Friday, December 28, 2012


कोई माई का लाल सेकुलर हिंदू जो निम्न विडियो को देखने के बाद कहेगा कि मुसलमान शांति प्रिय है व हिंदू दंगाई. ये भी देखे की मुस्लमान क्या सोचता है अगर उनकी चली तो...

वक्त की जरुरत है कि हरेक हिंदू RSS से जुड़े और हिंदुस्तान को मजबूत करे..

http://www.4tvhyd.com/2012/12/mim-nizambad-jalsa-08-12-2012_481.html

भारत में मीडिया कितना स्वतंत्र हैं


भारत में मीडिया कितना स्वतंत्र हैं इसका एक नमूना......

१. आजतक के पत्रकार दीपक शर्मा ने कांग्रेसी खुर्शीद की चोरी का पर्दाफाश किया,..पर आजकल कहीं नज़र नहीं आ रहा पता नहीं इटालियन चुड़ैल ने कहाँ गायब गायब करवा दिया ?

साथ ही आजतक के एडिटर हेड ऍम.जे अकबर को भी आजतक से निकाल दिया गया है, क्योंकि उन्होंने खुर्शीद के पर्दाफाश को दिखाने की मंजूरी दी थी..

...मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है ?

२. जब से इंडिया गेट पर से IBN7 सीनियर संपादक आशुतोष ने यह खबर दी कि गेंगरेप के शांतिपूर्ण आन्दोलन को हिंसक बनाने में NSUI (कांग्रेस पार्टी की युवा शाखा) के सदस्यों का हाथ है, तब से वो भी IBN7 पर दिख नहीं रहे हैं यहाँ तक की उनका कार्यक्रम 'अजेंडा विथ आशुतोष' को भी उनके साथी पत्रकार संचालित कर रहे हैं....

...मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है ?

कल का मामला ले लीजिए इंडिया गेट पर पहुँचने का हंगामा हुआ था उसे किसी चैनल ने कवर नहीं किया क्योंकि सरकार से धमकी मिली हुई थी.....

तो मित्रों इससे साफ़ हैं कि मीडिया अपना काम करना चाहती है, पर उसे कांग्रेसी सरकार डरा- धमका कर अपने हित में काम करने पर मजबूर करती है, 

मीडिया को भी पता है कि अगर उन्होंने सरकार के विरुद्ध ज्यादा बोला तो उनका चैनल खतरे में पड़ सकता है, इसलिए वो सरकार से मोटा माल ले लेते हैं और सरकार के मुताबिक़ खबरें दिखाते हैं क्योंकि विरुद्ध में दिखाया तो सरकार चैनल बंध कर देगी तो इससे अच्छा है कि पैसा लो और समाचार दिखाओ,.. चैनल भी चलता रहेगा और पत्रकारों की रोजी- रोटी भी चलती रहेगी....

जब हम देशवासी ही अपनी आवाज़ सरकार के सामने ठीक से नहीं उठा सकते तो मीडिया को क्या दोष दें ..? जिस तरह नीच कांग्रेस सरकार जनता के आंदोलनों को कुचल देती है, या आवाज़ दबा देती है हिंसा से और गलत आरोपों और साजिशों से तो मीडिया की क्या औकात है ? 

जब कांग्रेस की चुड़ैल सोनिया बड़े- बड़े सड़कों पर हो रहे आन्दोलनों को दबबा सकती है, फिर कमरों और परदे के पीछे चल रहे इन मीडिया के मालिकों की गर्दन पकड़ने में कितनी देर लगाती होगी इटालियन डायन ???



इटालियन डायन भगाओ, देश बचाओ..
भारत में मीडिया कितना स्वतंत्र हैं इसका एक नमूना......

१. आजतक के पत्रकार दीपक शर्मा ने कांग्रेसी खुर्शीद की चोरी का पर्दाफाश किया,..पर आजकल कहीं नज़र नहीं आ रहा पता नहीं इटालियन चुड़ैल ने कहाँ गायब गायब करवा दिया ?

साथ ही आजतक के एडिटर हेड ऍम.जे अकबर को भी आजतक से निकाल दिया गया है, क्योंकि उन्होंने खुर्शीद के पर्दाफाश को दिखाने की मंजूरी दी थी..

...मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है ?

२. जब से इंडिया गेट पर से IBN7 सीनियर संपादक आशुतोष ने यह खबर दी कि गेंगरेप के शांतिपूर्ण आन्दोलन को हिंसक बनाने में NSUI (कांग्रेस पार्टी की युवा शाखा) के सदस्यों का हाथ है, तब से वो भी IBN7 पर दिख नहीं रहे हैं यहाँ तक की उनका कार्यक्रम 'अजेंडा विथ आशुतोष' को भी उनके साथी पत्रकार संचालित कर रहे हैं....

...मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है ?

कल का मामला ले लीजिए इंडिया गेट पर पहुँचने का हंगामा हुआ था उसे किसी चैनल ने कवर नहीं किया क्योंकि सरकार से धमकी मिली हुई थी.....

