग लिया था।
अजमेर के बहुचर्चित 'सूफी' ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को भला कौन नहीँ जानता! 'सिरत अल् कुतुब' के अनुसार उसने सात लाख हिन्दुओँ को मुसलमान बनाया था। 'मजलिस सूफिया' नामक ग्रन्थ के अनुसार जब वह मक्का मेँ हज करने के लिए गया था,तो उसे यह निर्देश दिया गया था कि वह हिन्दुस्तान जाये और वहाँ पर कुफ्र के अन्धकार को
दूर करके इस्लाम का प्रचार करे।
'मराकत इसरार' नामक एक ग्रन्थ के अनुसार उसने तीसरी शादी एक हिन्दू लड़की का जबरन् धर्मान्तरण करके की थी। यह बेबस महिता एक राजा की पुत्री थी,जो कि युद्ध मेँ चिश्ती मियाँ के हाथ लगी थी। उसने इसका नाम उम्मत अल्लाह रखा, जिससे एक पुत्री बीबी हाफिज जमाल पैदा हुई. जिसका मजार इसकी दरगाह मेँ मौजूद है।
'तारीख-ए-औलिया' के अनुसार ख्वाजा ने अजमेर के तत्कालीन शासक पृथ्वीराज को उनके गुरू अजीतपाल जोगी के माध्यम से मुसलमान बनने की दावत दी थी, जिसे उन्होनेँ ठुकरा दिया था।
इस पर ख्वाजा ने तैश मेँ आकर मुस्लिम शासक मुहम्मद गोरी को भारत पर हमला करने के लिए उकसाया था।
हमारे प्रश्न- मित्रो, मैँ पूछना चाहता हूँ कि यदि चिश्ती वास्तव मेँ सन्त था और सभी धर्मो को एक समान मानता था, तो उसे सात लाख हिन्दुओँ को मुसलमान बनाने की क्या जरूरत थी?
क्या यह मानवता है कि युद्ध मेँ पराजित एक किशोरी का बलात् धर्मान्तरण कर निकाह किया जाये?
यदि वह सर्व धर्म की एकता मेँ विश्वास रखता था, तो फिर उसने मोहम्मद गोरी को भारत पर हमला करने और हिन्दू मन्दिरोँ को ध्वस्त करने लिए क्योँ प्रेरित किया था?
मित्रोँ, ये प्रश्न ऐसे हैँ,जिन पर उन लोगोँ को गम्भीरता से विचार करना चाहिए जो कि ख्वाजा को एक सेकुलर 'सन्त' के रूप मेँ महिमामण्डित करने का जोरदार अभियान चला रहेँ हैँ। और विशेषत: हमारे हिन्दू भाई जरूर सत्य को पहचाने।
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Sunday, October 27, 2013
इस्लाम में जातिवाद
2 मिनट समय देकर आखिर तक पढे। नफरत फैलाना पोस्ट का मकसद नहीं है, लेकिन ज्ञान के अभाव मे हमारे हिन्दू बच्चे जिनको हमारी संस्कृति का ज्ञान नहीं है , वो हीन भावना महसूस करते है, उनके लिए इस्लाम में जातिवाद” के कुछ कड़वे तथ्य आपके सामने ....
१. जबसे इस्लाम मज़हब बना है तभी से “शिया और सुन्नी” मुस्लिम एक दूसरे की जान के दुश्मन हैं, यह लोग आपस में लड़ते-मरते रहते हैं ...!!
२. अहमदिया, सलफमानी, शेख, क़ाज़ी, मुहम्मदिया, पठान आदि मुस्लिमों की जातियां हैं, और हंसी की बात, यह एक ही अल्लाह को मानने वाले, एक ही मस्जिद में नमाज़ नहीं पढते !!! सभी जातियों के लिए अलग अलग मस्जिदें होती हैं .!!
३. सउदी अरब, अरब अमीरात, ओमान, कतर आदि अन्य अरब राष्ट्रों के मुस्लिम पाकिस्तान, भारत और बंगलादेशी मुस्लिमों को फर्जी मुसलमान
मानते हें और इनसे छुआछूत मानते हैं । सउदी अरब मे ऑफिसो मे भारत और पाक के मुसलमानों के लिए अलग पानी रखा रखता है |
४. शेख अपने आपको सबसे उपर मानते हैं और वे किसी अन्य जाति में निकाह नहीं करते.
५. इंडोनेशिया में १०० वर्षों पूर्व अनेकों बौद्ध और हिंदू परिवर्तित होकर मुस्लिम बने थे, इसी कारण से सभी इस्लामिक राष्ट्र, इंडोनेशिया से घृणा की भावना रखते हैं..
६. क़ाज़ी मुस्लिम, ''भारतीय मुस्लिमों'' को मुस्लिम ही नहीं मानते... क्यूंकि उन का मानना है के यह सब भी हिंदूधर्म से परिवर्तित हैं !!!
७. अफ्रीका महाद्वीप के सभी इस्लामिक राष्ट्र जैसे मोरोक्को, मिस्र, अल्जीरिया, निजेर,लीबिया आदि राष्ट्रों के मुस्लिमों को तुर्की के मुस्लिम सबसे निम्न मानतेहैं ।
८. सोमालिया जैसे गरीब इस्लामिक राष्ट्रों में अपने बुजुर्गों को ''जीवित'' समुद्र में बहाने की प्रथा चल रही है!!!
९. भारत के ही बोहरा मुस्लिम किसी भी मस्जिद में नहीं जाते, वो मात्र मज़ारों पे जाते हैं... उनका विश्वास सूफियों पे है... अल्लाह पे नहीं !!
१०. मुसलमान दो मुखय सामाजिक विभाग मानते हैं-
१. अशरफ अथवा शरु और २. अज़लफ।
अशरफ से तात्पर्य है 'कुलीन' और शेष अन्य मुसलमान जिनमें व्यावसायिक वर्ग और निचली जातियों के मुसलमान शामिल हैं, उन्हें अज़लफ अर्थात् नीच
अथवा निकृष्टव्यक्ति माना जाता है। उन्हें कमीना अथवा इतर कमीन या रासिल, जो रिजाल का भ्रष्ट रूप है, 'बेकार' कहा जाता है।
कुछ स्थानों पर
एक तीसरा वर्ग 'अरज़ल' भी है, जिसमें आने वाले व्यक्ति सबसे नीच समझे जाते हैं। उनके साथ कोई भी अन्य मुसलमान मिलेगा- जुलेगा नहीं और
न उन्हें मस्जिद और सार्वजनिक कब्रिस्तानों में प्रवेश करने दिया जाता है।
१. 'अशरफ' अथवा उच्च वर्ग के मुसलमान (प) सैयद, (पप) शेख, (पपप) पठान, (पअ) मुगल, (अ)मलिक और (अप) मिर्ज़ा।
२. 'अज़लफ' अथवा निम्न वर्ग के मुसलमान......
(A) खेती करने वाले शेख और अन्य वे लोग जोमूलतः हिन्दू थे,
किन्तु किसी बुद्धिजीवी वर्ग से सम्बन्धित नहीं हैं और जिन्हें अशरफ समुदाय, अर्थात् पिराली और ठकराई आदि में प्रवेश नहीं मिला है।
(B) दर्जी, जुलाहा, फकीर और रंगरेज।
(C) बाढ़ी, भटियारा, चिक, चूड़ीहार, दाई,धावा, धुनिया, गड्डी, कलाल, कसाई, कुला, कुंजरा,लहेरी, माहीफरोश, मल्लाह, नालिया, निकारी।
(D) अब्दाल, बाको, बेडिया, भाट, चंबा, डफाली, धोबी, हज्जाम, मुचो, नगारची, नट, पनवाड़िया, मदारिया, तुन्तिया।
३. 'अरजल' अथवा निकृष्ट वर्ग भानार, हलालखोदर,हिजड़ा, कसंबी, लालबेगी,
मोगता, मेहतर।
अल्लाह एक, एक कुरान, एक .... नबी !
और महान एकता..... बतलाते हैं स्वंय में ?
जबकि, मुसलमानों के बीच, शिया और सुन्नी सभी मुस्लिम देशों में एक दूसरे को मार रहे हैं .
और, अधिकांश मुस्लिम देशों में.... इन दो संप्रदायों के बीच हमेशा धार्मिक दंगा होता रहता है..!
इतना ही नहीं... शिया को.., सुन्नी मस्जिद में जाना मना है .
इन दोनों को.. अहमदिया मस्जिद में नहीं जाना है.
और, ये तीनों...... सूफी मस्जिद में कभी नहीं जाएँगे.
फिर, इन चारों का मुजाहिद्दीन मस्जिद में प्रवेश वर्जित है..!
किसी बोहरा मस्जिद मे कोई दूसरा मुस्लिम नहीं जा सकता .
कोई बोहरा का किसी दूसरे के मस्जिद मे जाना वर्जित है ..
आगा खानी या चेलिया मुस्लिम का अपना अलग मस्जिद होता है .
सबसे ज्यादा मुस्लिम किसी दूसरे देश मे नही बल्कि मुस्लिम देशो मे ही मारे गए है ..
आज भी सीरिया मे करीब हर रोज एक हज़ार मुस्लिम हर रोज मारे जा रहे है .
अपने आपको इस्लाम जगत का हीरों बताने वाला सद्दाम हुसैन ने करीब एक लाख कुर्द मुसलमानों को रासायनिक बम से मार डाला था ...
पाकिस्तान मे हर महीने शिया और सुन्नी के बीच दंगे भड़कते है ।
और इसी प्रकार से मुस्लिमों में भी 13 तरह के मुस्लिम हैं, जो एक दुसरे के खून के प्यासे रहते हैं और आपस में बमबारी और मार-काट वगैरह... मचाते रहते हैं.
*****अब आइये ... जरा हम अपने हिन्दू/ सनातन धर्म को भी देखते हैं.
हमारी 1280 धार्मिक पुस्तकें हैं, जिसकी 10,000 से भी ज्यादा टिप्पणियां और १,00.000 से भी अधिक उप- टिप्पणियों मौजूद हैं..!
एक भगवान के अनगिनत प्रस्तुतियों की विविधता, अनेकों आचार्य तथा हजारों ऋषि-मुनि हैं जिन्होंने अनेक भाषाओँ में उपदेश दिया है..
फिर भी
हम सभी मंदिरों मेंजाते हैं, इतना ही नहीं.. हम इतने शांतिपूर्ण और सहिष्णु लोग हैं कि सब लोग एक साथ मिलकर सभी मंदिरों और सभी भगवानो की पूजा करते हैं .
और तो और.... पिछले दस हजार साल में धर्म के नाम पर हिंदुओं में आपस में धर्म के नाम पर "कभी झगड़ा नहीं" हुआ .
इसलिए इन लोगों की नौटंकी और बहकावे पर मत जाओ...
और.... "गर्व से कहो हम हिन्दू हैं"..
१. जबसे इस्लाम मज़हब बना है तभी से “शिया और सुन्नी” मुस्लिम एक दूसरे की जान के दुश्मन हैं, यह लोग आपस में लड़ते-मरते रहते हैं ...!!
२. अहमदिया, सलफमानी, शेख, क़ाज़ी, मुहम्मदिया, पठान आदि मुस्लिमों की जातियां हैं, और हंसी की बात, यह एक ही अल्लाह को मानने वाले, एक ही मस्जिद में नमाज़ नहीं पढते !!! सभी जातियों के लिए अलग अलग मस्जिदें होती हैं .!!
३. सउदी अरब, अरब अमीरात, ओमान, कतर आदि अन्य अरब राष्ट्रों के मुस्लिम पाकिस्तान, भारत और बंगलादेशी मुस्लिमों को फर्जी मुसलमान
मानते हें और इनसे छुआछूत मानते हैं । सउदी अरब मे ऑफिसो मे भारत और पाक के मुसलमानों के लिए अलग पानी रखा रखता है |
४. शेख अपने आपको सबसे उपर मानते हैं और वे किसी अन्य जाति में निकाह नहीं करते.
५. इंडोनेशिया में १०० वर्षों पूर्व अनेकों बौद्ध और हिंदू परिवर्तित होकर मुस्लिम बने थे, इसी कारण से सभी इस्लामिक राष्ट्र, इंडोनेशिया से घृणा की भावना रखते हैं..
६. क़ाज़ी मुस्लिम, ''भारतीय मुस्लिमों'' को मुस्लिम ही नहीं मानते... क्यूंकि उन का मानना है के यह सब भी हिंदूधर्म से परिवर्तित हैं !!!
७. अफ्रीका महाद्वीप के सभी इस्लामिक राष्ट्र जैसे मोरोक्को, मिस्र, अल्जीरिया, निजेर,लीबिया आदि राष्ट्रों के मुस्लिमों को तुर्की के मुस्लिम सबसे निम्न मानतेहैं ।
८. सोमालिया जैसे गरीब इस्लामिक राष्ट्रों में अपने बुजुर्गों को ''जीवित'' समुद्र में बहाने की प्रथा चल रही है!!!
९. भारत के ही बोहरा मुस्लिम किसी भी मस्जिद में नहीं जाते, वो मात्र मज़ारों पे जाते हैं... उनका विश्वास सूफियों पे है... अल्लाह पे नहीं !!
१०. मुसलमान दो मुखय सामाजिक विभाग मानते हैं-
१. अशरफ अथवा शरु और २. अज़लफ।
अशरफ से तात्पर्य है 'कुलीन' और शेष अन्य मुसलमान जिनमें व्यावसायिक वर्ग और निचली जातियों के मुसलमान शामिल हैं, उन्हें अज़लफ अर्थात् नीच
अथवा निकृष्टव्यक्ति माना जाता है। उन्हें कमीना अथवा इतर कमीन या रासिल, जो रिजाल का भ्रष्ट रूप है, 'बेकार' कहा जाता है।
कुछ स्थानों पर
एक तीसरा वर्ग 'अरज़ल' भी है, जिसमें आने वाले व्यक्ति सबसे नीच समझे जाते हैं। उनके साथ कोई भी अन्य मुसलमान मिलेगा- जुलेगा नहीं और
न उन्हें मस्जिद और सार्वजनिक कब्रिस्तानों में प्रवेश करने दिया जाता है।
१. 'अशरफ' अथवा उच्च वर्ग के मुसलमान (प) सैयद, (पप) शेख, (पपप) पठान, (पअ) मुगल, (अ)मलिक और (अप) मिर्ज़ा।
२. 'अज़लफ' अथवा निम्न वर्ग के मुसलमान......
(A) खेती करने वाले शेख और अन्य वे लोग जोमूलतः हिन्दू थे,
किन्तु किसी बुद्धिजीवी वर्ग से सम्बन्धित नहीं हैं और जिन्हें अशरफ समुदाय, अर्थात् पिराली और ठकराई आदि में प्रवेश नहीं मिला है।
(B) दर्जी, जुलाहा, फकीर और रंगरेज।
(C) बाढ़ी, भटियारा, चिक, चूड़ीहार, दाई,धावा, धुनिया, गड्डी, कलाल, कसाई, कुला, कुंजरा,लहेरी, माहीफरोश, मल्लाह, नालिया, निकारी।
(D) अब्दाल, बाको, बेडिया, भाट, चंबा, डफाली, धोबी, हज्जाम, मुचो, नगारची, नट, पनवाड़िया, मदारिया, तुन्तिया।
३. 'अरजल' अथवा निकृष्ट वर्ग भानार, हलालखोदर,हिजड़ा, कसंबी, लालबेगी,
मोगता, मेहतर।
अल्लाह एक, एक कुरान, एक .... नबी !
और महान एकता..... बतलाते हैं स्वंय में ?
जबकि, मुसलमानों के बीच, शिया और सुन्नी सभी मुस्लिम देशों में एक दूसरे को मार रहे हैं .
और, अधिकांश मुस्लिम देशों में.... इन दो संप्रदायों के बीच हमेशा धार्मिक दंगा होता रहता है..!
इतना ही नहीं... शिया को.., सुन्नी मस्जिद में जाना मना है .
इन दोनों को.. अहमदिया मस्जिद में नहीं जाना है.
और, ये तीनों...... सूफी मस्जिद में कभी नहीं जाएँगे.
फिर, इन चारों का मुजाहिद्दीन मस्जिद में प्रवेश वर्जित है..!
किसी बोहरा मस्जिद मे कोई दूसरा मुस्लिम नहीं जा सकता .
कोई बोहरा का किसी दूसरे के मस्जिद मे जाना वर्जित है ..
आगा खानी या चेलिया मुस्लिम का अपना अलग मस्जिद होता है .
सबसे ज्यादा मुस्लिम किसी दूसरे देश मे नही बल्कि मुस्लिम देशो मे ही मारे गए है ..
आज भी सीरिया मे करीब हर रोज एक हज़ार मुस्लिम हर रोज मारे जा रहे है .
अपने आपको इस्लाम जगत का हीरों बताने वाला सद्दाम हुसैन ने करीब एक लाख कुर्द मुसलमानों को रासायनिक बम से मार डाला था ...
पाकिस्तान मे हर महीने शिया और सुन्नी के बीच दंगे भड़कते है ।
और इसी प्रकार से मुस्लिमों में भी 13 तरह के मुस्लिम हैं, जो एक दुसरे के खून के प्यासे रहते हैं और आपस में बमबारी और मार-काट वगैरह... मचाते रहते हैं.
*****अब आइये ... जरा हम अपने हिन्दू/ सनातन धर्म को भी देखते हैं.
हमारी 1280 धार्मिक पुस्तकें हैं, जिसकी 10,000 से भी ज्यादा टिप्पणियां और १,00.000 से भी अधिक उप- टिप्पणियों मौजूद हैं..!
एक भगवान के अनगिनत प्रस्तुतियों की विविधता, अनेकों आचार्य तथा हजारों ऋषि-मुनि हैं जिन्होंने अनेक भाषाओँ में उपदेश दिया है..
फिर भी
हम सभी मंदिरों मेंजाते हैं, इतना ही नहीं.. हम इतने शांतिपूर्ण और सहिष्णु लोग हैं कि सब लोग एक साथ मिलकर सभी मंदिरों और सभी भगवानो की पूजा करते हैं .
और तो और.... पिछले दस हजार साल में धर्म के नाम पर हिंदुओं में आपस में धर्म के नाम पर "कभी झगड़ा नहीं" हुआ .
इसलिए इन लोगों की नौटंकी और बहकावे पर मत जाओ...
और.... "गर्व से कहो हम हिन्दू हैं"..
सीरिया के दो तस्वीरे -

सीरिया के दो तस्वीरे -
पहले चित्र में इस छोटी सी बच्ची को सुन्नी विद्रोही लड़ाकों ने चैन से बांधकर इसके सामने इसके माँ बाप को काट डाला क्योंकि यह एक शिया परिवार से सम्बन्ध रखती थी!
और
दूसरी तस्वीर कुछ ही दिन पहले सीरिया से जारी हुई है जिसमे सुन्नी विद्रोहियों ने इस छोटी सी बच्ची का दिल निकाला और उसे खा लिया ..!!!Their children now, your children tomorrow

कुरबानी या हत्या की ट्रेनिंग !
कुरबानी या हत्या की ट्रेनिंग !

मुसलमान कई त्यौहार मानते हैं . जिनमें "ईदुज्जुहा "प्रसिद्ध और प्रिय त्योहर माना जाता है . भारत में इसे "बकरीद " भी कहते हैं .अरबी में ईदुज्जुहा का अर्थ बलिदान ( Sacrifice ) नहीं बल्कि " पशुवध का आनंद "( Joy of slaughter ) हैं.क्योंकि इसमें लाखों जानवरों का क़त्ल होता है .मुसलमानों का दावा है कि यह त्यौहार नबी इब्राहीम की अल्लाह के प्रति निष्ठा, भक्ति और उनके लडके इस्माइल की कुर्बानी को याद करने के लिए मनाया जाता है .और मुहम्मद साहब उसी इस्माइल के वंशज थे .चूँकि इब्राहीम की कथा इस्लाम से पहले की है और इब्राहीम के बारे में जो सही जानकारी बाइबिल , कुरान और हदीसों से मिलती वह इस प्रकार है .
1-इब्राहीम का परिचय
इब्राहीम إبراهيم का काल लगभग 2000 साल ई ० पू से 1500 ई० पूर्व माना जाता है . इसके पिता का नाम मुसलमान "आजर آذر" और यहूदी "तेराह Terah"( תָּרַח )बताते है .इब्राहीम " ऊर " शहर में पैदा हुआ था . जो हारान प्रान्त में था . वहां से इब्राहीम कनान प्रान्त में जाकर बस गया था .और उसके साथ उसकी बहिन ( पत्नी ) और भतीजा लूत भी आगये थे .इब्राहिम को एक गुलाम लड़की " हाजरा " मिली थी . जिस से उसने इस्माइल नामक लड़का पैदा किया था .जिसे मुहम्मद का पूर्वज माना जाता है . इब्राहीम और सारह से जो लड़का हुआ था उसका नाम "इसहाक " था .मुसलमान इनको नबी मानते हैं .यहूदी इसे अबराहाम(אַבְרָהָם ) कहते हैं . जिसका अर्थ है जातियों का बाप .मुसलमान इब्राहीम को एक ,सदाचारी ,सत्यनिष्ठ ,और अल्लाह का परम भक्त नबी कहते हैं .लेकिन वास्तविकता यह है कि,
1-इब्राहीम का देशत्याग
जब इब्राहीम अपने हारान देश को छोड़ कर कनान जाने लगा ,तो उसके साथ , लूत ,साराह अपनी सम्पति भी ले गया और वहीँ बस गया "बाईबिल .उत्पत्ति 12 से 5
2-इब्राहीम झूठा और स्वार्थी था
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया , इब्राहीम झूठ बोलते थे .उनके प्रसिद्ध तीन झूठ इस प्रकार हैं ,एक मैं बीमार हूँ , दूसरा मैंने मूर्तियाँ नहीं तोड़ी . यह दोनो झूठ अल्लाह के लिए बोले थे . और तीसरा झूठ सराह के बारे में था , कि यह मेरी बहिन है .
"حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَحْبُوبٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ لَمْ يَكْذِبْ إِبْرَاهِيمُ ـ عَلَيْهِ السَّلاَمُ ـ إِلاَّ ثَلاَثَ كَذَبَاتٍ ثِنْتَيْنِ مِنْهُنَّ فِي ذَاتِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ، قَوْلُهُهَاجَرَ فَأَتَتْهُ، وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي، "
Sahih Al- Bukhari, Vol.4, Bk 55-Hadith No 578, Translation by Dr. Muhsan Khan
इब्राहीम के तीन झूठ यह हैं ,
1-जब इब्राहीम ने चुपचाप देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ दी ,और लोगों ने पूछा बताओ क्या यह काम तुमने किया है .तो इब्राहीम बोला मैंने नहीं यह तो सबसे बड़े देवता का काम है "सूरा -अम्बिया 21 :62 से 63
2-जब लोगों ने इब्राहीम के पूछा कि तुम्हारा अल्लाह यानी दुनिया के स्वामी के बारे में क्या विचार है ,इब्राहीम आकाश के तारों को देखता रहा , और बोला मैं तो बीमार हूँ "सूरा -अस सफ्फात 37 :87 से 89
3-इब्राहीम ने साराह के बारे में कहा बेशक यह मेरी बहिन है , और मेरे बाप की बेटी है ,लेकिन मेरी सगी माँ की बेटी नहीं है .इसलिए अब यह मेरी पत्नी बन गयी है " बाइबिल .उत्पत्ति 20 :13
3-इब्राहीम पर लानत
जो भी अपनी बहिन के साथ सहवास करे उस पर लानत , चाहे वह उसकी सगी बहिन हो या सौतेली .तो सब ऐसे व्यक्ति पर लानत करें और कहें आमीन '
बाइबिल .व्यवस्था 27 :22
तुम पर हराम हैं , तुम्हारी बहिनें " सूरा -निसा 4 :23
4-इब्राहीम का पापी परिवार
इब्राहीम के काबिले में लड़कों के साथ कुकर्म करने का रिवाज था और उसका भतीजा लूत भी ऐसा था . इस कुकर्म को लूत के नाम से "लावातत" कहा जाता है .इनकी लीला दखिये ,
एक दिन कुछ सुन्दर लडके लूत से मिलने आये ,तो उन्हें देख कर लोग आगये .इस से लूत चिंतित हो गया .और उन लोगों को रोकना कठिन होने लगा .क्योंकि वहां के लोग लड़कों के साथ कुकर्म " Sodomy" करते थे . लूत ने उन लोगों से कहा इन लड़कों को छोडो यह मेरी बेटियां हैं यह इस काम के लिए अधिक उपयोगी हैं .लेकिन लोग बोले तू जानता है कि हमें क्या पसंद है "सूरा -हूद 11 :77 और 78
जिस तरह इब्राहीम ने अपनी बहिन से सहवास किया था उसका भतीजा लूत भी महा पापी था .यह बाइबिल बताती है .
"एक रात लूत की लड़कियों ने तय किया कि आज हम अपने पिता को खूब शराब पिलायेंगे .और उसके साथ सहवास करेंगे .पहले एक लड़की बाप के साथ सोयी , फिर बारी बारी से सभी बाप के साथ सोयीं .इस तरह सभी अपने बाप से गर्भवती हुयीं "बाईबिल -उत्पत्ति 19 :30 से 36
5-इब्राहीम की रखैल हाजरा
इब्राहीम सदाचारी नहीं था ,यह जानकर शैतान ने एक लड़की हाजरा इब्राहीम के पास भेज दी थी .इस से इब्राहीम ने सहवास किया था .
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है , शैतान ने ही हाजरा को इब्राहीम के पास इसलिए भेजा था कि वह उसे दासी के रूप में स्वीकार कर लें .और जब वह इब्राहीम के पास गयी तो इब्राहीम बोला . अल्लाह ने मुझे एक लड़की दासी भेज दी है .
"وقال: 'لقد بعث الله لي الشيطان. اصطحابها إلى إبراهيم وهاجر تعطي لها ". جاء ذلك عادت لإبراهيم وقال: "الله أعطانا فتاة الرقيق للخدمة "
Sahih al-Bukhari, Volume 3, Book 34, Number 420
6-इस्माइल की झूठी पैदायश
चूँकि उस समय काफी बूढ़ा हो चूका था , और उसकी पत्नी सारह बाँझ थी ,इसलिए इब्राहीम और हाजरा ने मिलकर एक साजिश रची और कहीं से एक ताजा बच्चा लोगों को दिखा दिया , कि यह बच्चा हाजरा ने पैदा किया है .और इब्राहिम ने उस बच्चे का नाम इस्माइल रखा था .
एक दिन इब्राहीम तड़के भोर में उठा ,और अँधेरे में हाजरा को तैयार किया .और उसे एक बच्चा दिया .फिर हाजरा ने उस बच्चे को झाड़ियों में छुपा दिया .और हाजरा इस तरह से चिल्लाने लगी जैसे बच्चा जनने की पीड़ा हो रही हो .और जब बच्चे के रोने की आवाज लोगों ने सुनी तो लोगों ने समझा हाजरा ने बच्चे को जन्म दिया है "बाइबिल .उत्पत्ति 21 :14 से 17
7-अरब हराम की औलाद हैं
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि पहले तो हाजरा सारह के पास गयी .फिर इब्राहीम के पास चली गयी .उस समय इब्राहीम काम कर रहे थे .उन्होंने सारह से इशारे से पूछा कि यह किस लिए आयी है . साराह ने कहा यह तुम्हारी दासी है .और सेवा करेगी .अबू हुरैरा ने कहा इस बातको सुनते ही रसूल ने मौजूद सभी श्रोताओं से कहा , सुन लो सभी अरब उसी हाजरा की संतानें हो "
"ثم القى رجال هاجر كخادمة بنت لسارة. جاء سارة الظهر (لإبراهيم)، في حين كان يصلي. إبراهيم وهو يشير بيده، سأل: "ما الذي حدث؟" أجابت، "والله مدلل المؤامرة الشريرة للكافر (أو شخص غير أخلاقي) وأعطاني هاجر للخدمة." (أبو هريرة ثم خاطب مستمعيه قائلا: "هذا (حجر) كان أمك يا بني ما هو بين سما (أي العرب، من نسل إسماعيل، ابن هاجر)."
Bukhari-Volume 4-Book 55: Prophets-Hadith 578
Eng Reference : Sahih al-Bukhari 3358
चूँकि मुहम्मद साहब खुद को भी इब्राहीम के नाजायज ,पुत्र और शैतान द्वारा भेजी गई औरत हाजरा के लडके इस्माइल का वंशज मानते थे .और खुद को इब्राहीम कि तरह रसूल साबित करना चाहते थे .इसलिए उन्होंने इसके लिए इब्राहीम द्वारा की इस्माइल की क़ुरबानी की कहानी का सहारा लिया .
8-क़ुरबानी का सपना
इब्राहीम के पूर्वज अंधविश्वासी थे और सपने की बातों को सही समझ लेते थे .बाइबिल और कुरान में ऐसे कई उदहारण मिलते हैं ,जैसे
"यूसुफ ने पिता से कहा कि रात को मैंने एक सपना देखा कि ग्यारह तारे .सूरज और चाँद मुझे सिजदा कर रहे हैं , यह उन कर पिता ने कहा तुम इस सपने की बात अपने भाइयों से नहीं कहना .ऐसा न हो वह कोई साजिश रचें " सूरा-यूसुफ 12 :4 -5
ऐसा ही सपना इब्राहीम ने देखा ,और सच मान बैठा ,कुरान में लिखा है
जब इब्राहीम का लड़का चलने फिरने योग्य था , तो इब्राहीम ने उस से कहा बेटा मैंने सपने में देखा कि जसे मैं तुझे जिबह कर रहा हूँ ,बोल तेरा क्या विचार है "
सूरा -अस सफ्फात 37 :102
(अरबी में "इन्नी उज्बिहुक انّي اُذبحك" तेरी गर्दन पर छुरी फिरा रहा हूँ )
9-अल्लाह ने क़ुरबानी रोकी
जब इब्राहीम ने अपने बेटे का गला काटने के लिए छुरी हाथ में उठायी ,तो एक फ़रिश्ता पुकारा ,हे इब्राहीम तुम लडके की तरफ हाथ नहीं बढ़ाना .हमें यकीं हो गया कि तू ईश्वर से डरता है .बाइबिल -उत्पत्ति 22 :10 से 12
हमने कहा हे इब्राहीम तूने तो सपने को सच कर दिया .यह तो मेरी परीक्षा थी .और फिर हमने एक महान क़ुरबानी कर दी "सूरा 37 :105 से 107
( नोट - इन आयतों में कहीं पर किसी जानवर का उल्लेख नहीं है ,और न मैंढे का नाम है)
10- गाय की कुर्बानी
जब अल्लाह ने मूसा से कहा कि एक गाय को जिबह करो ,तो लोग बोले क्या तू हमें अपमानित कर रहा है .लेकिन जब लोग मूसा के कहने पर गाय जिबह कर रहे थे तब भी उनके दिल काँप रहे थे . सूरा -बकरा 2 :67 और 71
गाय की क़ुरबानी ( ह्त्या ) का एक वीडियो देखिये
http://www.youtube.com/ watch?v=rgrB9X_mINU&feature =related
(नोट -इस आयत की तफ़सीर में लिखा है ,उस समय मिस्र में किब्ती ( Coptic ) लोग रहते थे जो गाय की पूजा करते थे .इसी लिए अल्लाह ने उनकी आस्था पर प्रहार करने और उनका दिल दुखाने के लिए गाय की कुर्बानी का हुक्म दिया था .जिसे रसूल ने भी सही मान लिया था .हिन्दी कुरान .पेज 137 टिप्पणी संख्या 24 मक्तबा अल हसनात रामपुर )
इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है ,कि 1 . इब्राहीम को झूठ बोलने की आदत थी .और सगी बहिन से शादी करके महापाप किया था , और बाइबिल के मुताबिक यह काम लानत के योग्य है .2 .यातो इब्राहीम ने सपने में लड़के की क़ुरबानी की होगी या शैतान के द्वारा भेजी हाजरा के फर्जी पुत्र की क़ुरबानी की होगी .3 .इस झूठी कहानी को सही मान कर जानवरों का क़त्ल करना उचित नहीं है .4 .अल्लाह इब्राहीम और लूत जैसे पापियों को ही रसूल बनाता है .5 .सारे अरब के लोग इसलिए अपराधी होते हैं क्योंकि वह इब्राहीम के उस नाजायज लडके इस्माइल वंशज हैं ,जिसे शैतान ने भेजा था .6 .क्या इब्राहीम के बाद मुसलमानों में ऐसा एकभी अल्लाह भक्त पैदा हुआ , जो अपने लडके को कुर्बान कर देता .यहूदी और ईसाई भी इब्राहीम को मानते हैं लेकिन कुर्बानी का त्यौहार नहीं मनाते.
महम्मद साहब ने ईदुज्जुहा की परंपरा मुसलमानों को ह्त्या की ट्रेनिग देने के लिए की थी !