तो मित्रों इससे साफ़ हैं कि मीडिया अपना काम करना चाहती है, पर उसे कांग्रेसी सरकार डरा- धमका कर अपने हित में काम करने पर मजबूर करती है, 

मीडिया को भी पता है कि अगर उन्होंने सरकार के विरुद्ध ज्यादा बोला तो उनका चैनल खतरे में पड़ सकता है, इसलिए वो सरकार से मोटा माल ले लेते हैं और सरकार के मुताबिक़ खबरें दिखाते हैं क्योंकि विरुद्ध में दिखाया तो सरकार चैनल बंध कर देगी तो इससे अच्छा है कि पैसा लो और समाचार दिखाओ,.. चैनल भी चलता रहेगा और पत्रकारों की रोजी- रोटी भी चलती रहेगी....

जब हम देशवासी ही अपनी आवाज़ सरकार के सामने ठीक से नहीं उठा सकते तो मीडिया को क्या दोष दें ..? जिस तरह नीच कांग्रेस सरकार जनता के आंदोलनों को कुचल देती है, या आवाज़ दबा देती है हिंसा से और गलत आरोपों और साजिशों से तो मीडिया की क्या औकात है ? 

जब कांग्रेस की चुड़ैल सोनिया बड़े- बड़े सड़कों पर हो रहे आन्दोलनों को दबबा सकती है, फिर कमरों और परदे के पीछे चल रहे इन मीडिया के मालिकों की गर्दन पकड़ने में कितनी देर लगाती होगी इटालियन डायन ???



इटालियन डायन भगाओ, देश बचाओ..
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Thursday, December 27, 2012

 क्या लड़की के बलात्कार का विरोध करना भी धर्मनिरपेक्षता की मजबूत दीवार के लिए खतरा होता है। देश से तथाकतिथ सेकुलर लेखक जैसे -
श्री सुभाष गातड़े
सुश्री अरुन्धिता रॉय।
श्री महेश भट्ट
श्रीमति शबाना आजमी
श्री मति तीस्ता सीतलवाद
श्री तरुण तेजपाल
श्रीमती अरुणा रॉय
श्रीमती अनु आगा
श्री एन राम
श्री रामचंद गुहा
श्री सीताराम येचुरी
सुश्री मेधा पाटेकर
श्री उदित राज
श्री जॉन दयाल
श्री हर्ष मंदर
यह लोग तो वो लोग है जी किसी पार्टी विशेष से जुड़े नहीं है (जहाँ तक मेरी जानकारी है), फिर क्यूँ अपनी आवाज इस मुद्दे पर यह नहीं उठाते। या सिर्फ यह "दंगे" स्पेसलिस्ट है । केवल और केवल इनका काम एक वर्ग विशेष का ही विरोध करना है। सरकार का अन्याय के लिए विरोध करना इनकी प्राथमिकता नहीं है। क्या हो यह ही कृत्य यदि किसी धर्म विशेष ने किसी धर्म विशेष के साथ कर दिया होता। क्यां कोई विशेष राजनितिक दल के आकाओं को खुश करना ही इनकी लेखनी का उदेश्ये है। आका तो एक विभाग को दुसरे विभाग से, जनता के एक वर्ग को दुसरे से, धर्म को एक से दुसरे धर्म को लड़ाने में परांगत है। तो इन तथाकथित सेक्युलर लेखको ने अपनी कलम और जबान भी सत्ता के ठेकेदारों को गिरवी रख दी है।

क्या यह भाड़े के टट्टू है जो अपनी सारी  उर्जा झूटे  "सेकुलारिसम" के लिए बचा कर रखते है। परन्तु सेक्युलर लोगो के उत्पीडन पर चुप्पी। सिर्फ यह लोग सेक्युलर व्यवस्था चाहते है या व्यवस्था में रहेने वाले लोगो का भी समर्थन करेंगे। क्या सेक्युलर देश ईट  और गारे का बनायेंगे। देश की  गरीब लड़की जो बलात्कार की शिकार है जिसके लिए हिन्दुस्तान की आम जनता लाठी और गोली खा रही है। उनके लिए इनके पेन में सियाही नहीं है।

अमन कि आशा वाले सिर्फ देश के बहार ही अमन चाहते है देश के अन्दर अमन की उनकी कोई चाह नहीं है।

क्या बलात्कार पीडिता के लिए न्याय मांगना और स्त्री सुरक्षा के लिए अच्छे कानून की गुहार करना राजनीती है। या इसके खिलाफ आवाज न उठाना राजनीती है और झूटे सेकुलारिसम की जड़ो को मजबूत करना है।

बलात्कार पीड़ित लड़की न हिन्दू है  और न मुसलमान तो फिर इस बात पर यह तथाकथित बुद्धिजीवी अपने कलम क्यूँ नहीं घिसते ?