मुसलमान कई त्यौहार मानते हैं . जिनमें "ईदुज्जुहा "प्रसिद्ध और प्रिय त्योहर माना जाता है . भारत में इसे "बकरीद " भी कहते हैं .अरबी में ईदुज्जुहा का अर्थ बलिदान ( Sacrifice ) नहीं बल्कि " पशुवध का आनंद "( Joy of slaughter ) हैं.क्योंकि इसमें लाखों जानवरों का क़त्ल होता है .मुसलमानों का दावा है कि यह त्यौहार नबी इब्राहीम की अल्लाह के प्रति निष्ठा, भक्ति और उनके लडके इस्माइल की कुर्बानी को याद करने के लिए मनाया जाता है .और मुहम्मद साहब उसी इस्माइल के वंशज थे .चूँकि इब्राहीम की कथा इस्लाम से पहले की है और इब्राहीम के बारे में जो सही जानकारी बाइबिल , कुरान और हदीसों से मिलती वह इस प्रकार है .
1-इब्राहीम का परिचय
इब्राहीम إبراهيم का काल लगभग 2000 साल ई ० पू से 1500 ई० पूर्व माना जाता है . इसके पिता का नाम मुसलमान "आजर آذر" और यहूदी "तेराह Terah"( תָּרַח )बताते है .इब्राहीम " ऊर " शहर में पैदा हुआ था . जो हारान प्रान्त में था . वहां से इब्राहीम कनान प्रान्त में जाकर बस गया था .और उसके साथ उसकी बहिन ( पत्नी ) और भतीजा लूत भी आगये थे .इब्राहिम को एक गुलाम लड़की " हाजरा " मिली थी . जिस से उसने इस्माइल नामक लड़का पैदा किया था .जिसे मुहम्मद का पूर्वज माना जाता है . इब्राहीम और सारह से जो लड़का हुआ था उसका नाम "इसहाक " था .मुसलमान इनको नबी मानते हैं .यहूदी इसे अबराहाम(אַבְרָהָם ) कहते हैं . जिसका अर्थ है जातियों का बाप .मुसलमान इब्राहीम को एक ,सदाचारी ,सत्यनिष्ठ ,और अल्लाह का परम भक्त नबी कहते हैं .लेकिन वास्तविकता यह है कि,
1-इब्राहीम का देशत्याग
जब इब्राहीम अपने हारान देश को छोड़ कर कनान जाने लगा ,तो उसके साथ , लूत ,साराह अपनी सम्पति भी ले गया और वहीँ बस गया "बाईबिल .उत्पत्ति 12 से 5
2-इब्राहीम झूठा और स्वार्थी था
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया , इब्राहीम झूठ बोलते थे .उनके प्रसिद्ध तीन झूठ इस प्रकार हैं ,एक मैं बीमार हूँ , दूसरा मैंने मूर्तियाँ नहीं तोड़ी . यह दोनो झूठ अल्लाह के लिए बोले थे . और तीसरा झूठ सराह के बारे में था , कि यह मेरी बहिन है .
"حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَحْبُوبٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ لَمْ يَكْذِبْ إِبْرَاهِيمُ ـ عَلَيْهِ السَّلاَمُ ـ إِلاَّ ثَلاَثَ كَذَبَاتٍ ثِنْتَيْنِ مِنْهُنَّ فِي ذَاتِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ، قَوْلُهُهَاجَرَ فَأَتَتْهُ، وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي، "
Sahih Al- Bukhari, Vol.4, Bk 55-Hadith No 578, Translation by Dr. Muhsan Khan
इब्राहीम के तीन झूठ यह हैं ,
1-जब इब्राहीम ने चुपचाप देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ दी ,और लोगों ने पूछा बताओ क्या यह काम तुमने किया है .तो इब्राहीम बोला मैंने नहीं यह तो सबसे बड़े देवता का काम है "सूरा -अम्बिया 21 :62 से 63
2-जब लोगों ने इब्राहीम के पूछा कि तुम्हारा अल्लाह यानी दुनिया के स्वामी के बारे में क्या विचार है ,इब्राहीम आकाश के तारों को देखता रहा , और बोला मैं तो बीमार हूँ "सूरा -अस सफ्फात 37 :87 से 89
3-इब्राहीम ने साराह के बारे में कहा बेशक यह मेरी बहिन है , और मेरे बाप की बेटी है ,लेकिन मेरी सगी माँ की बेटी नहीं है .इसलिए अब यह मेरी पत्नी बन गयी है " बाइबिल .उत्पत्ति 20 :13
3-इब्राहीम पर लानत
जो भी अपनी बहिन के साथ सहवास करे उस पर लानत , चाहे वह उसकी सगी बहिन हो या सौतेली .तो सब ऐसे व्यक्ति पर लानत करें और कहें आमीन '
बाइबिल .व्यवस्था 27 :22
तुम पर हराम हैं , तुम्हारी बहिनें " सूरा -निसा 4 :23
4-इब्राहीम का पापी परिवार
इब्राहीम के काबिले में लड़कों के साथ कुकर्म करने का रिवाज था और उसका भतीजा लूत भी ऐसा था . इस कुकर्म को लूत के नाम से "लावातत" कहा जाता है .इनकी लीला दखिये ,
एक दिन कुछ सुन्दर लडके लूत से मिलने आये ,तो उन्हें देख कर लोग आगये .इस से लूत चिंतित हो गया .और उन लोगों को रोकना कठिन होने लगा .क्योंकि वहां के लोग लड़कों के साथ कुकर्म " Sodomy" करते थे . लूत ने उन लोगों से कहा इन लड़कों को छोडो यह मेरी बेटियां हैं यह इस काम के लिए अधिक उपयोगी हैं .लेकिन लोग बोले तू जानता है कि हमें क्या पसंद है "सूरा -हूद 11 :77 और 78
जिस तरह इब्राहीम ने अपनी बहिन से सहवास किया था उसका भतीजा लूत भी महा पापी था .यह बाइबिल बताती है .
"एक रात लूत की लड़कियों ने तय किया कि आज हम अपने पिता को खूब शराब पिलायेंगे .और उसके साथ सहवास करेंगे .पहले एक लड़की बाप के साथ सोयी , फिर बारी बारी से सभी बाप के साथ सोयीं .इस तरह सभी अपने बाप से गर्भवती हुयीं "बाईबिल -उत्पत्ति 19 :30 से 36
5-इब्राहीम की रखैल हाजरा
इब्राहीम सदाचारी नहीं था ,यह जानकर शैतान ने एक लड़की हाजरा इब्राहीम के पास भेज दी थी .इस से इब्राहीम ने सहवास किया था .
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है , शैतान ने ही हाजरा को इब्राहीम के पास इसलिए भेजा था कि वह उसे दासी के रूप में स्वीकार कर लें .और जब वह इब्राहीम के पास गयी तो इब्राहीम बोला . अल्लाह ने मुझे एक लड़की दासी भेज दी है .
"وقال: 'لقد بعث الله لي الشيطان. اصطحابها إلى إبراهيم وهاجر تعطي لها ". جاء ذلك عادت لإبراهيم وقال: "الله أعطانا فتاة الرقيق للخدمة "
Sahih al-Bukhari, Volume 3, Book 34, Number 420
6-इस्माइल की झूठी पैदायश
चूँकि उस समय काफी बूढ़ा हो चूका था , और उसकी पत्नी सारह बाँझ थी ,इसलिए इब्राहीम और हाजरा ने मिलकर एक साजिश रची और कहीं से एक ताजा बच्चा लोगों को दिखा दिया , कि यह बच्चा हाजरा ने पैदा किया है .और इब्राहिम ने उस बच्चे का नाम इस्माइल रखा था .
एक दिन इब्राहीम तड़के भोर में उठा ,और अँधेरे में हाजरा को तैयार किया .और उसे एक बच्चा दिया .फिर हाजरा ने उस बच्चे को झाड़ियों में छुपा दिया .और हाजरा इस तरह से चिल्लाने लगी जैसे बच्चा जनने की पीड़ा हो रही हो .और जब बच्चे के रोने की आवाज लोगों ने सुनी तो लोगों ने समझा हाजरा ने बच्चे को जन्म दिया है "बाइबिल .उत्पत्ति 21 :14 से 17
7-अरब हराम की औलाद हैं
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि पहले तो हाजरा सारह के पास गयी .फिर इब्राहीम के पास चली गयी .उस समय इब्राहीम काम कर रहे थे .उन्होंने सारह से इशारे से पूछा कि यह किस लिए आयी है . साराह ने कहा यह तुम्हारी दासी है .और सेवा करेगी .अबू हुरैरा ने कहा इस बातको सुनते ही रसूल ने मौजूद सभी श्रोताओं से कहा , सुन लो सभी अरब उसी हाजरा की संतानें हो "
"ثم القى رجال هاجر كخادمة بنت لسارة. جاء سارة الظهر (لإبراهيم)، في حين كان يصلي. إبراهيم وهو يشير بيده، سأل: "ما الذي حدث؟" أجابت، "والله مدلل المؤامرة الشريرة للكافر (أو شخص غير أخلاقي) وأعطاني هاجر للخدمة." (أبو هريرة ثم خاطب مستمعيه قائلا: "هذا (حجر) كان أمك يا بني ما هو بين سما (أي العرب، من نسل إسماعيل، ابن هاجر)."
Bukhari-Volume 4-Book 55: Prophets-Hadith 578
Eng Reference : Sahih al-Bukhari 3358
चूँकि मुहम्मद साहब खुद को भी इब्राहीम के नाजायज ,पुत्र और शैतान द्वारा भेजी गई औरत हाजरा के लडके इस्माइल का वंशज मानते थे .और खुद को इब्राहीम कि तरह रसूल साबित करना चाहते थे .इसलिए उन्होंने इसके लिए इब्राहीम द्वारा की इस्माइल की क़ुरबानी की कहानी का सहारा लिया .
8-क़ुरबानी का सपना
इब्राहीम के पूर्वज अंधविश्वासी थे और सपने की बातों को सही समझ लेते थे .बाइबिल और कुरान में ऐसे कई उदहारण मिलते हैं ,जैसे
"यूसुफ ने पिता से कहा कि रात को मैंने एक सपना देखा कि ग्यारह तारे .सूरज और चाँद मुझे सिजदा कर रहे हैं , यह उन कर पिता ने कहा तुम इस सपने की बात अपने भाइयों से नहीं कहना .ऐसा न हो वह कोई साजिश रचें " सूरा-यूसुफ 12 :4 -5
ऐसा ही सपना इब्राहीम ने देखा ,और सच मान बैठा ,कुरान में लिखा है
जब इब्राहीम का लड़का चलने फिरने योग्य था , तो इब्राहीम ने उस से कहा बेटा मैंने सपने में देखा कि जसे मैं तुझे जिबह कर रहा हूँ ,बोल तेरा क्या विचार है "
सूरा -अस सफ्फात 37 :102
(अरबी में "इन्नी उज्बिहुक انّي اُذبحك" तेरी गर्दन पर छुरी फिरा रहा हूँ )
9-अल्लाह ने क़ुरबानी रोकी
जब इब्राहीम ने अपने बेटे का गला काटने के लिए छुरी हाथ में उठायी ,तो एक फ़रिश्ता पुकारा ,हे इब्राहीम तुम लडके की तरफ हाथ नहीं बढ़ाना .हमें यकीं हो गया कि तू ईश्वर से डरता है .बाइबिल -उत्पत्ति 22 :10 से 12
हमने कहा हे इब्राहीम तूने तो सपने को सच कर दिया .यह तो मेरी परीक्षा थी .और फिर हमने एक महान क़ुरबानी कर दी "सूरा 37 :105 से 107
( नोट - इन आयतों में कहीं पर किसी जानवर का उल्लेख नहीं है ,और न मैंढे का नाम है)
10- गाय की कुर्बानी
जब अल्लाह ने मूसा से कहा कि एक गाय को जिबह करो ,तो लोग बोले क्या तू हमें अपमानित कर रहा है .लेकिन जब लोग मूसा के कहने पर गाय जिबह कर रहे थे तब भी उनके दिल काँप रहे थे . सूरा -बकरा 2 :67 और 71
गाय की क़ुरबानी ( ह्त्या ) का एक वीडियो देखिये
http://www.youtube.com/
(नोट -इस आयत की तफ़सीर में लिखा है ,उस समय मिस्र में किब्ती ( Coptic ) लोग रहते थे जो गाय की पूजा करते थे .इसी लिए अल्लाह ने उनकी आस्था पर प्रहार करने और उनका दिल दुखाने के लिए गाय की कुर्बानी का हुक्म दिया था .जिसे रसूल ने भी सही मान लिया था .हिन्दी कुरान .पेज 137 टिप्पणी संख्या 24 मक्तबा अल हसनात रामपुर )
इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है ,कि 1 . इब्राहीम को झूठ बोलने की आदत थी .और सगी बहिन से शादी करके महापाप किया था , और बाइबिल के मुताबिक यह काम लानत के योग्य है .2 .यातो इब्राहीम ने सपने में लड़के की क़ुरबानी की होगी या शैतान के द्वारा भेजी हाजरा के फर्जी पुत्र की क़ुरबानी की होगी .3 .इस झूठी कहानी को सही मान कर जानवरों का क़त्ल करना उचित नहीं है .4 .अल्लाह इब्राहीम और लूत जैसे पापियों को ही रसूल बनाता है .5 .सारे अरब के लोग इसलिए अपराधी होते हैं क्योंकि वह इब्राहीम के उस नाजायज लडके इस्माइल वंशज हैं ,जिसे शैतान ने भेजा था .6 .क्या इब्राहीम के बाद मुसलमानों में ऐसा एकभी अल्लाह भक्त पैदा हुआ , जो अपने लडके को कुर्बान कर देता .यहूदी और ईसाई भी इब्राहीम को मानते हैं लेकिन कुर्बानी का त्यौहार नहीं मनाते.
महम्मद साहब ने ईदुज्जुहा की परंपरा मुसलमानों को ह्त्या की ट्रेनिग देने के लिए की थी !
कुरबानी का अर्थ और मकसद
यह इस लेख में कुरान और हदीस के हवालों दिया जा रहा है .साथ में कुछ विडियो लिंक भी दिए हैं .देखिये

1-कुरबानी का अर्थ और मकसद
अरबी शब्दकोश के अनुसार "क़ुरबानी قرباني" शब्द मूल यह तीन अक्षर है 1 .قकाफ 2 .رरे 3 और ب बे = क र बق ر ب .इसका अर्थ निकट होना है .तात्पर्य ऐसे काम जिस से अल्लाह की समीपता प्राप्त हो . हिंदी में इसका समानार्थी शब्द " उपासना" है .उप = पास ,आस =निकट .लेकिन अरबी में जानवरों को मारने के लिए "उजुहाالاضحي " शब्द है जिसका अर्थ "slaughter " होता है .इसमे किसी प्रकार की कोई आध्यात्मिकता नजर नहीं दिखती है .बल्कि क्रूरता , हिंसा ,और निर्दयता साफ प्रकट होती है .जानवरों को बेरहमी से कटते और तड़प कर मरते देखकर दिल काँप उठता है और यही अल्लाह चाहता है , कुरान में कहा है ,
"और उनके दिल उस समय काँप उठते हैं , और वह अल्लाह को याद करने लगते हैं " सूरा -अल हज्ज 22 :35
2-क़ुरबानी की विधियाँ
यद्यपि कुरान में जानवरों की क़ुरबानी करने के बारे में विस्तार से नहीं बताया है और सिर्फ यही लिखा है ,
"प्रत्येक गिरोह के लिए हमने क़ुरबानी का तरीका ठहरा दिया है , ताकि वह अपने जानवर अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर दें "
सूरा -हज्ज 22 :34
लेकिन सुन्नी इमाम " मालिक इब्न अबी अमीर अल अस्वही" यानि मालिक बिन अनस مالك بن انس "(711 - 795 ई० ) नेअपनी प्रसिद्ध अल मुवत्ताThe Muwatta: (Arabic: الموطأ) की किताब 23 और 24 में जानवरों और उनके बच्चों की क़ुरबानी के जो तरीके बताएं है . उसे पढ़कर कोई भी अल्लाह को दयालु नहीं मानेगा ,
3-पशुवध की राक्षसी विधियाँ
मांसाहार अरबों का प्रिय भोजन है ,इसके लिए वह किसी भी तरीके से किसी भी जानवर को मारकर खा जाते थे . जानवर गाभिन हो या बच्चा हो ,या मादा के पेट में हो सबको हजम कर लेते थे . और रसूल उनके इस काम को जायज बता देते थे बाद में यही सुन्नत बन गयी है और सभी मुसलमान इसका पालन करते हैं ,इन हदीसों को देखिये ,
अ -खूंटा भोंक कर
"अनस ने कहा कि बनू हरिस का जैद इब्न असलम ऊंटों का चरवाहा था , उसकी गाभिन ऊंटनी बीमार थी और मरणासन्न थी . तो उसने एक नोकदार खूंटी ऊंटनी को भोंक कर मार दिया . रसूल को पता चला तो वह बोले इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऊंटनी को खा सकते हो "
मालिक मुवत्ता-किताब 24 हदीस 3
ब-पत्थर मार कर
"याहया ने कहा कि इब्न अल साद कि गुलाम लड़की मदीने के पास साल नामकी जगह भेड़ें चरा रही थी. एक भेड़ बीमार होकर मरने वाली थी.तब उस लड़की ने पत्थर मार मार कर भेड़ को मार डाला .रसूल ने कहा इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऐसा कर सकते हो "
मालिक मुवत्ता -किताब 24 हदीस 4
जानवरों को मारने कि यह विधियाँ उसने बताई हैं , जिसको दुनिया के लिए रहमत कहा जाता है ?और अब किस किस को खाएं यह भी देख लीजये .
4-किस किस को खा सकते हो
इन हदीसों को पढ़कर आपको राक्षसों की याद आ जाएगी .यह सभी हदीसें प्रमाणिक है ,यह नमूने देखिये
अ -घायल जानवर
"याह्या ने कहा कि एक भेड़ ऊपर से गिर गयी थी ,और उसका सिर्फ आधा शरीर ही हरकत कर रहा था ,लेकिन वह आँखें झपक रही थी .यह देखकर जैद बिन साबित ने कहा उसे तुरंत ही खा जाओ "मालिक मुवत्ता किताब 24 हदीस 7
ब -मादा के गर्भ का बच्चा
"अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि जब एक ऊंटनी को काटा गया तो उसके पेट में पूर्ण विक्सित बच्चा था ,जिसके बल भी उग चुके थे . जब ऊंटनी के पेट से बच्चा निकाला गया तो काफी खून बहा ,और बच्चे दिल तब भी धड़क रहा था.तब सईद इब्न अल मुसय्यब ने कहा कि माँ के हलाल से बच्चे का हलाल भी माना जाता है . इसलिए तुम इस बच्चे को माँ के साथ ही खा जाओ " मुवत्ता किताब 24 हदीस 8 और 9
स -दूध पीता बच्चा
"अबू बुरदा ने रसूल से कहा अगर मुझे जानवर का केवल एकही ऐसा बच्चा मिले जो बहुत ही छोटा और दूध पीता हो , रसूल ने कहा ऐसी दशा में जब बड़ा जानवर न मिले तुम बच्चे को भी काट कर खा सकते हो " मालिक मुवत्ता -किताब 23 हदीस 4
5-क़ुरबानी का आदेश और तरीका
वैसे तो कुरान में कई जानवरों की क़ुरबानी के बारे में कहा गया है ,लेकिन यहाँ हम कुरान की आयत विडियो लिंक देकर कुछ जानवरों की क़ुरबानी के बारे जानकारी दे रहे हैं .ताकि सही बात पता चल .सके , पढ़िए और देखिये ,
अ -गाय "याद करो जब अल्लाह ने कहा की गाय को जिबह करो ,जो न बूढी हो और न बच्ची बीच का आयु की हो "सूरा -बकरा 2 :67 -68
http://www.youtube.com/ watch?v=Giz6aMHuDhU&feature =related
ब- ऊंट -"और ऊंट की कुरबानी को हमने अल्लाह की भक्ति की निशानियाँ ठहरा दिया है "सूरा अल हज्ज 22 :36
http://www.youtube.com/ watch?v=uT9oFsxqTsg&feature =related
स -चौपाये बैल -"तुम्हारे लिए चौपाये जानवर भी हलाल हैं ,सिवाय उसके जो बताये गए हैं "सूरा-अल 22 :30
http://www.youtube.com/ watch?v=RMDLNLK83kg&feature =related
6-गैर मुस्लिमों को गोश्त खिलाओ
"इब्ने उमर और और इब्न मसूद ने कहा की रसूल ने कहा है ,कुरबानी का गोश्त तुम गैर मुस्लिम दोस्त को खिलाओ ,ताकि उसले दिल में इस्लाम के प्रति झुकाव पैदा हो "
it is permissible to give some of it to a non-Muslim if he is poor or a relative or a neighbor, or in order to open his heart to Islam.
"فإنه يجوز أن أعطي بعض منه الى غير مسلم إذا كان فقيرا أو أحد الأقارب أو الجيران، أو من أجل فتح صدره للإسلام "
Sahih Al-Jami`, 6118
गैर मुस्लिमों जैसे हिन्दुओं को गोश्त खिलाने का मकसद उनको मुसलमान बनाना है ,क्योंकि यह धर्म परिवर्तन की शुरुआत है .बार बार खाने से व्यक्ति निर्दयी और कट्टर मुसलमान बन जाता है .
7-गोश्तखोरी से आदमखोरी
मांसाहारी व्यक्ति आगे चलकर नरपिशाच कैसे बन जाता है ,इसका सबूत पाकिस्तान की ARY News से पता चलता है ,दिनांक 4 अप्रैल 2011 पुलिस ने पाकिस्तान पंजाब दरया खान इलाके से आरिफ और फरमान नामके ऐसे दो लोगों को गिरफ्तार किया ,जो कब्र से लाशें निकाल कर ,तुकडे करके पका कर खाते थे . यह परिवार सहित दस साल से ऐसा कर रहे थे.दो दिन पहले ही नूर हुसैन की 24 की बेटी सायरा परवीन की मौत हो गयी थी ,फरमान ने लाश को निकाल लिया ,जब वह आरिफ के साथ सायरा को कट कर पका रहा था ,तो पकड़ा गया . पुलिस ने देगची में लड़की के पैर बरामद किये . इन पिशाचों ने कबूल किया कि हमने बच्चे और कुत्ते भी खाए हैं .ऐसा करने कीप्रेरणा हमें दूसरों से मिली है , जो यही काम कराते हैं . विडियो लिंक
http://www.youtube.com/ watch?v=uoDpLHCr7e0
8-हलाल से हराम तक
खाने के लिए जितने भी जानवर मारे जाते हैं ,उनका कुछ हिस्सा ही खाया जाता है , बाकी का कई तरह से इस्तेमाल करके लोगों को खिला दिया जाता है ..इसके बारे में पाकिस्तान के DUNYA NEWS की समन खान ने पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाबू साबू नाले के पास बकर मंडी के मजबह (Slaughter House ) का दौरा करके बताया कि वहां ,गधे कुत्ते , चूहे जैसे सभी मरे जानवरों की चर्बी निकाल कर घी बनाया जाता है . यही नहीं होटलों में खाए गए गोश्त की हडियों को गर्म करके उसका भी तेल निकाल कर पीपों में भर कर बेच दिया जाता है ,जिसे जलेबी ,कबाब ,समोसे आदि तलने के लिए प्रयोग किया होता है . खून को सुखा कर मुर्गोयों की खुराक बनती है . फिर इन्हीं मुर्गियों को खा लिया जाता है .आँतों में कीमा भरके बर्गर बना कर खिलाया जाता है .विडियो लिंक
http://www.youtube.com/ watch?feature=endscreen&NR= 1&v=6YdtLZGsK_E
हमारी सरकार जल्द ही पाकिस्तान के साथ व्यापारिक अनुबंध करने जारही है ,और तेल या घी के नाम पर जानवरों की चर्बी और ऐसी चीजें यहाँ आने वाली हैं .
लोगों को फैसला करना होगा कि उन्हें पूर्णतयः शाकाहारी बनकर ,शातिशाली , बलवान ,निर्भय और जीवों के प्रति दयालु बन कर देश और विश्व कि सेवा करना है ,या धर्म के नाम पर या दुसरे किसी कारणों से प्राणियों को मारकर खाके हिसक क्रूर निर्दयी सर्वभक्षी पिशाच बन कर देश और समाज के लिए संकट पैदा करना है .
दूसरेधर्मों के लोग ईश्वर को प्रसन्न करने और उसकी कृपा प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करके खुद को कष्ट देते हैं .लेकिन इस्लाम में बेजुबान जानवरों को मार कर अल्लाह को खुश किया जाता है . और इसी को इबादत या बंदगी माना जाता है .फिर यह बंदगी दरिंदगी बन जाती है .और जिसका नतीजा गन्दगी के रूप में लोग खाते हैं
इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद विचार जरुर करिए .
माँसाहारी अत्याचारी ,और अमानुषिक हो सकते हैं लेकिन बलवान और सहृदय कभी नहीं सो सकते

1-कुरबानी का अर्थ और मकसद
अरबी शब्दकोश के अनुसार "क़ुरबानी قرباني" शब्द मूल यह तीन अक्षर है 1 .قकाफ 2 .رरे 3 और ب बे = क र बق ر ب .इसका अर्थ निकट होना है .तात्पर्य ऐसे काम जिस से अल्लाह की समीपता प्राप्त हो . हिंदी में इसका समानार्थी शब्द " उपासना" है .उप = पास ,आस =निकट .लेकिन अरबी में जानवरों को मारने के लिए "उजुहाالاضحي " शब्द है जिसका अर्थ "slaughter " होता है .इसमे किसी प्रकार की कोई आध्यात्मिकता नजर नहीं दिखती है .बल्कि क्रूरता , हिंसा ,और निर्दयता साफ प्रकट होती है .जानवरों को बेरहमी से कटते और तड़प कर मरते देखकर दिल काँप उठता है और यही अल्लाह चाहता है , कुरान में कहा है ,
"और उनके दिल उस समय काँप उठते हैं , और वह अल्लाह को याद करने लगते हैं " सूरा -अल हज्ज 22 :35
2-क़ुरबानी की विधियाँ
यद्यपि कुरान में जानवरों की क़ुरबानी करने के बारे में विस्तार से नहीं बताया है और सिर्फ यही लिखा है ,
"प्रत्येक गिरोह के लिए हमने क़ुरबानी का तरीका ठहरा दिया है , ताकि वह अपने जानवर अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर दें "
सूरा -हज्ज 22 :34
लेकिन सुन्नी इमाम " मालिक इब्न अबी अमीर अल अस्वही" यानि मालिक बिन अनस مالك بن انس "(711 - 795 ई० ) नेअपनी प्रसिद्ध अल मुवत्ताThe Muwatta: (Arabic: الموطأ) की किताब 23 और 24 में जानवरों और उनके बच्चों की क़ुरबानी के जो तरीके बताएं है . उसे पढ़कर कोई भी अल्लाह को दयालु नहीं मानेगा ,
3-पशुवध की राक्षसी विधियाँ
मांसाहार अरबों का प्रिय भोजन है ,इसके लिए वह किसी भी तरीके से किसी भी जानवर को मारकर खा जाते थे . जानवर गाभिन हो या बच्चा हो ,या मादा के पेट में हो सबको हजम कर लेते थे . और रसूल उनके इस काम को जायज बता देते थे बाद में यही सुन्नत बन गयी है और सभी मुसलमान इसका पालन करते हैं ,इन हदीसों को देखिये ,
अ -खूंटा भोंक कर
"अनस ने कहा कि बनू हरिस का जैद इब्न असलम ऊंटों का चरवाहा था , उसकी गाभिन ऊंटनी बीमार थी और मरणासन्न थी . तो उसने एक नोकदार खूंटी ऊंटनी को भोंक कर मार दिया . रसूल को पता चला तो वह बोले इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऊंटनी को खा सकते हो "
मालिक मुवत्ता-किताब 24 हदीस 3
ब-पत्थर मार कर
"याहया ने कहा कि इब्न अल साद कि गुलाम लड़की मदीने के पास साल नामकी जगह भेड़ें चरा रही थी. एक भेड़ बीमार होकर मरने वाली थी.तब उस लड़की ने पत्थर मार मार कर भेड़ को मार डाला .रसूल ने कहा इसमे कोई बुराई नहीं है ,तुम ऐसा कर सकते हो "
मालिक मुवत्ता -किताब 24 हदीस 4
जानवरों को मारने कि यह विधियाँ उसने बताई हैं , जिसको दुनिया के लिए रहमत कहा जाता है ?और अब किस किस को खाएं यह भी देख लीजये .
4-किस किस को खा सकते हो
इन हदीसों को पढ़कर आपको राक्षसों की याद आ जाएगी .यह सभी हदीसें प्रमाणिक है ,यह नमूने देखिये
अ -घायल जानवर
"याह्या ने कहा कि एक भेड़ ऊपर से गिर गयी थी ,और उसका सिर्फ आधा शरीर ही हरकत कर रहा था ,लेकिन वह आँखें झपक रही थी .यह देखकर जैद बिन साबित ने कहा उसे तुरंत ही खा जाओ "मालिक मुवत्ता किताब 24 हदीस 7
ब -मादा के गर्भ का बच्चा
"अब्दुल्लाह इब्न उमर ने कहा कि जब एक ऊंटनी को काटा गया तो उसके पेट में पूर्ण विक्सित बच्चा था ,जिसके बल भी उग चुके थे . जब ऊंटनी के पेट से बच्चा निकाला गया तो काफी खून बहा ,और बच्चे दिल तब भी धड़क रहा था.तब सईद इब्न अल मुसय्यब ने कहा कि माँ के हलाल से बच्चे का हलाल भी माना जाता है . इसलिए तुम इस बच्चे को माँ के साथ ही खा जाओ " मुवत्ता किताब 24 हदीस 8 और 9
स -दूध पीता बच्चा
"अबू बुरदा ने रसूल से कहा अगर मुझे जानवर का केवल एकही ऐसा बच्चा मिले जो बहुत ही छोटा और दूध पीता हो , रसूल ने कहा ऐसी दशा में जब बड़ा जानवर न मिले तुम बच्चे को भी काट कर खा सकते हो " मालिक मुवत्ता -किताब 23 हदीस 4
5-क़ुरबानी का आदेश और तरीका
वैसे तो कुरान में कई जानवरों की क़ुरबानी के बारे में कहा गया है ,लेकिन यहाँ हम कुरान की आयत विडियो लिंक देकर कुछ जानवरों की क़ुरबानी के बारे जानकारी दे रहे हैं .ताकि सही बात पता चल .सके , पढ़िए और देखिये ,
अ -गाय "याद करो जब अल्लाह ने कहा की गाय को जिबह करो ,जो न बूढी हो और न बच्ची बीच का आयु की हो "सूरा -बकरा 2 :67 -68
http://www.youtube.com/
ब- ऊंट -"और ऊंट की कुरबानी को हमने अल्लाह की भक्ति की निशानियाँ ठहरा दिया है "सूरा अल हज्ज 22 :36
http://www.youtube.com/
स -चौपाये बैल -"तुम्हारे लिए चौपाये जानवर भी हलाल हैं ,सिवाय उसके जो बताये गए हैं "सूरा-अल 22 :30
http://www.youtube.com/
6-गैर मुस्लिमों को गोश्त खिलाओ
"इब्ने उमर और और इब्न मसूद ने कहा की रसूल ने कहा है ,कुरबानी का गोश्त तुम गैर मुस्लिम दोस्त को खिलाओ ,ताकि उसले दिल में इस्लाम के प्रति झुकाव पैदा हो "
it is permissible to give some of it to a non-Muslim if he is poor or a relative or a neighbor, or in order to open his heart to Islam.
"فإنه يجوز أن أعطي بعض منه الى غير مسلم إذا كان فقيرا أو أحد الأقارب أو الجيران، أو من أجل فتح صدره للإسلام "
Sahih Al-Jami`, 6118
गैर मुस्लिमों जैसे हिन्दुओं को गोश्त खिलाने का मकसद उनको मुसलमान बनाना है ,क्योंकि यह धर्म परिवर्तन की शुरुआत है .बार बार खाने से व्यक्ति निर्दयी और कट्टर मुसलमान बन जाता है .
7-गोश्तखोरी से आदमखोरी
मांसाहारी व्यक्ति आगे चलकर नरपिशाच कैसे बन जाता है ,इसका सबूत पाकिस्तान की ARY News से पता चलता है ,दिनांक 4 अप्रैल 2011 पुलिस ने पाकिस्तान पंजाब दरया खान इलाके से आरिफ और फरमान नामके ऐसे दो लोगों को गिरफ्तार किया ,जो कब्र से लाशें निकाल कर ,तुकडे करके पका कर खाते थे . यह परिवार सहित दस साल से ऐसा कर रहे थे.दो दिन पहले ही नूर हुसैन की 24 की बेटी सायरा परवीन की मौत हो गयी थी ,फरमान ने लाश को निकाल लिया ,जब वह आरिफ के साथ सायरा को कट कर पका रहा था ,तो पकड़ा गया . पुलिस ने देगची में लड़की के पैर बरामद किये . इन पिशाचों ने कबूल किया कि हमने बच्चे और कुत्ते भी खाए हैं .ऐसा करने कीप्रेरणा हमें दूसरों से मिली है , जो यही काम कराते हैं . विडियो लिंक
http://www.youtube.com/
8-हलाल से हराम तक
खाने के लिए जितने भी जानवर मारे जाते हैं ,उनका कुछ हिस्सा ही खाया जाता है , बाकी का कई तरह से इस्तेमाल करके लोगों को खिला दिया जाता है ..इसके बारे में पाकिस्तान के DUNYA NEWS की समन खान ने पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाबू साबू नाले के पास बकर मंडी के मजबह (Slaughter House ) का दौरा करके बताया कि वहां ,गधे कुत्ते , चूहे जैसे सभी मरे जानवरों की चर्बी निकाल कर घी बनाया जाता है . यही नहीं होटलों में खाए गए गोश्त की हडियों को गर्म करके उसका भी तेल निकाल कर पीपों में भर कर बेच दिया जाता है ,जिसे जलेबी ,कबाब ,समोसे आदि तलने के लिए प्रयोग किया होता है . खून को सुखा कर मुर्गोयों की खुराक बनती है . फिर इन्हीं मुर्गियों को खा लिया जाता है .आँतों में कीमा भरके बर्गर बना कर खिलाया जाता है .विडियो लिंक
http://www.youtube.com/
हमारी सरकार जल्द ही पाकिस्तान के साथ व्यापारिक अनुबंध करने जारही है ,और तेल या घी के नाम पर जानवरों की चर्बी और ऐसी चीजें यहाँ आने वाली हैं .
लोगों को फैसला करना होगा कि उन्हें पूर्णतयः शाकाहारी बनकर ,शातिशाली , बलवान ,निर्भय और जीवों के प्रति दयालु बन कर देश और विश्व कि सेवा करना है ,या धर्म के नाम पर या दुसरे किसी कारणों से प्राणियों को मारकर खाके हिसक क्रूर निर्दयी सर्वभक्षी पिशाच बन कर देश और समाज के लिए संकट पैदा करना है .
दूसरेधर्मों के लोग ईश्वर को प्रसन्न करने और उसकी कृपा प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करके खुद को कष्ट देते हैं .लेकिन इस्लाम में बेजुबान जानवरों को मार कर अल्लाह को खुश किया जाता है . और इसी को इबादत या बंदगी माना जाता है .फिर यह बंदगी दरिंदगी बन जाती है .और जिसका नतीजा गन्दगी के रूप में लोग खाते हैं
इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद विचार जरुर करिए .
माँसाहारी अत्याचारी ,और अमानुषिक हो सकते हैं लेकिन बलवान और सहृदय कभी नहीं सो सकते
बुत परस्त योनी पूजक मुसलमान
बुत परस्त योनी पूजक मुसलमान
दुनिया में सबसे ज्यादा चिल्ला चिल्ला के मूर्ति पूजा का विरोध करने वाले मुसलमान हैं | पर असल में सबसे ज्यादा और सबसे बड़े मूर्तिपूजक मुसलमान ही हैं | मुसलमानों को लड़ने का बहाना चाहिए कोई भी जिस से वे लड़ सकते हैं | आपस में लड़ते हैं कोई भी बहाना लेकर और बाहर ईश बहुदेववाद तो बहुत बड़ा बहाना हैं, कत्लेआम के लिए | खैर हम ये जानते हैं के मुसलमान मूर्तिपूजक कैसे हैं ? मूर्ति भी ऐसी वैसी नहीं योनी की, एक योनी की मूर्ति के सामने ना केवल झुकते हैं अपितु चुमते भी हैं |