मित्रो यदि मुझ से कुछ नाम इन तथाकथित बुधिजीविओ में छुट गए हो तो आप जोड़ दे और प्रार्थना करे की सेक्युलर लोगो की पीड़ित जनता के लिए भी टियूब लाइट जले।



रेलवे के किसी भी कर्मचारी के कार्य में बाधा डालने पर होता है कारावास ................
रेलवे अधिनियम के तहत क्या उत्तर प्रदेश के केविनेट मंत्री आज़म खां को होगा कारावास ? ? .... 
... अब कहाँ गए वो भांड मीडिया चेनल बाले .............. कहाँ गया सोनिया का पालतू कुत्ता केजरीवाल ...................... कोई भी हल्ला गुल्ला क्यों नही कर रहा है ............... कोई भी आज़म खां से इस्तीफे की मांग क्यों नहीं कर रहा है ................... आज़म खां एक मुसलमान है और कांग्रेस के सहयोगी दल ............... सपा के मुसलमान वोट बेंक का एक मुख्य स्तम्भ है इसलिए ............... अगर भाजपा का कोई नेता आज़म खां जैसी हरकत करता तो सारे देश में हो हल्ला मच जाता ................... आज़म खां ने अमृतसर -हावड़ा मेल कोच के कंडेक्टर को .................. रामपुर स्टेशन के पास बुरी तरह से मारा पीटा और ............. कान पकड़ कर उठा बैठक लगवाई ............... कंडेक्टर पं. बंगाल निवासी निर्मल मुर्मू ने .............. आज़म खां के खिलाफ अमृतसर जीआरपी थाने में शिकायत दर्ज करवायी है ........... आओ हम फेस बुक बाले मिलकर इस केस को हाई लाईट करदे ................. इसको इतना शेयर करिए कि मीडिया चेनल बाले भी सोचने पर मजबूर हो जायें .................. भारत माता की जय ........



डॉ स्वामी ने जनता से अपील की है कि आप कम्युनल Violence बिल को लेकर पुलिस स्टेशन जाये और वहाँ जाकर कहें कि सोनिया के खिलाफ सेक्शन 153'A', 153'B', 295'A', 505'2'में अपराधी है इसलिए उसके खिलाफ FIR रजिस्टर करिए।

पुलिस की हिम्मत नहीं होगी FIR दर्ज करने की और वो दर्ज करने से मना कर देंगे, वो ना लिखित में लेकर आ जाइये।

मुझे 200 नाम लिखित में मिल जायेंगे तो मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा और कहूँगा की आदेश दीजिये पुलिस स्टेशन को की वो सोनिया गाँधी के खिलाफ FIR रजिस्टर करें।
http://www.youtube.com/watch?v=HcOjYwmGEKY

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Tuesday, December 25, 2012

सेकुलर बताने वाले भारतीय नागरिको


(यह लेख स्वयं को सेकुलर बताने वाले भारतीय नागरिको के लिए ही है. कृपया इस देश के बहुसंख्यक सेकुलर एक बार अवश्य पढ़े. और विचार करे कि जो कुछ भी मीडिया गुजरात के बारे में दिखता है क्या वो ही पूरा सच है? क्या इस देश में कुछ और भी सच है जो हमारा तथाकथित "स्वतंत्र" मीडिया नहीं दिखता.)


चारो ओर "अल्लाह हु अकबर" की आवाजे थी......भय से काँप रहा कभी **सेकुलर** रहा एक हिन्दू परिवार कमरे मे खुद को बंद करके खाली हाथ बैठा था......पति, पत्नी और एक सोलह साल की बेटी, एक दस साल का बच्चा....
अधिक समय नहीं लगा, तोड़ दिया दरवाजा हैवानो ने....घुस आए कमरे में... होने लगे चारो ओर से तलवारों के वार...

बाप, बेटे और माँ को अधमरा करके एक तरफ फेका, और लड़की के कपड़े फाड़कर कई दरिंदे एक साथ टूट पड़े उस पर...अपनी ही आंखो के सामने ये देखकर बाप ने खुद तलवार घोंप ली अपने पेट मे.....माँ के सामने बेटी के साथ एक एक करके बीस से ज्यादा नरपिशाचो ने दुष्कर्म किया......वो बेचारी धरती पर पड़ी चीखती रही...बिलखती रही, चिल्लाती रही, तड़पती रही...दुष्कर्म के पश्चात उसकी छातियाँ काट कर अल्लाह की मोहर भी दाग दी.....उसी अल्लाह की जिसमे यही नीच सेकुलर हमारे राम और कृष्ण के रूप देखता है..........काट डाली बेटे की गर्दन .... इसके बाद वो घर से बाहर निकले और जला दिया घर........पूरा परिवार ऐसी दुर्गति के बाद जिंदा जलकर खाक हो गया .......

कैसा लगा? ये कोई मार्मिक कपोल काल्पनिक कहानी नहीं है.....कश्मीर के एक पीड़ित और जिंदा बचे हिन्दू की, जो कि उसी मोहल्ले मे रहता था ........उसकी पुस्तक "कश्मीर का सच" से लेकर अपने शब्दो मे लिखी गयी एक सच्ची घटना है...

जब एक धर्मनिरपेक्षी राष्ट्र होकर भी भारत की सरकार,भारत के ही एक अंग कश्मीर मे हिन्दुओ को बचाने को आगे नहीं आई..... तो फिर इस राष्ट्र के इस्लामिकरण के पश्चात, कौन बचाने आएगा तुम्हें????

पूरा परिवार की ऐसी दुर्गति के बाद जिंदा जलकर खाक होने में लगा समय........केवल कुछ मिनट .........इस काम में मुल्लो की तैयारी में लगा समय....१४०० साल ......और हिन्दू को जागने में लगा समय.....आज तक नहीं जागा......