खुद मोहम्मद अंधविश्वासी मूर्तिपूजक था उसने पत्थर की योनी को चूमा था प्रमाण देखिये |
Volume 2, book of Hajj, chapter 56, H.No. 675. Umar (may Allah be pleased with him) said, “I know that you are a stone and can neither benefit nor harm. Had I not seen the Prophet (pbuh) touching (and kissing) you, I would never have touched (and kissed) you”.
"
ये तो पत्थर की योनी थी मोहम्मद ने तो इतनी औरते रखी हैं के क्या क्या चूमा होगा आप खुद ही अनुमान लगाये |
देखा आपने कैसे मोहम्मद ने अन्धविश्वास को बढ़ाया | किस अधिकार से मुसलमान दूसरों का मूर्तिपूजा का विरोध करते हैं उनका सिर्फ एक ही मतलब हैं के वो मूर्ति पूजो जो हम पूजते हैं ना की वो जो तुम लोंग |
इस्लाम एक सम्प्रदाये हैं जो वाम मार्गी सम्प्रदाये से काफी आगे निकल गया हैं | वाम मार्गियो के सम्प्रदाये तो व्यभिचार और मांसाहार तक ही सिमित था | मोहम्मद ने वाम मार्ग को लूट,हत्या,डकैती,बलात्कार और दूसरों से नफरत करने की बुलंदियों तक पहुचा दिया | निराकार ईश्वर के उच्च सिद्धांत को समझना मोहम्मद जैसे व्यभिचारी के बस की बात कहा थी | खुद मानव योनी का दुरूपयोग कर के नर्क(निकृष्ट जीव योनी) में गया और दुनिया के अरबो मुसलमानों का पतन करवा गया | मुस्लिम भाइयो ईश्वर एक हैं निराकार हैं वह सबसे प्रेम करने वाला भेदभाव ना करने वाला न्यायकारी हैं | वो सभी जगह हैं उसे सातवे आसमान पर बैठने की जरुरत नहीं | जो ईश्वर परमात्मा हर जगह हैं उसे किसी पैगम्बर की जरुरत नहीं | ये पैगम्बर ढ़ोंगी बाबाओ जैसा ही चल रहा था जब मोहम्मद ने भी खुद को पैगम्बर घोषित किया | अल्लाह के नाम पर उसने वो सारे गुनाह किये और करवाए जो मानवता ही हदे तोड़ते थे | जिसने उस पर सवाल उठाया उसे मरवा दिया गया इसलिए भी आप लोंग हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं उसके गलत कामो पर शंका होने के बावजूद | देखिये मानव जन्म बार बार नहीं मिलता बड़ी मुश्किल से मिला हैं कई जीवो की योनियों को पार कर के इसे यु बर्बाद ना करिये | इस्लाम को छोडिये और वैदिक धर्मं को जानिए वापस अपने बाप दादाओ के धर्म को वापस आजाइए
दुनिया में सबसे ज्यादा चिल्ला चिल्ला के मूर्ति पूजा का विरोध करने वाले मुसलमान हैं | पर असल में सबसे ज्यादा और सबसे बड़े मूर्तिपूजक मुसलमान ही हैं | मुसलमानों को लड़ने का बहाना चाहिए कोई भी जिस से वे लड़ सकते हैं | आपस में लड़ते हैं कोई भी बहाना लेकर और बाहर ईश बहुदेववाद तो बहुत बड़ा बहाना हैं, कत्लेआम के लिए | खैर हम ये जानते हैं के मुसलमान मूर्तिपूजक कैसे हैं ? मूर्ति भी ऐसी वैसी नहीं योनी की, एक योनी की मूर्ति के सामने ना केवल झुकते हैं अपितु चुमते भी हैं |