अगर तुम आज धर्म की ओर से, राष्ट्र की ओर से, गोमाता के ओर से मुंह छिपाए बैठे हो... तो गोमाता के आँसूओ और उनकी चीखो से बने कोप को तुम्हारी दुर्गति, तुम्हारा विनाश करने से कोई नहीं रोक सकता...

अब तुम खुद सोच लो.... तुम्हें खुद को अपने घरवालो को एक सुरक्षित राष्ट्र, अच्छा जीवन, और स्वर्णिम भविष्य देना है या ऐसा दर्दनाक अंत.....
तो उठो जागो हम मिलकर देखेंगे कौन सी नबी की औलादे इतनी ताकत, हिमाकत करेंगी... जो हमारे होते हुये इस राष्ट्र के मुस्लिमिकरण का विचार भी मन मे लाये........

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नई दिल्ली।। कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि 1984 के सिख दंगों में सज्जन कुमार का हाथ था। सीबीआई ने कहा कि सज्जन कुमार ने उस वक्त भीड़ को उकसाकर दिल्ली छावनी इलाके में हत्याएं कराई थीं।

एक टीवी रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीबीआई ने कहा है कि सज्जन ने भीड़ से कहा था कि एक भी सिख जिंदा नहीं बचना चाहिए। सबको मार डालो।

साथ ही सीबीआई ने कहा है कि उस वक्त एक खास समुदाय के लोगों को टारगेट किया गया। पूरा दंगा संगठित तरीके से अंजाम दिया गया। इसमें सरकार और पुलिस दोनों का समर्थन था।

गौरतलब है कि इससे पहले भी सीबीआई ने अदालत को बताया था कि दंगों के समय पुलिस ने अपनी आंखें बंद कर ली थी। दिल्ली के छावनी इलाके में 6 सिखों की हत्या के मामले में सज्जन कुमार और 5 अन्य बलवान खोखर, किशन खोखर, महेंद्र यादव, गिरधारी लाल और कैप्टन भागमल पर मुकदमा चल रहा है। (साभार: नवभारत टाइम)

http://navbharattimes.indiatimes.com/pmarticleshow/12839027.cms
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"आपने अक्सर नोट किया होगा कि 1984 के सिख विरोधी हिंसा को "दल्ला मीडिया" "सिख विरोधी दंगा" कहता है, जबकि गुजरात में 2002 के दंगों को "गुजरात नरसंहार" कहा जाता है… सरकारी आँकड़ों के अनुसार दिल्ली में 1984 में 3000 से अधिक सिख मारे गए, जबकि "अन्य" के मारे जाने का कोई विशेष आँकड़ा उपलब्ध नहीं है… दूसरी तरफ़ 2002 की गुजरात हिंसा में लगभग 400 मुसलमान और 150 हिन्दू मारे गए, जिसमें से बड़ी संख्या पुलिस की गोली से मरने वालों की भी थी… कश्मीर में 50,000 से अधिक मारे गए और 3 लाख से अधिक भगाए गए हिन्दुओं की किसी गिनती में ही नहीं हैं, न "दंगों" में और न ही "नरसंहार" में…

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इसका अर्थ है कि मीडिया में इतने "अनपढ़" बैठे हैं जिन्हें हिंसा, दंगा और नरसंहार में अन्तर भी नहीं पता???
 — with Andrei Azsacra, Man Singh Pawar, Pankaj Ch

सेक्युलर नहीं सनातनी हिन्दू बनो


मित्रो .....जय श्री राम

मैंने कभी किसी ईसाई को मंदिर या मस्जिद में जाते नहीं देखा
कभी किसी मुस्लिम को मंदिर या गिरिजाघर में जाते नहीं देखा
कभी भी किसी मुस्लिम को सर पर तिलक या जय श्री राम कहते नहीं सुना
किसी ईसाई या मुस्लिम के घर पर दिवाली के दीपक जलते नहीं देखे
अगर सर्व धर्म समभाव है ..
तो क्या सिर्फ हिन्दुओ के लिए ही सर्व धर्म समभाव है !
क्यूँ हम लोग हैप्पी क्रिसमस और ईद मुबारक कहते है ....?
क्या हिन्दू धर्म में त्योहारों की कमी है ?
सेक्युलर नहीं सनातनी हिन्दू बनो


शायद हिन्दू कुछ ज्यादा ही इमोशनल होते है ...उसी का फायदा आज ईसाई और मुस्लिम उठा रहे है

आप क्या सोचते हे की "सांता" नाम का जोकर आप के घर आएगा और आप की इच्छापूर्ति करेगा ......
.. अगर सांता वास्तव में होता तो ईसामसी सूली पर नहीं चढाया जाता और दुराचारियो की सजा देता ......
वेसे भी ईसाई लोग दुनिया को बेवकूफ बनाने में माहिर हे इसीलिए "सांता" नामक अंटा लोगो के दिमाग में घूमता हे ...........
मेरा मानना हे शायद आप तो बेवकूफ नहीं हे ...

मुझे एक बात अभी तक समझ नहीं आई कि........
ना तो WISH करने वाला ईसाई.... ना ही जिसको WISH किया जा रहा है.... वो ईसाई है.....
फिर, ""बेगानी शादी में अब्दुल्ला बेगाना"" की तर्ज पर ......
हिन्दू आपस में ही ""मेरी क्रिसमस और तुम्हारी क्रिसमस"""
जैसी फालतू की नौटंकी कर ......
खुद को ज्यादा सभ्य (????)... साबित करने में क्यों जुटे हैं....???????


ऐसे लोगों को ......
अपनी जन्माष्टमी, भैया दूज या राम नवमी .....
जैसे पवित्र पर्व ना तो याद रहते हैं.....
ना ही ये अपने खुद के वैज्ञानिक और हर्षो उल्लास के पर्व पर.....
अपने सम्बन्धियों अथवा मित्रों को
शुभकामनाएं देने की जरुरत महसूस करते हैं........
लेकिन मजे की बात है कि.....
ऐसे मनहूस .... क्रिसमस , ईसाईयों का नया साल ......
या फिर ईद की मुबारकवाद देना कभी नहीं भूलते हैं...!

शायद....
ऐसे लोगों की रगों में किसी हिन्दू का नहीं....
बल्कि.... किसी ईसाई या मुस्लिम का खून दौड़ रहा है......
या फिर, इनके पूर्वजों पर अंग्रेजों और मुगलों ने इतने अहसान किये हैं कि......
ये ऐसी शुभकामनाएं देकर ....
अभी तक उनके नमक का कर्ज अदा कर रहे हैं...!

ऐसे सेक्यूलर मानसिकता के लोग.....
हमारे समाज में एक कोढ़ के समान हैं....
जो, हमारे गौरवशाली हिन्दू धर्म को....
दीमक की तरह अन्दर ही अन्दर खोखला किये जा रहे हैं...!

Monday, December 24, 2012

ये क्यों है भाई

संविधान के अनुच्छेद 30 (A) के अनुसार गीता रामायण की शिक्षाएं विद्यालयों में पढ़ाना प्रतिबंधित है, जबकि मदरसों में कुरान और चर्चों में बाइबल की शिक्षाएं दी जाती हैं l और इसी का कारण है की 99.99% मुस्लिम उर्दू, अरबी, फारसी में कुरान पढ़ते हैं … परन्तु 99.99% हिन्दुओं ने कभी अपने धर्म-ग्रन्थ छुए भी नहीं होते l

Sunday, December 23, 2012

शाहबानो प्रकरण

शाहबानो प्रकरण
http://hi.wikipedia.org/s/1t9

शाह बानो प्रकरण भारत में राजनीतिक विवाद को जन्म देने के लिये कुख्यात है। इसको अक्सर राजनैतिक लाभ के लिये अल्पसंख्यक वोट बैंक के तुष्टीकरण के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
 
कानूनी विवरण

शाह बानो एक ६२ वर्षीय मुसलमान महिला और पाँच बच्चों की माँ थीं जिन्हें १९७८ में उनके पति ने तालाक दे दिया था। मुस्लिम पारिवारिक कानून के अनुसार पति पत्नी की मर्ज़ी के खिलाफ़ ऐसा कर सकता है।

अपनी और अपने बच्चों की जीविका का कोई साधन न होने के कारण शाह बानो पति से गुज़ारा लेने के लिये अदालत पहुचीं। उच्चतम न्यायालय तक पहुँचते मामले को सात साल बीत चुके थे। न्यायालय ने अपराध दंड संहिता की धारा १२५ के अंतर्गत निर्णय लिया जो हर किसी पर लागू होता है चाहे वो किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय का हो। न्यायालय ने निर्देश दिया कि शाह बानो को निर्वाह-व्यय के समान जीविका दी जाय।

भारत के रूढ़िवादी मुसलमानों के अनुसार यह निर्णय उनकी संस्कृति और विधानों पर अनाधिकार हस्तक्षेप था। इससे उन्हें असुरक्षित अनुभव हुआ और उन्होंने इसका जमकर विरोध किया। उनके नेता और प्रवक्ता एम जे अकबर और सैयद शाहबुद्दीन थे। इन लोगों ने ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड नाम की एक संस्था बनाई और सभी प्रमुख शहरों में आंदोलन की धमकी दी। उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनकी मांगें मान लीं और इसे "धर्म-निरपेक्षता" के उदाहरण के स्वरूप में प्रस्तुत किया।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया

१९८६ में, कांग्रेस (आई) पार्टी ने, जिसे संसद में पूर्ण बहुमत प्राप्त था, एक कानून पास किया जिसने शाह बानो मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय को उलट दिया। इस कानून के अनुसार (उद्धरण):
 "हर वह आवेदन जो किसी तालाकशुदा महिला के द्वारा अपराध दंड संहिता १९७३ की धारा १२५ के अंतर्गत किसी न्यायालय में इस कानून के लागू होते समय विचाराधीन है, अब इस कानून के अंतर्गत निपटाया जायेगा चाहे उपर्युक्त कानून में जो भी लिखा हो"
क्योंकि सरकार को पूर्ण बहुमत प्राप्त था, उच्चतम न्यायालय के धर्म-निरपेक्ष निर्णय को उलटने वाले, मुस्लिम महिला (तालाक अधिकार सरंक्षण) कानून १९८६ आसानी से पास हो गया।