खुद मोहम्मद अंधविश्वासी मूर्तिपूजक था उसने पत्थर की योनी को चूमा था प्रमाण देखिये |
Volume 2, book of Hajj, chapter 56, H.No. 675. Umar (may Allah be pleased with him) said, “I know that you are a stone and can neither benefit nor harm. Had I not seen the Prophet (pbuh) touching (and kissing) you, I would never have touched (and kissed) you”.
"
ये तो पत्थर की योनी थी मोहम्मद ने तो इतनी औरते रखी हैं के क्या क्या चूमा होगा आप खुद ही अनुमान लगाये |
देखा आपने कैसे मोहम्मद ने अन्धविश्वास को बढ़ाया | किस अधिकार से मुसलमान दूसरों का मूर्तिपूजा का विरोध करते हैं उनका सिर्फ एक ही मतलब हैं के वो मूर्ति पूजो जो हम पूजते हैं ना की वो जो तुम लोंग |
इस्लाम एक सम्प्रदाये हैं जो वाम मार्गी सम्प्रदाये से काफी आगे निकल गया हैं | वाम मार्गियो के सम्प्रदाये तो व्यभिचार और मांसाहार तक ही सिमित था | मोहम्मद ने वाम मार्ग को लूट,हत्या,डकैती,बलात्कार और दूसरों से नफरत करने की बुलंदियों तक पहुचा दिया | निराकार ईश्वर के उच्च सिद्धांत को समझना मोहम्मद जैसे व्यभिचारी के बस की बात कहा थी | खुद मानव योनी का दुरूपयोग कर के नर्क(निकृष्ट जीव योनी) में गया और दुनिया के अरबो मुसलमानों का पतन करवा गया | मुस्लिम भाइयो ईश्वर एक हैं निराकार हैं वह सबसे प्रेम करने वाला भेदभाव ना करने वाला न्यायकारी हैं | वो सभी जगह हैं उसे सातवे आसमान पर बैठने की जरुरत नहीं | जो ईश्वर परमात्मा हर जगह हैं उसे किसी पैगम्बर की जरुरत नहीं | ये पैगम्बर ढ़ोंगी बाबाओ जैसा ही चल रहा था जब मोहम्मद ने भी खुद को पैगम्बर घोषित किया | अल्लाह के नाम पर उसने वो सारे गुनाह किये और करवाए जो मानवता ही हदे तोड़ते थे | जिसने उस पर सवाल उठाया उसे मरवा दिया गया इसलिए भी आप लोंग हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं उसके गलत कामो पर शंका होने के बावजूद | देखिये मानव जन्म बार बार नहीं मिलता बड़ी मुश्किल से मिला हैं कई जीवो की योनियों को पार कर के इसे यु बर्बाद ना करिये | इस्लाम को छोडिये और वैदिक धर्मं को जानिए वापस अपने बाप दादाओ के धर्म को वापस आजाइए
गैर मुस्लिम देशो मे मुस्लिम लोग कुछ विशेष रणनीतियां
विश्वविख्यात विद्वान अली सीना के मुताबिक गैर मुस्लिम देशो मे मुस्लिम लोग कुछ विशेष रणनीतियां बनाकर रहते है :-
=================================
1) जिस देश मे यह रहते है उस देश के लिये ये जो थोडा बहुत
कुछ करते है तो उसका सारी जिंदगी बखान करते है और बदले मे
लगातार उसकी भारी कीमत वसूल कर उस देश को खोखला कर
देते है!
2) ये मौका मिलने पर अपने हालात के लिए देश की व्यवस्था को कोसते रहते है ,जबकि खुद इनके मुल्को का रिसर्च मे ,विज्ञान मे टैक्नोलोजी मे ,मेडिकल मे ,अंतरिक्ष अभियान मे ,जीडीपी मे ,सैन्य क्षमता और दूसरे मामलो मे रिकार्ड बेहद शर्मनाक है !
3) इनके पास हमेशा टकराव के लिए खास मुद्दे रहते है जैसे
भारत मे अयोध्या मुद्दा ,तो लंदन मे मिलेनियम डोम के पास
मस्जिद विवाद या अमेरिका मे ग्रांउड जीरो पे मस्जिद की मांग
या इजराइल के साथ विवाद !
4) जहा इनका 'पर्दाफाश' होता है वहा ये धमकी भी देते है
कि हिंदू मुस्लिम फसाद हो जायेगा और बाहर वालो को ईसाई-
मुस्लिम ,बौद्ध-मुस्लिम ,यहूदी-मुस्लिम और अपने यहा शिया-
सुन्नी कादियानी या अहमदिया का दंगा होने की धमकी !
5) गैर मुस्लिम मुल्को मे जहा इनकी जनसंख्या कम है
वहा भी अक्सर मुसलमानो के दिल का "इस्लामी बारूद"।
किसी न किसी बात पर.. किसी न किसी रूप
मे.,थोडा या ज्यादा ही सही पर फटता जरूर है !!
6) भले ही इनके मजहब की वजह से हमारे देश मे और दुनिया मे हजारो दंगे और आंतकवाद के मामले हो चुके हो .......लाखो लोग बेवजह मर चुके हो ..बहुत कुछ हो चुका हो !
और वर्तमान मे भी हर साल सैकडो दंगे फसाद के मामले आते हो
और आगे भी होते रहे ....
लेकिन बदले मे मुस्लिम कुतर्क करके उल्टा सामने वाले पर दोष डाल देते है ...
इस तरह ये हमेशा काफिरो को थकाकर और उलझा कर रखते है !
7) सच सामने आने पर मुस्लिमो के पास बहस के लिए हमेशा कुतर्क और घिसपिटे जवाब तैयार रहते है ,जैसे:-
-ये सिर्फ "कुछ" भटके हुये लोगो का काम
है ..blahblahblah...!
- इस्लाम इस की इजाजत नही देता इसलिए हमे इस्लाम को ठीक से समझना चाहिए blahblahblah...!
-बुरे लोग तो हर मजहब मे होते है blahblahblah...!...
-मुस्लिमो मे सुधार की जरूरत है ...सब लोग ऐसे
नही होते...अच्छे मुस्लिम भी होते हैblahblahblah...!
- पालिटिशयन और मीडिया मुसलमानो को बदनाम करना चाहते है:blahblah..!
ऐसे ही बहुत सारी घिसीपिटी दलीले लाखो बार देकर मुस्लिम दूसरो को अक्सर गुमराह करते रहते है !
8 ) मुस्लिम अपनी पत्रिकाओ और अपने अखबारो मे खुद को "मजलूम"और दूसरो को "जालिम" दिखाते देते रहते है!
और मौके पर हजारो की संख्या मे इस्लाम और शरिया कानून के
लिए मोर्चा और रैलिया वगैरह निकालते रहते है !
9) मुसलमानो द्वारा समय समय पर भाईचारा,सदभाव और
लुभावनी मीठी बाते करके हिंदुओ और गैरमुस्लिमो को "नींद
की गोली" दी जाती है ...
ताकि हिंदुओ और गैर मुस्लिमो का ध्यान मुसलमानो की पौपुलेशन
जो जिला ,शहरो के लेवल से लगातार बढती जा रही है ,उससे
वो बेखबर रहे और किसी का उस पर ध्यान न जाने पाए ..
10) ये इस्लाम के सिद्धातो की चमकदार मार्केटिंग करने लिए
जी जान से जुटे रहते है !
और अपने इस्लाम को चमकाने के लिए दूसरे मजहबो मे
लगातार कमियां निकालते रहते है!
11) लेकिन हद तो यहा है कि जिन किताबो को ये नही मानते
उन्ही किताबो मे ये अपने मोहम्मद जी को अवतार दिखाते है
और इस्लाम को जबरदस्ती विज्ञान से जोड़ते है !
मतलब किसी भी तरह से हर हाल मे इस्लाम और मौहम्मद
जी की मार्केटिंग करते रहते है !
12) ये अक्सर बोलते रहते है इस्लाम तेजी से फैल रहा है
लेकिन जैसे ही सच्चाई सामने लायी जाये तो ये चिल्ला भी पडते
है कि इस्लाम खतरे मे है !
13) जहा ये संख्या मे कम होते है वहा खुद को "मजलूम" और "ग़ुलाम" बता कर प्रोपेगंडा करते है और बाकी मजहब वालो को जालिम ठहरा देते है जैसे :-
१-इजराईल मे ---यहूदियो को जायनिस्ट ठहराना
२-अमेरिका मे--अमेरिकन्स को दहशतगर्द ठहराना
३- यूरोप मे----ईसाईयो को रासिस्ट ठहराना
४-भारत मे---हिन्दुओ को सांप्रदायिक ठहराना
५-बौद्ध देशो---बौद्धो को फासिस्ट ठहराना
जाहिर है ऐसा करके ये अगले पर मानसिक दबाब बनाने का प्रयास करते हैं ,ताकि अगला घबड़ाकर कर चुप हो जाये .....!
14) इस्लामीकरण को जारी रखने के लिए ये "इमोशनल"
प्रौपगेंडा भी करते है जिसके लिए ये अक्सर शेरो शायरी या कुछ
बोलबचन या फिल्मे या मुस्लिम मजहब से ताल्लुक रखने वाले
अभिनेता कलाकार ,संगीतकार ,पत्रकार ,खिलाड़ी वगैरह
या पुराने किस्सो का उदाहरण देते रहते है !
15) ये गैर मुस्लिमो पर "मानसिक दबाव" बनाते है इसके
लिए ये दूसरे मजहबो मे "सेकुलर" ढूंढ कर उनकी तारीफो के
पुल बाँध देते है:)) ताकि इनका इस्लामीकरण
का एजेंड़ा चलता रहे ....
16) इस तरह ये कभी हिंसा और अराजकता का डर दिखाकर
या इमोशनली मानसिक दबाव बनाकर दूसरो को उलझाये रखते
है और धीरे धीरे अपना इस्लामीकरण चालू रखते है!
17) और जो राष्ट्रवादी संगठन इनके इस्लामीकरण के अभियान
मे आड़े आते है ये उनके खिलाफ प्रोपगेंडा करते है ,
जैसे भारत के कुछ राष्ट्रवादी संगठनो के अलावा बाहर मे
English Defence League(EDL), SIOA ,SIOE ,Mossad
जैसे बड़े- बडे सैकड़ो राष्ट्रवादी संगठनो को ये मुस्लिम लोग जालिम और दहशतगर्द ठहरा देते है !
=================================
=>समाज मे आम धारणा है कि धमाके या दंगे फसाद करने वाले
मुस्लिम ही खतरा है ....
पर इस्लाम का प्रमुख उद्देश्य सभी गैर
मुस्लिमो को इस्लामी झंड़े और शरिया कानून के दायरे मे लाना
है और "इस इस्लामी मकसद को पूरा करने के लिये
धमाको की या किसी को मारने की पहली जरूरत नही है !"
इसलिए असली समस्या है वो करोडो मुस्लिम जो हमारे बीच
मे सामान्य रूप से रहते हुये मुस्लिम बच्चे पैदा करके
अपनी जनसंख्या मे इजाफा कर रहे है और
सारे सिस्टम को अपने काबू मे करते जा रहे है जो कि अत्यंत
गंभीर समस्या है !
=>इसलिए सारी दुनिया इस पुराने अरबी साम्राज्यवाद के
इस्लामीकरण के खतरे को जान चुकी है और इसके खिलाफ एकजुट
हो चुकी है !
आज चाहे जापान ,इजराइल जैसे छोटे देश हो या अमेरिका रूस ,आस्ट्रेलिया जैसे बडे देश ...कोई
भी देश अपनी संस्कृति ,अपनी पहचान ,अपनी विरासत की कीमत
पर समझौता नही करता !
=>इसलिए जरूरत अब हमे इमोशनल न होकर खुद को मजबूत और ताकतवर बनाने की है ...
क्योकि शांति तभी स्थायी हो सकती है ,जब हम.खुद को मजबूत बनाये और सेक्युलरिज्म की वजह से भावुक न होकर खुद को प्रैक्टिकल बनाए और हमेशा हर चीज के लिए तैयार रहे !
=================================
1) जिस देश मे यह रहते है उस देश के लिये ये जो थोडा बहुत
कुछ करते है तो उसका सारी जिंदगी बखान करते है और बदले मे
लगातार उसकी भारी कीमत वसूल कर उस देश को खोखला कर
देते है!
2) ये मौका मिलने पर अपने हालात के लिए देश की व्यवस्था को कोसते रहते है ,जबकि खुद इनके मुल्को का रिसर्च मे ,विज्ञान मे टैक्नोलोजी मे ,मेडिकल मे ,अंतरिक्ष अभियान मे ,जीडीपी मे ,सैन्य क्षमता और दूसरे मामलो मे रिकार्ड बेहद शर्मनाक है !
3) इनके पास हमेशा टकराव के लिए खास मुद्दे रहते है जैसे
भारत मे अयोध्या मुद्दा ,तो लंदन मे मिलेनियम डोम के पास
मस्जिद विवाद या अमेरिका मे ग्रांउड जीरो पे मस्जिद की मांग
या इजराइल के साथ विवाद !
4) जहा इनका 'पर्दाफाश' होता है वहा ये धमकी भी देते है
कि हिंदू मुस्लिम फसाद हो जायेगा और बाहर वालो को ईसाई-
मुस्लिम ,बौद्ध-मुस्लिम ,यहूदी-मुस्लिम और अपने यहा शिया-
सुन्नी कादियानी या अहमदिया का दंगा होने की धमकी !
5) गैर मुस्लिम मुल्को मे जहा इनकी जनसंख्या कम है
वहा भी अक्सर मुसलमानो के दिल का "इस्लामी बारूद"।
किसी न किसी बात पर.. किसी न किसी रूप
मे.,थोडा या ज्यादा ही सही पर फटता जरूर है !!
6) भले ही इनके मजहब की वजह से हमारे देश मे और दुनिया मे हजारो दंगे और आंतकवाद के मामले हो चुके हो .......लाखो लोग बेवजह मर चुके हो ..बहुत कुछ हो चुका हो !
और वर्तमान मे भी हर साल सैकडो दंगे फसाद के मामले आते हो
और आगे भी होते रहे ....
लेकिन बदले मे मुस्लिम कुतर्क करके उल्टा सामने वाले पर दोष डाल देते है ...
इस तरह ये हमेशा काफिरो को थकाकर और उलझा कर रखते है !
7) सच सामने आने पर मुस्लिमो के पास बहस के लिए हमेशा कुतर्क और घिसपिटे जवाब तैयार रहते है ,जैसे:-
-ये सिर्फ "कुछ" भटके हुये लोगो का काम
है ..blahblahblah...!
- इस्लाम इस की इजाजत नही देता इसलिए हमे इस्लाम को ठीक से समझना चाहिए blahblahblah...!
-बुरे लोग तो हर मजहब मे होते है blahblahblah...!...
-मुस्लिमो मे सुधार की जरूरत है ...सब लोग ऐसे
नही होते...अच्छे मुस्लिम भी होते हैblahblahblah...!
- पालिटिशयन और मीडिया मुसलमानो को बदनाम करना चाहते है:blahblah..!
ऐसे ही बहुत सारी घिसीपिटी दलीले लाखो बार देकर मुस्लिम दूसरो को अक्सर गुमराह करते रहते है !
8 ) मुस्लिम अपनी पत्रिकाओ और अपने अखबारो मे खुद को "मजलूम"और दूसरो को "जालिम" दिखाते देते रहते है!
और मौके पर हजारो की संख्या मे इस्लाम और शरिया कानून के
लिए मोर्चा और रैलिया वगैरह निकालते रहते है !
9) मुसलमानो द्वारा समय समय पर भाईचारा,सदभाव और
लुभावनी मीठी बाते करके हिंदुओ और गैरमुस्लिमो को "नींद
की गोली" दी जाती है ...
ताकि हिंदुओ और गैर मुस्लिमो का ध्यान मुसलमानो की पौपुलेशन
जो जिला ,शहरो के लेवल से लगातार बढती जा रही है ,उससे
वो बेखबर रहे और किसी का उस पर ध्यान न जाने पाए ..
10) ये इस्लाम के सिद्धातो की चमकदार मार्केटिंग करने लिए
जी जान से जुटे रहते है !
और अपने इस्लाम को चमकाने के लिए दूसरे मजहबो मे
लगातार कमियां निकालते रहते है!
11) लेकिन हद तो यहा है कि जिन किताबो को ये नही मानते
उन्ही किताबो मे ये अपने मोहम्मद जी को अवतार दिखाते है
और इस्लाम को जबरदस्ती विज्ञान से जोड़ते है !
मतलब किसी भी तरह से हर हाल मे इस्लाम और मौहम्मद
जी की मार्केटिंग करते रहते है !
12) ये अक्सर बोलते रहते है इस्लाम तेजी से फैल रहा है
लेकिन जैसे ही सच्चाई सामने लायी जाये तो ये चिल्ला भी पडते
है कि इस्लाम खतरे मे है !
13) जहा ये संख्या मे कम होते है वहा खुद को "मजलूम" और "ग़ुलाम" बता कर प्रोपेगंडा करते है और बाकी मजहब वालो को जालिम ठहरा देते है जैसे :-
१-इजराईल मे ---यहूदियो को जायनिस्ट ठहराना
२-अमेरिका मे--अमेरिकन्स को दहशतगर्द ठहराना
३- यूरोप मे----ईसाईयो को रासिस्ट ठहराना
४-भारत मे---हिन्दुओ को सांप्रदायिक ठहराना
५-बौद्ध देशो---बौद्धो को फासिस्ट ठहराना
जाहिर है ऐसा करके ये अगले पर मानसिक दबाब बनाने का प्रयास करते हैं ,ताकि अगला घबड़ाकर कर चुप हो जाये .....!
14) इस्लामीकरण को जारी रखने के लिए ये "इमोशनल"
प्रौपगेंडा भी करते है जिसके लिए ये अक्सर शेरो शायरी या कुछ
बोलबचन या फिल्मे या मुस्लिम मजहब से ताल्लुक रखने वाले
अभिनेता कलाकार ,संगीतकार ,पत्रकार ,खिलाड़ी वगैरह
या पुराने किस्सो का उदाहरण देते रहते है !
15) ये गैर मुस्लिमो पर "मानसिक दबाव" बनाते है इसके
लिए ये दूसरे मजहबो मे "सेकुलर" ढूंढ कर उनकी तारीफो के
पुल बाँध देते है:)) ताकि इनका इस्लामीकरण
का एजेंड़ा चलता रहे ....
16) इस तरह ये कभी हिंसा और अराजकता का डर दिखाकर
या इमोशनली मानसिक दबाव बनाकर दूसरो को उलझाये रखते
है और धीरे धीरे अपना इस्लामीकरण चालू रखते है!
17) और जो राष्ट्रवादी संगठन इनके इस्लामीकरण के अभियान
मे आड़े आते है ये उनके खिलाफ प्रोपगेंडा करते है ,
जैसे भारत के कुछ राष्ट्रवादी संगठनो के अलावा बाहर मे
English Defence League(EDL), SIOA ,SIOE ,Mossad
जैसे बड़े- बडे सैकड़ो राष्ट्रवादी संगठनो को ये मुस्लिम लोग जालिम और दहशतगर्द ठहरा देते है !
=================================
=>समाज मे आम धारणा है कि धमाके या दंगे फसाद करने वाले
मुस्लिम ही खतरा है ....
पर इस्लाम का प्रमुख उद्देश्य सभी गैर
मुस्लिमो को इस्लामी झंड़े और शरिया कानून के दायरे मे लाना
है और "इस इस्लामी मकसद को पूरा करने के लिये
धमाको की या किसी को मारने की पहली जरूरत नही है !"
इसलिए असली समस्या है वो करोडो मुस्लिम जो हमारे बीच
मे सामान्य रूप से रहते हुये मुस्लिम बच्चे पैदा करके
अपनी जनसंख्या मे इजाफा कर रहे है और
सारे सिस्टम को अपने काबू मे करते जा रहे है जो कि अत्यंत
गंभीर समस्या है !
=>इसलिए सारी दुनिया इस पुराने अरबी साम्राज्यवाद के
इस्लामीकरण के खतरे को जान चुकी है और इसके खिलाफ एकजुट
हो चुकी है !
आज चाहे जापान ,इजराइल जैसे छोटे देश हो या अमेरिका रूस ,आस्ट्रेलिया जैसे बडे देश ...कोई
भी देश अपनी संस्कृति ,अपनी पहचान ,अपनी विरासत की कीमत
पर समझौता नही करता !
=>इसलिए जरूरत अब हमे इमोशनल न होकर खुद को मजबूत और ताकतवर बनाने की है ...
क्योकि शांति तभी स्थायी हो सकती है ,जब हम.खुद को मजबूत बनाये और सेक्युलरिज्म की वजह से भावुक न होकर खुद को प्रैक्टिकल बनाए और हमेशा हर चीज के लिए तैयार रहे !
Sunday, October 13, 2013
मौलाना बदरुद्दीन अजमल
असम दंगो में मुसलमानों को मदद कर हिंदुओ को मारने और खदेडने वाले बदरुद्दीन अजमल ने हिंदुओ पर जबरदस्त हमला बोला है !
http://www.jagranjosh.com/ current-affairs/ assam-violence-hc-ordered-s tate-government-to-probe-r ole-of-badruddin-ajmal-137 0949205-1
“ हिंदुओ को सौदी अरेबिया, पाकिस्तान या 56 इस्लामी मुल्को में से कही पर भी चुनाव में वोट करने का अधिकार नहीं । में चुनौती देता हू, क्या किसी हिंदू में दम है की वो हिन्दुस्तान में हम मुसलमानों के वोटिंग करने पर पाबंदी लगाकर दिखाये ? ”
-- मौलाना बदरुद्दीन अजमल, लोकसभा सांसद, AIUDF, असम.
http:// www.dailymail.co.uk/ indiahome/indianews/ article-2192760/ Ajmal-blamed-Azad-Maidan-vi olence.html

http://www.jagranjosh.com/
“ हिंदुओ को सौदी अरेबिया, पाकिस्तान या 56 इस्लामी मुल्को में से कही पर भी चुनाव में वोट करने का अधिकार नहीं । में चुनौती देता हू, क्या किसी हिंदू में दम है की वो हिन्दुस्तान में हम मुसलमानों के वोटिंग करने पर पाबंदी लगाकर दिखाये ? ”
-- मौलाना बदरुद्दीन अजमल, लोकसभा सांसद, AIUDF, असम.
http://

कुरबानी जायज़ कैसे हुवी

इक दिन इब्राहीम की परीक्षा लेने के कारण
अलाह में इब्राहीम को अपनी सब से प्यारी चीज़ कुराबान करने कहा जिस से अलाह खुश हो जाए
---इब्राहीम ने पहले दिन १ ० ० ऊंट की कुर्बानी दी
----------अलाह खुश नहीं हुवा
फिर---
---इब्राहीम ने दुसरे दिन फिर से १ ० ० ऊंट की कुर्बानी दी
----------अलाह खुश नहीं हुवा
फिर---
---इब्राहीम ने तीसरे दिन फिर से १ ० ० ऊंट की कुर्बानी दी
----------अलाह खुश नहीं हुवा
**इसी से पता चलता है
**इसे से ही पता चलता है अलाह कितना जालिम है
**अलाह इब्राहीम को रोक सकता था
**जब के मुसलमान ही कहते ही की अलाह सब कुछ जाननेवाला है
**जो सब कुछ जाननेवाला है उसे क्यों पता नहीं चला की के इब्राहीम निर्दोष और बेजुबान जानवरों की हत्या कर देगा
**और उस तिन दिन की कुर्बानी अलाह खुश भी नहीं होगा तो कुर्बानी तो कुछ काम नहीं आयी
**फिर चोथे दिन इब्राहीम ने अपने बेटे इस्माइल की बलि देने को सोचा
**जब छुरी चलाने की कोशिश की तब अलाह ने छुरी से बात कर के छूरी को चलने से मना कर दिया
**हा हा हा हा हा
**अलाह छूरी से बात कर रहा था
**फिर अलाह ने इस्माइल के जगह पे इक दुम्बा (मेंढा) रख दिया और उसकी कुर्बानी हो गई
**और अलाह खुश हो गया के इब्राहीम मेरे लिए अपने बेटे तक की कुरबानी दे सकता है
**तो सवाल ये है की गाय बकरी को क्यों काटते हो
**अलाह को खुश करना है तो अपने अपने बेटो की गर्दने क्यों नहीं काटते
**दूसरा सवाल ये है की अगत अलाह छूरी से बात करके उसे रोक सकता था
तो
**तिन दिन जब इब्राहीम ऊंट काट रहा था तब क्या अलाह सो रहा था
**जब अलाह खुश नहीं होने वाला था तो उस वक़्त भी छुरी को क्यों नहीं रोका
**उन ऊँटो का पाप किस पे जाएगा इब्राहीम पे या अलाह पे
**सवाल ये भी परीक्षा इब्राहीम की थी तो अलाह खुश हुवा ना
**तो उसे रिवाज़ बनाकर क्यों जानवरों की ह्त्या करते आ रहे हो
**मुस्ल्मान कहते है कुरबानी अपने महनेट की पैसे की होनी चाहिए
**इब्राहीम कोनसी महेनत कर लाया था दुम्बा
**तो फिर कुरबानी जायज़ कैसे हुवी
Saturday, October 12, 2013
सुफियो द्वारा हिन्दुओ का इस्लामीकरण..
सुफियो द्वारा हिन्दुओ का इस्लामीकरण..
जब मुस्लिम बादशाह बलपूर्वक भारत के सभी हिन्दुओं को मुसलमान नहीं बना सके तो उन्होंने हिन्दुओं को इस्लाम के प्रति आकर्षित करने के लिए एक नयी तरकीब निकाली . सब जानते हैं कि इस्लाम में शायरी , हराम है , क्योंकि जब मुहम्मद साहब ने खुद को अल्लाह का रसूल घोषित कर दिया था तो अरब के लोग कुरान को मुहम्मद की शायरी कहते थे . और अरब के शायर कुरान का मजाक उड़ाते थे . इसी तरह इस्लाम में संगीत , गाना बजाना,वाद्ययंत्रों का प्रयोग करना भी हराम है ,क्योंकि यह हिदू धर्म में भजन कीर्तन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है .इसलिए चालाक मुसलमानों ने सोचा कि यदि संगीत के माध्यम से हिन्दुओं में इस्लाम के प्रति रूचि पैदा की जाये तो उनका धर्म परिवर्तन करना सरल होगा.इसका परिणाम यह हुआ कि कुछ हिन्दुओं ने तो मुसलमानों के आचार विचार , खानपान अपना लिए ,लेकिन मुसलमान हिन्दुओं से हमेशा दूरी बनाये रखे. फिर मुसलमानों ने एक ऐसी कृत्रिम वर्णसंकर "धर्मनिरपेक्षता" तहजीब बना डाली , जिसका नाम गंगाजमुनी तहजीब रख दिया . इसे हिन्दू मुस्लिम एकता ,प्रतीक बता दिया ,बाद में मुसलमानों और दोगले हिन्दुओं ने इसका नाम "धर्मनिरपेक्षता" का नाम दे दिया .मुस्लिम शासकों ने तो हिन्दुओं की खतना करा कर मुस्लमान बना दिया था .लेकिन इस "धर्मनिरपेक्षता" ने हिन्दुओं की खस्सी कर दी . जिस से उनमे अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध लड़ने की शक्ति समाप्त हो गयी .इसमे संगीत का भी बड़ा योगदान है ,जिसे"सूफी संगीत"कहा जाता है .मूर्ख हिन्दू अरबी फारसी जाने बिना ही इस संगीत को एकता का मानते हैं . भारत में इसे कव्वाली भी कहा जाता है .जिसका अविष्कार अमीर खुसरो ने किया था जो कट्टर हिन्दू विरोधी था .
7-अमीर खुसरो की धर्मनिरपेक्षता ?
इसका पूरा नाम "अबुल हसन यमीनुद्दीन ख़ुसरौ : ابوالحسن یمینالدین خسرو" था .इसका जन्म सन 1253 में उत्तर प्रदेश के शहर बदायूँ में हुआ था .इसके पिता का नाम अमीर सैफुद्दीन था. जो ईरान के बलख शहर से भारत में सैनिक बनने के लिए आया था .अमीर खसरो को संगीत शायरी का शौक था,लोग उसे "अमीर ख़ुसरौ दहलवी :امیر خسرو دہلوی "भी कहते थे .बड़े दुःख की बात है किजो लोग खसरो की बनायीं गजलों को सुन कर झुमने लगते हैं . और उसी को हिन्दू मुस्लिम एकता का साधन बताते हैं , वह नहीं जानते कि खुसरो संगीत से एकता नहीं नफ़रत फैलाता था . और एक क्षद्म जिहादी था , हमारे धर्मनिरपेक्ष शासकों द्वारा बहुधा प्रशंसित धर्मनिरपेक्ष अमीर खुसरो अपनी मसनवी" Qiranus-Sa'dain" में लिखता है-
जहां रा कि दीदम ईँ रस्म पेश ,
कि हिन्दू बुवद सैदे तुर्कां हमेश .1
अज बेहतरे निस्बते तुर्को हिन्दू ,
कि तुर्क अस्त चूँ शेर हिन्दू चूं आहू .2
जि रस्मे कि रफ्त अस्त चर्खे र वाँ रा ,
वुजूद अज पये तुर्क शुद हिंदुआं रा .3
कि तुर्क अस्त ग़ालिब बर ईशां चूँ कोशद ,
कि हम गीरद हम खरद औ हम फ़रोशद .4
अर्थात्'संसार का यह नियम अनादिकाल से चला आ रहा है कि हिन्दू सदा तुर्कों का अधीन रहा है. 1
तुर्क और हिन्दू का संबंध इससे बेहतर नहीं कहा जा सकता है कि तुर्क सिंह के समान है और हिन्दू हिरन के समान.2
आकाश की गर्दिश से यह परम्परा बनी हुई है कि हिन्दुओं का अस्तित्व तुर्कों के लिये ही है. 3
क्योंकि तुर्क हमेशा गालिब होता है और यदि वह जरा भी प्रयत्न करें तो हिन्दू को जब चाहे पकड़े, खरीदे या बेचे।' 4
अब हिन्दू समाज को खास तौर पर युवकों को गंभीरता से सोचना चाहिए कि वह सेकुलर बनकर इस्लाम के सेकुलर आतंकवाद के जाल में तो नहीं फसते जा रहे हैं . या सेकुलर बन कर गांधी , और अन्ना जैसे कायर बनना पसंद करेंगे जो भूख से मर जाने को ही हर समस्या का हल बताता है . या आप गुरु गोविन्द सिंह , शिवाजी , बोस , आजाद और ऊधम सिंह जैसे धार्मिक बनना पसंद करंगे और हाथ फ़ैलाने की जगह अपने अधिकार छीन लेंगे .और ईंट का जवाब पत्थर से देंगे .
याद रखिये धर्मनिरपेक्षता जिहाद का ही एक रूप है
मुसलमानों से जुड़े भ्रम और उनका पर्दाफाश !
मुसलमानों से जुड़े भ्रम और उनका पर्दाफाश !
Myths about Muslims exposed !
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
1. भ्रम: आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता ।
तथ्य: आतंकवाद का धर्म इस्लाम होता है । आतंकवादी मुसलमानों को जिन्दा छोड़ देते है और गैर-मुसलमानों को चुन चुन कर मारते है । जैसे केनिया और मुंबई का 26/11 का हमला ।
Proof: http://www.cbsnews.com/8301-202_162-57604591/al-shabab-says-it-singled-out-non-muslims-in-kenya-mall-attack/
http://aajtak.intoday.in/story/shopkeeper-gave-a-muslim-name-they-spared-him-1-743037.html
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
2. भ्रम: कोई धर्म आतंकवाद नहीं सिखाता ।
तथ्य: इस्लाम आतंकवाद की सीख देता है । कुरान सूरा 9, आयत 5 में स्पष्ट लिखा है की जो भी मुसलमान नहीं है उसे मार डालो । इस्लामी आतंकवादी यही कुरान का पालन कर रहे है ।
Proof: http://quran.com/9/5
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
3. भ्रम: मुसलमान गरीब और अनपढ़ होने से आतंकवाद में लिप्त है ।
तथ्य: ओसामा (इंजिनियर), ओवैसी (वकील), अफजल गुरु (डॉक्टर), हाफिज सइद (प्रोफ़ेसर) जैसे ज्यादातर आतंकी संपन्न और उच्च शिक्षित है । हिंदू, बौद्ध, सीख, इसाई धर्म में भी करोडो लोग गरीब और अनपढ़ है । क्या वे जेहाद, जनसंख्या विस्फोट, दंगे, बम धमाके करते है ?
http://frontpagemag.com/2010/wm-b-fankboner/the-educated-muslim-terrorist/
http://www.hindustantimes.com/India-news/NewDelhi/Professor-of-Hate-why-Hafeez-Saeed-is-mad-at-India/Article1-835588.aspx
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
4. भ्रम: एक के कारण सभी मुसलमानों को दोष देना गलत है ।
तथ्य: 99% आतंकवादी मुसलमान हि होते है । बाकी मुसलमान आतंकियों की सिर्फ दिखावे के लिए निंदा करते है और कुरान, ओवैसी, झाकिर नाईक, अफजल गुरु का समर्थन करते है ।
http://static.dnaindia.com/images/cache/1798194.jpg
http://www.thehindu.com/multimedia/dynamic/00635/20VBG_MIM_635985e.jpg
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
5. भ्रम: मुसलमान भी सेक्युलर होते है ।
तथ्य: मुसलमान अल्पसंख्यक होने पर सेक्युलरिजम का दिखावा करते है, लेकिन बहुसंख्यक होने के बाद वे गैर-मुस्लिमो कों मौत के घाट उतार देते है । जैसे की कश्मीर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, असम । विश्व के 56 मुस्लिम बहुल राष्ट्रों में से 1 भी देश 100% सेक्युलर नहीं !
http://img.modernghana.com/images/content/o63vm08llg_islam.jpg
http://www.israellycool.com/wordpress/wp-content/uploads/Saudi-Arabia-apartheid-road-sign-to-Mecca-non-Muslims.jpg

Myths about Muslims exposed !
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1. भ्रम: आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता ।
तथ्य: आतंकवाद का धर्म इस्लाम होता है । आतंकवादी मुसलमानों को जिन्दा छोड़ देते है और गैर-मुसलमानों को चुन चुन कर मारते है । जैसे केनिया और मुंबई का 26/11 का हमला ।
Proof: http://www.cbsnews.com/8301-202_162-57604591/al-shabab-says-it-singled-out-non-muslims-in-kenya-mall-attack/
http://aajtak.intoday.in/story/shopkeeper-gave-a-muslim-name-they-spared-him-1-743037.html
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2. भ्रम: कोई धर्म आतंकवाद नहीं सिखाता ।
तथ्य: इस्लाम आतंकवाद की सीख देता है । कुरान सूरा 9, आयत 5 में स्पष्ट लिखा है की जो भी मुसलमान नहीं है उसे मार डालो । इस्लामी आतंकवादी यही कुरान का पालन कर रहे है ।
Proof: http://quran.com/9/5
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3. भ्रम: मुसलमान गरीब और अनपढ़ होने से आतंकवाद में लिप्त है ।
तथ्य: ओसामा (इंजिनियर), ओवैसी (वकील), अफजल गुरु (डॉक्टर), हाफिज सइद (प्रोफ़ेसर) जैसे ज्यादातर आतंकी संपन्न और उच्च शिक्षित है । हिंदू, बौद्ध, सीख, इसाई धर्म में भी करोडो लोग गरीब और अनपढ़ है । क्या वे जेहाद, जनसंख्या विस्फोट, दंगे, बम धमाके करते है ?
http://frontpagemag.com/2010/wm-b-fankboner/the-educated-muslim-terrorist/
http://www.hindustantimes.com/India-news/NewDelhi/Professor-of-Hate-why-Hafeez-Saeed-is-mad-at-India/Article1-835588.aspx
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4. भ्रम: एक के कारण सभी मुसलमानों को दोष देना गलत है ।
तथ्य: 99% आतंकवादी मुसलमान हि होते है । बाकी मुसलमान आतंकियों की सिर्फ दिखावे के लिए निंदा करते है और कुरान, ओवैसी, झाकिर नाईक, अफजल गुरु का समर्थन करते है ।
http://static.dnaindia.com/images/cache/1798194.jpg
http://www.thehindu.com/multimedia/dynamic/00635/20VBG_MIM_635985e.jpg
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5. भ्रम: मुसलमान भी सेक्युलर होते है ।
तथ्य: मुसलमान अल्पसंख्यक होने पर सेक्युलरिजम का दिखावा करते है, लेकिन बहुसंख्यक होने के बाद वे गैर-मुस्लिमो कों मौत के घाट उतार देते है । जैसे की कश्मीर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, असम । विश्व के 56 मुस्लिम बहुल राष्ट्रों में से 1 भी देश 100% सेक्युलर नहीं !
http://img.modernghana.com/images/content/o63vm08llg_islam.jpg
http://www.israellycool.com/wordpress/wp-content/uploads/Saudi-Arabia-apartheid-road-sign-to-Mecca-non-Muslims.jpg

Friday, September 27, 2013
एक झटके में ही सीरिया में 2000 शांतिप्रिय लोगो की लाशे बिछ गयी

एक झटके में ही सीरिया में 2000 शांतिप्रिय लोगो की लाशे बिछ गयी ,,,,आजम खान सीरिया में कोई हिन्दू सन्गठन परिक्रमा करने नही गया था फिर भी वहाँ कुत्ते की तरह रोज मर रहे है
Tuesday, September 24, 2013
पैगंबर मोहम्मद की मां का नाम
नैरोबी हमला: चश्मदीदों के मुताबिक आतंकवादी लोगों से पैगंबर मोहम्मद की मां का नाम या फिर कुरान की आयतें पूछ रहे थे। न बताने पर उन्हें 'काफिर' बताकर AK-47 से मारा जा रहा था।


Monday, September 23, 2013
Sunday, September 22, 2013
'मुसलमान एक तरफ हो जाओ, हम सिर्फ काफिरो (गैर मुसलमानों) को मारने आए हैं।'

कुरान मे लिखी आयतो का पालन करने लिए घिनोना राक्षसी हमला
'मुसलमान एक तरफ हो जाओ, हम सिर्फ काफिरो (गैर मुसलमानों) को मारने आए हैं।'
नैरोबी. केन्या की राजधानी नैरोबी के एक शॉपिंग मॉल में शनिवार को हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों की तादाद 39 हो गई। हमले में 100 से ज्यादा घायल भी हुए हैं जिनका इलाज चल रहा है। चश्मदीदों के मुताबिक दस से ज्यादा आतंकियों ने मॉल में घुसते ही कहा, 'मुसलमान एक तरफ हो जाओ, हम सिर्फ गैर मुसलमानों को मारने आए हैं।' उसके बाद उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग की। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने हमलावरों के पास एके 47 तथा कई हथगोले देखे। हमलावरों ने कई लोगों को बंधक बना लिया जिन्हें छुड़वाने की कोशिशें देर तक जारी थीं।
केन्या के राष्ट्रपति ने एलान किया कि इस हमले में उनके कुछ नजदीकी रिश्तेदारों समेत 39 लोग मारे गए हैं। दो हमलावर भी मारे गए हैं। भारत सरकार ने इस हमले में दो भारतीय नागरिकों के मारे जाने और चार के घायल होने की पुष्टि की है। मारे गए भारतीय हैं - श्रीधर नटराजन (40 साल) और परमशु जैन (आठ साल)।
अल शबाब ने दी थी धमकी
हालांकि इस हमले की किसी गुट ने अभी तक जिम्मेदारी नहीं ली है। लेकिन 2011 में सोमाली आतंकी गुट अल शबाब ने धमकी दी थी कि वह केन्या में बड़े पैमाने पर हमले करेगा।
हमले का सीधा प्रसारण रुकवाया
सीएनएन ने बताया कि हमलावर मुसलमान हैं। सेना ने टीवी चैनलों से आग्रह किया कि वे इस हमले का सीधा प्रसारण न करें।
हमले में फंसे भारतवंशियों ने सुनाई खौफ की कहानी-
‘मैंने आतंकियों को एके-47 तथा हथगोलों के साथ देखा।’
-मनीष तुरोहित (18 साल का लड़का जो बच कर बाहर निकला और दो घंटे पार्किंग में छिपा रहा)
‘बंदूकधारी मेरे सिर में गोली मार रहा था लेकिन उसका निशाना चूक गया और मैं बच गया।’ -सुदजर सिंह (एक स्टोर का कर्मचारी)
From Denik Bhashkar & BBC News 22/09/2013
Friday, August 23, 2013
आखिर सीरिया में कत्लेआम क्यों मचा है ?
आखिर सीरिया में कत्लेआम क्यों मचा है ?? जबकि सीरिया में गरीबी बिलकुल नही है मित्रो, सीरिया की जनसंख्या में 80% सुन्नी मुसलमान है और सिर्फ 15% शिया मुसलमान है 5% अन्य जिसमे कुर्द, ईसाई आदि है | असद परिवार करीब ३० सालो से सीरिया पर शासन कर रहा है .. और ये असद परिवार शिया है | वर्तमान राष्ट्रपति डा.बशर अल असद लन्दन में आई सर्जन थे जो अपने पिता हाफिज अल असद के मृत्यु के बाद सीरिया लौट आये और शुरा के द्वारा राष्ट्रपति चुने गये | असल में सीरिया का बहुसंख्यक सुन्नी मुसलमान इसे अपना अपमान मानता है की एक अल्पसंख्यक शिया उनके उपर राज करे | जबकि असद परिवार को आज के सीरिया का कुशल शिल्पी माना जाता है .. असद परिवार ने सीरिया में कभी कट्टरपंथी कठमुल्लों को पनपने नही दिया और जितने भी कट्टरपंथी गुट से सबका खात्मा कर दिया, सीरिया की राजधानी दमिश्क जिसे अंग्रेजी में दमाश्क्स कहते है विश्व के खुबसूरत शहरों में सुमार हो गया था | सीरिया ओलिव ओयल, क्रुड, आदि चीजो का बड़ा उत्पादक बनकर उभरा था | फिर इजिप्त की क्रांति जिसमे लोगो ने होस्नी मुबारक हो सत्ता से बेदखल कर दिया उससे प्रेरणा लेकर सीरिया के कट्टरपंथी सुन्नी मुल्ले एकजुट होकर बशर के खिलाफ विद्रोह कर दिए | लेकिन मजे की बात ये की इस लड़ाई में ईरान सीरिया सरकार के साथ है और साथ ही लेबनान का हिज्बुलाह भी दो गुटों में बट गया . हिजबुल्लाह का शिया गुट बशर के साथ है | सीरिया की लड़ाई में अरब देशो के मुसलमानों में शिया सुन्नी को लेकर और ज्यादा कटुता बढने लगी है और जल्द ही ये लड़ाई पड़ोसी जार्डन को भी अपने चपेट में लेने वाली है लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर मुसलामन किसी देश में शांति से क्यों नही रहते ?? विश्व के हर ऐसे देश में जहाँ दंगे या लड़ाई होती है तो एक पक्ष मुस्लिम ही क्यों होता है ? सीरिया में इन्हें शिया का शासन स्वीकार नही है भारत में इन्हें हिन्दू का शासन स्वीकार नही है पाकिस्तान में इन्हें ताकतवर गुट पंजाबी सुन्नी का शासन स्वीकार नही है म्यांमार में इन्हें बौद्ध का शासन स्वीकार नही है चेचेन्या और लेबनान, बोस्निया, हर्जेगोविना, सर्विया में इन्हें ईसाई शासन स्वीकार नही है अफगानिस्तान में इन्हें दुसरे कबीले के मुसलमान का शासन स्वीकार नही है और मजे की बात ये की पुरे विश्व में सबसे खुशहाल और शांति से जिस भी देश में मुसलमान है वहाँ मुसलमान अल्पसंख्यक है ... लेकिन जिस देश में ये बहुसंख्यक है उस देश में दुसरे धर्मो के मानने वालो को खत्म कर देते है |
Tuesday, August 20, 2013
देश के हिन्दू कल भूखों मरेंगे ..