इस कानून के कारणों और प्रयोजनों की चर्चा करना आवश्यक है। कानून के वर्णित प्रयोजन के अनुसार जब एक मुसलमान तालाकशुदा महिला इद्दत के समय के बाद अपना गुज़ारा नहीं कर सकती है तो न्यायालय उन संबंधियों को उसे गुज़ारा देने का आदेश दे सकता है जो मुसलमान कानून के अनुसार उसकी संपत्ति के उत्तराधिकारी हैं। परंतु - अगर ऐसे संबंधी नहीं हैं अथवा वे गुज़ारा देने की हालत में नहीं हैं - तो न्यायालय प्रदेश वक्फ़ बोर्ड को गुज़ारा देने का आदेश देगा। इस प्रकार से पति के गुज़ारा देने का उत्तरदायित्व इद्दत के समय के लिये सीमित कर दिया गया।

Azad Madin vs Delhi


वर्ल्ड मुस्लिम अल्पसंख्य समुदाय के अध्यक्ष

दिनाक - २३-१२-२०१२ 

वर्ल्ड मुस्लिम अल्पसंख्य समुदाय के अध्यक्ष, कुवैत के शेख अल सईद युसूफ सयेद हासिम रिफाई को केरल में बिना वीजा के आने कि अनुमति दी गयी थी और उन्हें गिर्गिराफ्तर नही किया गया बल्कि केरल सर्कार के सरकारी दामाद की तरह खातिरदारी कि गयी और लेजाने लाने के लिए सरकारी कार कि व्यवस्था कि गयी थी | क्या यह राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाला कार्य है ?

Saturday, December 22, 2012

Hazz me sabsidy

सेक्यूलर नामक जीव कैसे तैयार किया जाता है.


क्या आप जानते हैं कि ...... सेक्यूलर नामक जीव कैसे तैयार किया जाता है....????

दरअसल.... हम हिन्दुओं का इतिहास काफी गौरवशाली है..... और, ये ईसाई... तथा .... इस्लाम-फिस्लाम ..... हमारे गौरवशाली हिन्दू धर्म के सामने..... "धूल बराबर भी नहीं" हैं...!

इसीलिए .... हरामी सेक्युलरों और देश के गद्दारों द्वारा..... ये महसूस किया गया कि...... जब तक हिन्दू अपने गौरवशाली इतिहास से अवगत रहेंगे ..... तक तक हिन्दुओं को सेक्यूलर नामक नपुंसक बनाना नितांत असंभव है..!

इसीलिए...... ऐसे गद्दारों ने ..... हमारे स्कूलों के पाठयक्रम को अपना
सबसे मजबूत हथियार बनाया.... ताकि.... हम हिन्दुओं के मन में बचपन से ही हीन भावना भरी जा सके.... और, धीरे धीरे ..... सेक्यूलर नामक नपुंसक हिन्दू में परिवर्तित कर दिया जाए...!

इस तरह... करते-करते .... आज स्थिति इतनी दयनीय हो गयी है कि....... हिन्दू संस्कारों , और ... धर्म की बात करने पर..... विधवा प्रलाप करने वाले.... तथा, बात-बात पर छाती कूटने वाले ..... सेक्यूलर लोग एवं मीडिया ..... इस बात पर कभी भी छाती कूटते नजर नहीं आते हैं ..... जब हमारे माननीय प्रधानमंत्री विदेश के कांफ्रेंस में जाकर मंच पर यह बयान देते हैं कि...... ""हम भारतीय तो पहले जंगली थे.... और, हम अंग्रेजों के बहुत आभारी हैं.., जिन्होंने हमें गुलाम बनाकर.... हमें सभ्यता सिखलाई...!""

आप खुद ही देखें कि..... हरामी सेक्युलरों और देश के गद्दारों द्वारा..... हमारे स्कूलों में .... कैसी शिक्षा दी जा रही है .... और, कैसे धीरे-धीरे उन्हें हिंदुत्व से दूर करते हुए.....उनमे हीन भावना भर कर..... उन्हें सेकुलर नामक नपुंसक जीव बनाया जा रहा है...!

क्या कोई सेक्यूलर या बुद्धिजीवी ... मुझे इन बातों का तर्कसंगत जबाब दे दे सकता है कि..... ऐसा क्यों है.....??????

1. जो जीता वही चंद्रगुप्त ना होकर... जो जीता वही सिकन्दर """कैसे"""" हो गया... ???
(जबकि ये बात सभी जानते हैं कि.... सिकंदर को चन्द्रगुप्त मौर्य ने .. बहुत ही बुरी तरह परास्त किया था.... जिस कारण , सिकंदर ने मित्रता के तौर पर अपने सेनापति सेल्युकश कि बेटी की शादी चन्द्रगुप्त से की थी)

2. महाराणा प्रताप ""महान""" ना होकर......... अकबर """महान""" कैसे हो गया...???
(जबकि, अकबर अपने हरम में हजारों हिन्दू लड़कियों को रखैल के तौर पर रखता था.... जबकि.. महाराणा प्रताप ने..... अकेले दम पर उस अकबर के लाखों की सेना को घुटनों पर ला दिया था)

3. सवाई जय सिंह को """महान वास्तुप्रिय""" राजा ना कहकर .. ........शाहजहाँ को यह उपाधि किस आधार मिली ...... ???
जबकि... साक्ष्य बताते हैं कि.... जयपुर के हवा महल से लेकर तेजोमहालिया {ताजमहल} तक .... महाराजा जय सिंह ने ही बनवाया था)

4. जो स्थान महान मराठा क्षत्रप वीर शिवाजी को मिलना चाहिये वो.......... क्रूर और आतंकी औरंगजेब को क्यों और कैसे मिल गया ..????

5. स्वामी विवेकानंद और आचार्य चाणक्य की जगह... ..... गांधी को महात्मा बोलकर .... हिंदुस्तान पर क्यों थोप दिया गया...??????

6. तेजोमहालय- ताजमहल...........लालकोट- लाल किला...........फतेहपुर सीकरी का देव महल- बुलन्द दरवाजा........ एवं सुप्रसिद्घ गणितज्ञ वराह मिहिर की मिहिरावली (महरौली) स्थित वेधशाला- कुतुबमीनार.............. क्यों और कैसे हो गया....?????

7. यहाँ तक कि..... राष्ट्रीय गान भी..... संस्कृत के वन्दे मातरम की जगह................. गुलामी का प्रतीक ""जन-गण-मन हो गया""..... कैसे और क्यों हो गया....??????

8. और तो और.... हमारे अराध्य ... भगवान् राम.. कृष्ण.............. तो इतिहास से कहाँ और कब गायब हो गये......... पता ही नहीं चला..........आखिर कैसे ????

9. हद तो यह कि... .... हमारे अराध्य भगवान राम की जन्मभूमि पावन अयोध्या .... भी कब और कैसे विवादित बना दी गयी... हमें पता तक नहीं चला....!

कहने का मतलब ये है कि..... हमारे दुश्मन सिर्फ.... बाबर , गजनवी , लंगड़ा तैमूरलंग..... या आज के दढ़ियल मुल्ले ही नहीं हैं...... बल्कि आज के सफेदपोश सेक्यूलर भी हमारे उतने ही बड़े दुश्मन हैं.... जिन्होंने हम हिन्दुओं के अन्दर हीन भावना भर ..... हिन्दुओं को सेक्यूलर नामक नपुंसक बनाने का बीड़ा उठा रखा है.....!


हमें पहचाना होगा ऐसे दुश्मनों को..... क्योंकि ये वही लोग हैं...... जो हर हिन्दू संस्कृति को भगवा आतंकवाद का नारा देते हैं.... और, नरेन्द्र भाई मोदी जैसे हिंदूवादी और देशभक्त को..... आगे बढ़ने से रोकना चाहते हैं...... ताकि ... उनके नापाक मंसूबे हमेशा पूरे होते रहें...!

लेकिन... चाहे कुछ भी हो जाए..... हमलोग.... उनके ऐसे नापाक मंसूबों पर पानी फेरते हुए .......... हिन्दुस्थान को हिन्दुराष्ट्र बना कर ही रहेंगे....!

जय हिन्दू राष्ट्र ....!

जय महाकाल...!!!

Friday, December 21, 2012

भारत को एक धर्मनिरपेक्ष देश घोषित नहीं था


क्या आप जानते हैं कि..... संविधान निर्माताओं द्वारा भारत को एक "धर्मनिरपेक्ष राज्य" राज्य घोषित नहीं किया गया था...!

जी हाँ.. यह बिलकुल सत्य है.. और भारत के संविधान निर्माताओं द्वारा भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राज्य कतई भी घोषित नहीं किया गया था....

बल्कि..... ""धर्मनिरपेक्ष"" शब्द भारतीय संविधान में उसके काफी समय बाद ... यानि कि संविधान में 42 वां संशोधन कर सन 1976 में... स्वर्गीय इंदिरा गाँधी द्वारा ... भारतीय बहुसंख्यक जनता पर जबरदस्ती थोपा गया है.... ताकि समय आने पर अपने वोट बैंक के लिए इस शब्द का मनमाने तरीके से इस्तेमाल किया जा सके..... जैसे कि .. आज किया भी जा रहा है....!

धर्मनिरपेक्ष का शाब्दिक अर्थ होता है...... धर्म + निरपेक्ष .... अर्थात वैसा राज्य .... जो किसी खास धर्म या संप्रदाय को प्रोत्साहित नहीं करेगा.... और धर्म के मामले में वो तथष्ठ रहेगा....!

परन्तु... आज कुछ सत्तालोपुप लोगों ने धर्मनिरपेक्षता का मतलब... मुल्ला तुष्टिकरण समझाने में लगे रहते हैं और..... बहुत सारे जयचंद किस्म के दोगले बिना जाने-समझे उनकी हाँ में हाँ मिलाते रहते हैं... !


मुस्लिमों को 4 .50 % का आरक्षण... हज में सब्सिडी... मदरसों को अनुदान.... इत्यादि, इनकी दोगली नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं..!

और सिर्फ इतना ही नहीं....
विश्व मे पहली बार इस देश मे सांप्रदायिक बजट आया....2008-09 के बजट मे मुस्लिम आबादी वाले 90 जिलों और 338 नगरों/कस्बों के लिए 3780 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा हुई केन्द्रीय वित्तमंत्री ने मदरसा शिक्षा के लिए 80 करोड़ व राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के लिए 75 करोड़ रुपये के साथ सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया…..जनवरी 2008 में ही आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने अल्पसंख्यक संप्रदाय के छात्रों के लिए 1868 करोड़ रुपये की घोषणा की गयी .