इस देश के हिन्दू कल भूखों मरेंगे ..
और उछल उछल के वोट दो ... जाति के नाम पर ... अहीर, दलित, ब्राह्मण, राजपूत, तेली, बनिया, कुर्मी, जाट, त्यागी गूजर के नाम पर
इस बाप बेटे की ...नमाजवादी पार्टी .... का असली खेल तो अभी शुरू हुआ है
केरल में इस्लामिक bank

केरल में इस्लामिक bank?
दैनिक भास्कर रायपुर 18-08-2013
Friday, August 9, 2013
शर्मनिरपेक्ष हिन्दू नेताओं


- क्या आपने कभी आज़म खान को "छठ पर्व" पर सूर्य को अर्घ्य देते देखा है?
- क्या आपने कभी अबू आज़मी को गणेश पंडाल में आरती गाते सुना या देखा है?
- क्या आपने कभी ओवैसी को "उगादि" पर चन्दन तिलक और लुंगी धारण किए हुए देखा है?
- क्या आपने कभी उमर अब्दुल्ला को नवरात्रि में वैष्णो देवी जाते देखा है?
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जालीदार टोपी धारण करके इफ्तार पार्टी में मुर्गे की टांग तोड़ने वाली "एकतरफा खुजली" सिर्फ "शर्मनिरपेक्ष हिन्दू नेताओं" में ही पाई जाती है...
(नोट :- इस एकतरफा "खुजली" से भाजपा के नेता भी मुक्त नहीं हैं).
पता नहीं इसे "संस्कार"(?) कहें, या "बीमार शिक्षा व्यवस्था" की देन कहें...
टोपी पहनने से धर्म नहीँ बदल जाता- रजा मुराद
वाह जनाब और आपका धर्म...???
1. वन्दे मातरम बोलने मेँ बदल जाता है।
2. तिलक लगाने मेँ बदल जाता है।
3. मन्दिर की घंटियोँ की आवाज से बदल जाता है।
4. हिन्दू त्यौहारोँ पर बजते भजनोँ से बदल जाता है।
रजा मुराद जी मोदी जी को राय देने के साथ साथ कभी कभी अपना मुह उमर अब्दुल्ला के लिए भी फाड़ा करे।। आज जम्मू में हजारो हिन्दुओं के घरो को जलाया गया।।कुछ की हत्या भी हुई जिसे सरकार छिपा रही।।
कश्मीर के भटके हुए नौजवानों ईद मनाने का ये कौन सा तरीका है ??या शांति का महिना रमजान बीतते ही पिछले माह का कोटा पूरा हो रहा है।।
जब उन जले हुए घरो के बारे में सोचता हूँ तो मेरी जबान ईद मुबारक बोलने से पहले लड़खड़ा जाती है।।
जय श्री राम इश्वर उन हिनू भाइयों को संघर्ष की प्रेरणा दे।
"किश्तवाड़ में ईद की नमाज के बाद एक समूह ने राष्ट्रविरोधी नारे लगाये" क्या यह "टोपी" पहनने वालों का विशेषाधिकार नही है, जो उन्हे "सेकुलरों" की ओर से दिया गया है? वैसे रजा मुराद से इस पर राय लेने की कोई पत्रकार हिम्मत करेगा?
आज के दिन 99.99 % हिन्दू ईद की बधाई जरूर देंगे..
लेकिन 99.99% मुस्लिम आज के दिन तीज की बधाई नहीं देंगे..
क्योकि इस्लाम के अनुसार ये कुफर बढ़ने का काम है और उन्होंने ऐसा किया तो उनका अल्लाह उन्हें दंड देगा ...
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और एक बात ये आकड़े 100 % सच होने के बावजूद भी 15 से 20 % हिन्दुओ को इसपे विशवास नहीं होगा..
Monday, August 5, 2013
जागो मेरे प्रिय देश भक्तों हमारी संस्कृति पर अत्याचार

जागो मेरे प्रिय देश भक्तों हमारी संस्कृति पर अत्याचार
किसी भी मुस्लिम देश में एक गैर मुस्लिम के साथ बेहद अपमानजनक, क्रूरतापूर्ण, हिंसक एवं अन्यायपूर्ण व्यवहार एक आम बात है लेकिन जहाँ भी मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं, इन्हे सिर पर नाचने वाले विशेषाधिकार चाहिए. मुस्लिम उत्पीड़न का रोना रोने वाले मुसलमानों से इसका उत्तर चाहूँगा.
Sunday, August 4, 2013
मुस्लिमों का दोगलापन

परन्तु दूसरे ही पल.... वे बाबर को अपना आदर्श बताने लगते हैं.... और बाबर द्वारा अतिक्रमण कर बनाये गए बाबरी मस्जिद के टूटने पर हल्ला मचाते हैं ... और, उसके टूटने का शोक भी मनाते हैं...!
मुस्लिमों का दोगलापन साबित करने के लिए ... पिग्गिस्तान का उदाहरण देना काफी होगा.... जो एक तरफ तो हमारे हिन्दुस्थान से रिश्ते सुधारने की बात करता है.... तो, दूसरी तरफ अपने मिसाइल का नाम "बाबर" रखा हुआ है...!
लेकिन... क्या सच में आप जानते हैं कि.......... बाबर कौन था...??????
जिस तरह कुत्तों को ...उसकी नस्ल देखकर पहचान की जाती है...... उसी प्रकार , मनुष्यों में उसके खानदान से उसके आचार-विचार और व्यवहार का पता लगता है...!
अतः... अगर नस्ल के आधार पर बाबर की बात की जाए तो..... बाबर एक मंगोल तुर्क लुटेरा था...
और.... अगर खानदान की बात की जाए तो.... यह कहने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए कि..... वो एक खानदानी लुटेरा था...... क्योंकि, बाबर ..... रिश्ते में लंगड़े तैमूरलंग का परपोता और चंगेज खान का नाती था...!
इतना ही नहीं.... बाबर "तैमूर वंश"" का होने पर गर्व था.... और, उसे इस बात का बहुत गर्व था कि.... उसका परदादा लंगड़ा तैमूरलंग एक बहुत बड़ा व्याभिचारी और लुटेरा था...!
बाबर का पूरा नाम .....ज़हिर उद-दिन मुहम्मद था...और उसके बाप का नाम ... उमर शेख मिर्जा तथा ... माँ का नाम कुतलुग निगार खानम था...!
चूँकि... उस समय, जब चागताई लोग असभ्य तथा असंस्कृत थे .... इसीलिए , उन्हे ज़हिर उद-दिन मुहम्मद का उच्चारण कठिन लगा.. तथा , उन्होंने इसका नाम बाबर रख दिया।
बाबर का जन्म ...14 फरवरी 1483 ईस्वी में फ़रगना घाटी के अन्दीझ़ान नामक शहर में हुआ था जो अब उज्बेकिस्तान में है।
बाबर का बाप शेख मिर्जा ... फरगाना घाटी का शासक था.... लेकिन, असामयिक मृत्यु के कारण सन् १४९४ में ११ वर्ष की आयु में ही बाबर फ़रगना घाटी के शासक का पद सौंपा गया.. परन्तु , उसके चाचाओं ने इस स्थिति का फ़ायदा उठाया और बाबर को गद्दी से हटा दिया.. जिस कारण कई सालों तक उसने निर्वासन में जीवन बिताया और लूटमार तथा चोरी चकारी कर....अपना जीवन यापन करने लगा...!
इसी तरह... वो अपने चोरों और लुटेरों के गिरोह को बढाता गया.... और, थोड़े ही समय में वो एक बड़ा लुटेरा बन बैठा .. तथा , फरगाना घाटी पर पुनः अधिकार कर लिया....!
परन्तु.... बाबर को हमेशा से लगता था कि.... दिल्ली सल्तनत पर फिर से तैमूरवंशियों का शासन होना चाहिए... और, एक तैमूरवंशी होने के कारण वो दिल्ली सल्तनत पर कब्ज़ा करना चाहता था।
इसीलिए... उसने सुल्तान इब्राहिम लोदी को अपनी इच्छा से अवगत कराया ... परन्तु , इब्राहिम लोदी के जबाब नहीं आने पर उसने भारत पर....छोटे-छोटे आक्रमण करने आरंभ कर दिए.. और, सबसे पहले उसने कंधार पर कब्ज़ा किया।
इधर शाह इस्माईल को तुर्कों के हाथों भारी हार का सामना करना पड़ा... और, इस युद्ध के बाद शाह इस्माईल तथा बाबर, दोनों ने बारूदी हथियारों की सैन्य महत्ता समझते हुए इसका उपयोग अपनी लुटेरी सेना में आरंभ किया।
इसके बाद उसने इब्राहिम लोदी पर आक्रमण किया.. और, पानीपत में लड़ी गई इस लड़ाई को पानीपत का प्रथम युद्ध के नाम से जानते हैं।
हालाँकि, बाबर की लुटेरी सेना इब्राहिम लोदी की सेना के सामने बहुत छोटी थी... परन्तु सेना में संगठन के अभाव में इब्राहिम लोदी यह युद्ध बाबर से हार गया... जिसके बाद दिल्ली की सत्ता पर बाबर का अधिकार हो गया और उसने सन 1526 में मुगलवंश की नींव डाली।
परन्तु.... उस समय राणा सांगा के नेतृत्व में राजपूत काफी संगठित तथा शक्तिशाली हो चुके थे... और, राजपूतों ने एक बड़ा-सा क्षेत्र स्वतंत्र कर लिया था तथा वे दिल्ली की सत्ता पर काबिज़ होना चाहते थे.... साथ ही, इब्राहिम लोदी से लड़ते-लड़ते बाबर की सेना को बहुत क्षति पहुँची थी..... जिस कारण , बाबर की सेना राजपूतों की आधी भी नहीं थी....जिस कारण.... राजपूतों से लड़ने के नाम पर ही बाबर के हाथ पैर कांपने लगते थे....!
जैसे -तैसे मार्च 1527 ईस्वी में खानवा की लड़ाई राजपूतों तथा बाबर की सेना के बीच लड़ी गई.. जिसमे , राजपूतों का जीतना निश्चित लग रहा था.. परन्तु, युद्ध के दौरान अं मौके पर तोमरों ने राणा सांगा का साथ छोड़ दिया और बाबर से जा मिले.. जिस कारण एक आसान-सी लग रही जीत उसके हाथों से निकल गई।
इसके एक साल के बाद किसी मंत्री द्वारा ज़हर खिलाने कारण राणा सांगा की मौत हो गई और बाबर का सबसे बड़ा डर उसके माथे से टल गया...... और, बाबर दिल्ली की गद्दी का अविवादित अधिकारी बन गया।
जहाँ तक बाबर के चाल-चलन की बात है तो..... बाबर एक ""गे"" और, उसे औरतों में कोई दिलचस्पी नहीं थी...!
हालाँकि, बाबर की शादी १५०० ईस्वी में ही आयशा से हो गयी थी.... फिर भी बाबर खुद ही लिखता है कि.... मैं उसके पास... 10 -15 या बीस दिनों में जाता था... और, मेरी माँ खानम मुझे बहुत दांत पर बीस पच्चीस दिनों में एक बार उसके पास भेजती थी...!
बल्कि... बाबर को कैम्प बाजार के एक सुन्दर से लड़के ""बाबरी"" से प्यार हो गया था...... और बाबर आगे लिखता है कि.... मैं उसका दीवाना था और उसके पीछे पागल था (बाबर नामा पृष्ठ 125 -126 ) ....
खैर... आगे बढ़ते हैं....
11 जुलाई 1526 ईस्वी को बाबर आगरा पहुंचा.... और वो लिखता है कि.... "" ईद के कुछ दिन पश्चात् एक बहुत बड़ी आलीशान दावत एक ऐसे विशाल कक्ष में हुई जो ....पाषण खम्भों के स्तम्भ पंक्ति से सुसज्जित है..और, जो सुल्तान इब्राहीम के पाषण प्रासाद के मध्य गुम्बद के नीचे है... ( जाहिर सी बात है कि.... वो मुमताज के 104 साल पहले ही .... ताजमहल का जिक्र कर रहा है ) { पृष्ठ 192 & 251 }
बाबर... हिन्दुस्थान में कितना लोकप्रिय था.... ये उसने खुद ही लिख छोड़ा है....
वो कहता है कि....मेरे ख़राब खानदान के कारण यहाँ के लीगों में मेरे प्रति पारंपरिक गुस्सा और विद्वेष है तथा... मुझे या मेरे लोगों को यहाँ के लोग देखना तक पसंद नहीं करते हैं जिस कारण मेरे लोगों और मेरे घोड़ों को खाना तक नहीं मिल पा रहा है.... . क्योंकि, लोगों ने बाबर के डर से पूरा आगरा ही खाली कर दिया था.. ( पृष्ठ 247 )
हालत ऐसी हो गयी थी कि.....बाबर के संगी साथी.... तेज धुप और भूख प्यास से व्याकुल होकर मरने लगे थे.... और, वापस जाने की सोचने लगे थे...
स्थिति के बारे में बाबर के साथ आये ख्वाजा कलां लिखता है....
""अगर मैं ठीक ठाक ढंग से सिंध पार कर सका तो... फिर यदि मैं हिन्द की चाहत करूँ तो मुझ पर लानत है...!""
खैर..... वे लोग वापस नहीं गए ... और, आस-पास के गाँव से खाना और जानवर लूट कर जैसे-तैसे अपना काम चलाते रहे ..
और... अंततः... अत्यधिक शराब पीने और, लौंडेबाजी के कारण ( शायद कोई गुप्त रोग भी हो ) ..... उस बाबर की 1530 ईस्वी में ... 48 साल साल की छोटी सी उम्र में आगरे की उस ताजमहल में ही मौत हो गई.... और, उसे वहीँ आगरे में ही दफना दिया गया... जिसके नौ बर्षों के बाद ... एक दूसरा कटुआ ... शेरशाह सूरी ने बाबर की इच्छानुसार उसे कब्र से निकाल कर.... उसे काबुल में दफनाया ...!
क्या आपको अभी भी लगता है कि.... बाबर जैसे नस्ल का आदमी किसी का आदर्श हो सकता है.... जिसे मुस्लिम अपना आदर्श बताते नहीं थकते हैं.... और, सेकुलर किस्म के मनहूस हिन्दू उनकी हाँ में हाँ मिलाते हैं...!
जागो हिन्दुओं .... और, अपनी अक्ल से काम से लो....
जय महाकाल...!!!
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