एक तरफ विस्थापित कश्मीरी पंडित ... टेंटों में जानवरों से भी बदतर.. और दयनीय जीवन जीने को मजबूर हैं... पिग्गिस्तान में हिन्दुओं पर जी भर कर जुल्म किये जा रहे हैं ... वहीँ हमारे हिंदुस्तान में सत्ता और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सेकुलर नामक जीव अपनी माँ, बहनों और बेटियों को मुल्लों के बिस्तर पर सुलाने की ठान रखी है...!

जागो हिन्दुओं... नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब.... 15 % हिन्दू लड़कियों को भी मुल्लों से शादी करने के लिए अनिवार्य बना दिया जाएगा...!



अगर आप मेरे से सहमत है तो मेरे साथ आवाज़ मिलाये और अगर मेरे विरुद्ध तो विरोध में बोले पर मौन न रहे।क्योंकि मौन रहना उचित नहीं यही तो एक कमी है हम मौन रहकर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं करते और हमारा शत्रु प्रबल हो जाता है और हमारे सगे कमजोर।मौन न रहे अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे।

जय हिन्द जय भारत जय हिंदुत्व जय महाकाल

Thursday, December 20, 2012

सम्प्रय्दिक हिन्दुओं का सच

सम्प्रय्दिक हिन्दुओं का सच
(यह सिर्फ मीडिया का फैलाया हुआ भ्रम है लेख पड़ें)


कभी सोचा है के हिंदुस्तान में सिर्फ हिन्दू मुस्लिम दंगे क्यूँ होते हैं , कभी हिन्दू - पारसी , हिन्दू -यहूदी , हिन्दू -बौध दंगे क्यूँ नहि?

आप को एक बात और बता दें 1984 में भी हिन्दू-सिख दंगे नहीं हुए थे . में जो हुआ वोह था 'स्टेट स्पॉन्सर्ड एक्ट ऑफ़ टेरर " 

अब देखें एक्ट ऑफ़ टेरर को क्या कहा गया है act of terrorism - the calculated use of violence (or the threat of violence) against civilians in order to attain goals that are political or religious or ideological in nature; this is done through intimidation or coercion or instilling fear

विश्व स्त्र पे भी आप को मीडिया यह नहीं बताएगा के जिन जिन देशों में मुसलमानों की संख्या बाद गयी है वहां भी ऐसे साजिश चल रहे है जिस के तेहत वहां के लोगों को ह़ी सम्रदायक कहा जा रहा है जब वोह मुसलमानों के कभी भी ना स्तिमिलित होने वाली आदतों से परेशां हो जाते हैं , मीडिया वहां भी ऐसे ही झूठ बोलता है जैसे 'यू आर रेसिस्ट ' ..हिंदुस्तान में हमें सम्रदय्क कहा जाता है वहां उन लोगों को रेसिस्ट , याँ एक नया शबद निकला है 'इस्लामोफोबिया , वहा भी झूठे 'वाइट टेररिस्ट पैदा कर दिए गए हैं जैसे यहाँ सैफरन टेररिस्ट . विश्व के लोग अब इस बात को समझ गए हैं के यह सब मीडिया की फलाई हुई बातें हैं , , 

यूरोप के सभी देशों में इन लोगों ने एक अन्तराष्ट्रीय कांस्पीरेसी के तेहत फ़ैल कर , ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा कर के और कभी भी वहा के कानूनों को ना अपना के , उन देशों की आर्थिक व्यवस्था को भारी नुक्सान पहुँचाना शुरू कर दिया है , वहा जा के भी इनलोगों ने घेटो (ghetto )बना लिए हैं जहाँ यह लोग रहते हैं और जहाँ किसी भी वाइट मन के लिए जाना सुरक्षित नहीं है , पुलिस इन एरियाज को " नो गो" एरियाज कहती हैं . जब शुरू में इन एरियाज में दंगे होते थे और वहन की भोली पुलिस बिना किसी हतियार के वहां जाती थी तो यह दंगे बज उन्हें ही मरने लगते थे , अब पुलिस दंगो मैं इन एरियाज में जाती हे नहीं है और जाती भी ई तो पूरे बेक उप से साथ . इन एरियाज को इनलोगों ने "शरिया -जोंस" बना लिया है , यानि इन जगहों पे रहने वालों पे उस देश का नहीं शरिया का कानून लागु होगा , और पोलिस से छुप के यह लोग छोटी बचियों की शादी से ले के , पोल्य्गामी यानि एक से ज्यादा शादी , फीमेल गेनेतिकल मुतिलतिओन ... और जिहाद फैलाना जैसे सरे गतिविधियाँ करते हैं , जिससे आज यूरोप और अमेरिका भी इन लोगों से परेशां हो गए हैं .

इसलिए अगर आप लोगों के अन्दर एक परसेंट भी यह भावना है के हम लोग किसी भी तरह मुसलमानों की किसी भी स्तिथि के लिए जिम्मेदार हैं , या न फिर इनकी गतिविधियों के जिमेदार अशिक्षा है ,

या न फिर हिन्दू टेरर भी तो होता है , तो आंखें खोलिए , यह सिर्फ मीडिया का फैलाया असत्य